{"_id":"6a2b10629a9b46224d0c0ab4","slug":"unable-to-find-a-vehicle-they-took-the-body-home-on-a-handcart-faridabad-news-c-26-1-fbd1021-72188-2026-06-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: वाहन नहीं मिला तो ठेले पर घर ले गए शव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: वाहन नहीं मिला तो ठेले पर घर ले गए शव
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बीके नागरिक अस्पताल की घटना, मरीज की मौत के बाद परिजनों की मजबूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल में एक बार फिर शव वाहन उपलब्ध न होने का मामला सामने आया है। सांस की तकलीफ से पीड़ित एक व्यक्ति की मौत के बाद परिजनों को शव घर ले जाने के लिए वाहन नहीं मिला। मजबूरी में परिजन मृतक के शव को सब्जी वाले ठेले पर रखकर घर ले गए। घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार राहुल कॉलोनी निवासी फिरोज पिछले कई दिनों से सांस संबंधी बीमारी से परेशान थे। मंगलवार रात अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और उन्हें उल्टियां भी होने लगीं। परिजन उन्हें तुरंत बीके नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने के कुछ समय बाद ही फिरोज ने दम तोड़ दिया।
परिजनों का आरोप है कि मौत के बाद उन्हें शव को घर ले जाने के लिए कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। काफी देर तक इंतजार करने के बावजूद व्यवस्था नहीं होने पर उन्हें सब्जी वाले ठेले का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद परिजन शव को ठेले पर रखकर अपने घर ले गए।
विज्ञापन
यह पहला मामला नहीं है। इसी साल जनवरी में एक टीबी पीड़ित महिला की मौत के बाद परिजनों को शव वाहन नहीं मिला था। उस समय भी शव को ठेले पर ले जाने का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया था। घटना पर संज्ञान लेते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जवाब तलब किया था। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन भी किया गया था।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से अस्पताल में शव वाहन व्यवस्था की उपलब्धता और उसके संचालन पर सवाल उठ रहे हैं। आम लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को कम से कम अंतिम समय में ऐसी परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए।
आपातकालीन विभाग के बाहर शव वाहन की उपलब्धता संबंधी सूचना बोर्ड लगाया गया है, जिस पर चालक का मोबाइल नंबर भी अंकित है। जरूरत पड़ने पर कोई भी व्यक्ति उस नंबर पर संपर्क कर सकता है। कई बार लोग संपर्क नहीं करते हैं। फिर भी नर्सिंग अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जरूरतमंद परिजनों को शव वाहन उपलब्ध कराया जाए।
-डॉ. विकास गोयल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल में एक बार फिर शव वाहन उपलब्ध न होने का मामला सामने आया है। सांस की तकलीफ से पीड़ित एक व्यक्ति की मौत के बाद परिजनों को शव घर ले जाने के लिए वाहन नहीं मिला। मजबूरी में परिजन मृतक के शव को सब्जी वाले ठेले पर रखकर घर ले गए। घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार राहुल कॉलोनी निवासी फिरोज पिछले कई दिनों से सांस संबंधी बीमारी से परेशान थे। मंगलवार रात अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और उन्हें उल्टियां भी होने लगीं। परिजन उन्हें तुरंत बीके नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने के कुछ समय बