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Faridabad News: शहर का सीवेज सिस्टम होगा मजबूत, यमुना में नहीं जाएगा गंदा पानी
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एफएमडीए ने 225.5 एमएलडी क्षमता का टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम शुरू किया, उद्योग और हरियाली को मिलेगा सहारा
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिले में सीवेज की समस्या अब सिर्फ गंदे नालों या बदबू तक सीमित नहीं रही है बल्कि यह यमुना के बढ़ते प्रदूषण की बड़ी वजह बन चुकी है। शहर से हर दिन निकलने वाला भारी मात्रा में सीवेज बिना पूरी तरह साफ हुए नदी में जा रहा है लेकिन अब तस्वीर बदलने की तैयारी है । एफएमडीए ने करीब 225.5 एमएलडी क्षमता के नए टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम शुरू किया है। इस योजना में पुराने सिस्टम को सुधारने के साथ अगले 15 साल में बढ़ने वाली आबादी, उद्योग और पानी की जरूरतों को जोड़कर यह पूरा ढांचा तैयार किया गया है ताकि बार-बार संकट खड़ा न हो।
फिलहाल फरीदाबाद में रोजाना करीब 450 एमएलडी सीवेज पैदा हो रहा है लेकिन इसे पूरी तरह साफ करने की क्षमता नहीं है, इसी वजह से बड़ी मात्रा में गंदा पानी सीधे यमुना में जा रहा है। कई इलाकों में खुले नाले, बदबू और मच्छरों का असर लोगों की दिनचर्या तक प्रभावित हो रही रहा है। इस योजना के तहत यमुना को साफ करने के साथ लोगों की समस्याओं का स्थायी समाधान कर दिया जाएगा।
प्रोजेक्ट का ब्लूप्रिंट तैयार, जमीनी स्तर पर होंगे बड़े बदलाव
शहर के तीन अहम हिस्सों प्रतापगढ़, मिर्जापुर और बदरपुर सैद को इस योजना का केंद्र बनाया गया है। प्रतापगढ़ में मौजूदा 100 एमएलडी क्षमता को बढ़ाकर 170 एमएलडी किया जाएगा। मिर्जापुर 80 से बढ़कर 160 एमएलडी तक पहुंचेगा जबकि बदरपुर सैद 45 से सीधे 125 एमएलडी क्षमता तक जाएगा। कुल मिलाकर 225.5 एमएलडी की नई टर्शियरी ट्रीटमेंट क्षमता जुड़ने से शहर का सीवेज सिस्टम पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगा।
अब पानी सिर्फ साफ नहीं, उपयोग लायक होगा
नई व्यवस्था में पानी को केवल फिल्टर करके छोड़ा नहीं जाएगा बल्कि उसे उस स्तर तक साफ किया जाएगा कि दोबारा इस्तेमाल किया जा सके। ट्रीटमेंट के बाद बीओडी 5 एमजी/एल से कम और टीएसएस 10 एमजी/एल से नीचे रखा जाएगा। आसान भाषा में कहें तो पानी इतना साफ होगा कि दिखने में भी साफ लगेगा और इस्तेमाल के लिए सुरक्षित भी रहेगा।
गंदा पानी अब बेकार नहीं जाएगा
इस योजना की सबसे दिलचस्प बात यही है कि सीवेज को अब समस्या नहीं, संसाधन माना जा रहा है। ट्रीट किया गया पानी शहर के पार्कों में हरियाली बनाए रखने के काम आएगा, सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल होगा और उद्योगों को भी दिया जाएगा। इससे एक तरफ पीने के पानी की बचत होगी तो दूसरी तरफ भूजल का दबाव भी कम होगा।
लोगों को भी दिखेंगे बदलाव
इस बदलाव का असर सीधे लोगों की जिंदगी पर दिखेगा। जिन इलाकों में आज बदबू और गंदगी से लोग परेशान हैं वहां राहत मिलेगी। मच्छर और गंदे पानी से फैलने वाली बीमारियों में कमी आएगी। सेक्टरों के पार्क ज्यादा हरे-भरे दिखेंगे। साथ ही उद्योगों को सस्ता पानी मिलने से उनकी लागत घटेगी जिसका फायदा रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था तक पहुंचेगा।
यमुना के लिए भी राहत की उम्मीद
फरीदाबाद का सीवेज लंबे समय से यमुना के प्रदूषण में हिस्सा डाल रहा था। अब जब साफ किया हुआ पानी ही नदी में जाएगा तो इसका सीधा असर यमुना की सेहत पर पड़ेगा। यह बदलाव धीरे-धीरे दिखेगा लेकिन दिशा सही मानी जा रही है।
100 करोड़ से कई चरण में होगा काम
तीनों प्रमुख प्लांट्स पर मिलाकर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है। प्रतापगढ़ और मिर्जापुर पर करीब 31.5-31.5 करोड़ रुपये, जबकि बदरपुर सैद पर लगभग 33.75 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। काम चरणों में पूरा किया जाएगा ताकि शहर की व्यवस्था पर ज्यादा असर न पड़े।
आगे तक का रोडमैप तैयार
अभी फरीदाबाद की करीब 60 प्रतिशत आबादी ही सीवरेज नेटवर्क से जुड़ी है। लक्ष्य है कि 2024-25 तक इसे 80 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। इसके साथ ही शहर को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज की दिशा में ले जाने की योजना है यानी भविष्य में बिना उपचार के पानी बाहर न जाए।
इस बार निगरानी भी रहेगी सख्त
पहले कई योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाईं लेकिन इस बार निगरानी को लेकर सख्ती दिखाई जा रही है। एनजीटी के रुख के बाद अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है और प्रोजेक्ट की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि काम समय पर पूरा हो और इसका फायदा जमीन पर दिखे।
सीवरेज के पानी को साफ करके उपयोग में लाने के लिए प्राथमिकता से काम किया जा रहा है। - विशाल बंसल, चीफ इंजीनियर एफएमडीए
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिले में सीवेज की समस्या अब सिर्फ गंदे नालों या बदबू तक सीमित नहीं रही है बल्कि यह यमुना के बढ़ते प्रदूषण की बड़ी वजह बन चुकी है। शहर से हर दिन निकलने वाला भारी मात्रा में सीवेज बिना पूरी तरह साफ हुए नदी में जा रहा है लेकिन अब तस्वीर बदलने की तैयारी है । एफएमडीए ने करीब 225.5 एमएलडी क्षमता के नए टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम शुरू किया है। इस योजना में पुराने सिस्टम को सुधारने के साथ अगले 15 साल में बढ़ने वाली आबादी, उद्योग और पानी की जरूरतों को जोड़कर यह पूरा ढांचा तैयार किया गया है ताकि बार-बार संकट खड़ा न हो।
फिलहाल फरीदाबाद में रोजाना करीब 450 एमएलडी सीवेज पैदा हो रहा है लेकिन इसे पूरी तरह साफ करने की क्षमता नहीं है, इसी वजह से बड़ी मात्रा में गंदा पानी सीधे यमुना में जा रहा है। कई इलाकों में खुले नाले, बदबू और मच्छरों का असर लोगों की दिनचर्या तक प्रभावित हो रही रहा है। इस योजना के तहत यमुना को साफ करने के साथ लोगों की समस्याओं का स्थायी समाधान कर दिया जाएगा।
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प्रोजेक्ट का ब्लूप्रिंट तैयार, जमीनी स्तर पर होंगे बड़े बदलाव
शहर के तीन अहम हिस्सों प्रतापगढ़, मिर्जापुर और बदरपुर सैद को इस योजना का केंद्र बनाया गया है। प्रतापगढ़ में मौजूदा 100 एमएलडी क्षमता को बढ़ाकर 170 एमएलडी किया जाएगा। मिर्जापुर 80 से बढ़कर 160 एमएलडी तक पहुंचेगा जबकि बदरपुर सैद 45 से सीधे 125 एमएलडी क्षमता तक जाएगा। कुल मिलाकर 225.5 एमएलडी की नई टर्शियरी ट्रीटमेंट क्षमता जुड़ने से शहर का सीवेज सिस्टम पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगा।
अब पानी सिर्फ साफ नहीं, उपयोग लायक होगा
नई व्यवस्था में पानी को केवल फिल्टर करके छोड़ा नहीं जाएगा बल्कि उसे उस स्तर तक साफ किया जाएगा कि दोबारा इस्तेमाल किया जा सके। ट्रीटमेंट के बाद बीओडी 5 एमजी/एल से कम और टीएसएस 10 एमजी/एल से नीचे रखा जाएगा। आसान भाषा में कहें तो पानी इतना साफ होगा कि दिखने में भी साफ लगेगा और इस्तेमाल के लिए सुरक्षित भी रहेगा।
गंदा पानी अब बेकार नहीं जाएगा
इस योजना की सबसे दिलचस्प बात यही है कि सीवेज को अब समस्या नहीं, संसाधन माना जा रहा है। ट्रीट किया गया पानी शहर के पार्कों में हरियाली बनाए रखने के काम आएगा, सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल होगा और उद्योगों को भी दिया जाएगा। इससे एक तरफ पीने के पानी की बचत होगी तो दूसरी तरफ भूजल का दबाव भी कम होगा।
लोगों को भी दिखेंगे बदलाव
इस बदलाव का असर सीधे लोगों की जिंदगी पर दिखेगा। जिन इलाकों में आज बदबू और गंदगी से लोग परेशान हैं वहां राहत मिलेगी। मच्छर और गंदे पानी से फैलने वाली बीमारियों में कमी आएगी। सेक्टरों के पार्क ज्यादा हरे-भरे दिखेंगे। साथ ही उद्योगों को सस्ता पानी मिलने से उनकी लागत घटेगी जिसका फायदा रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था तक पहुंचेगा।
यमुना के लिए भी राहत की उम्मीद
फरीदाबाद का सीवेज लंबे समय से यमुना के प्रदूषण में हिस्सा डाल रहा था। अब जब साफ किया हुआ पानी ही नदी में जाएगा तो इसका सीधा असर यमुना की सेहत पर पड़ेगा। यह बदलाव धीरे-धीरे दिखेगा लेकिन दिशा सही मानी जा रही है।
100 करोड़ से कई चरण में होगा काम
तीनों प्रमुख प्लांट्स पर मिलाकर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है। प्रतापगढ़ और मिर्जापुर पर करीब 31.5-31.5 करोड़ रुपये, जबकि बदरपुर सैद पर लगभग 33.75 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। काम चरणों में पूरा किया जाएगा ताकि शहर की व्यवस्था पर ज्यादा असर न पड़े।
आगे तक का रोडमैप तैयार
अभी फरीदाबाद की करीब 60 प्रतिशत आबादी ही सीवरेज नेटवर्क से जुड़ी है। लक्ष्य है कि 2024-25 तक इसे 80 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। इसके साथ ही शहर को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज की दिशा में ले जाने की योजना है यानी भविष्य में बिना उपचार के पानी बाहर न जाए।
इस बार निगरानी भी रहेगी सख्त
पहले कई योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाईं लेकिन इस बार निगरानी को लेकर सख्ती दिखाई जा रही है। एनजीटी के रुख के बाद अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है और प्रोजेक्ट की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि काम समय पर पूरा हो और इसका फायदा जमीन पर दिखे।
सीवरेज के पानी को साफ करके उपयोग में लाने के लिए प्राथमिकता से काम किया जा रहा है। - विशाल बंसल, चीफ इंजीनियर एफएमडीए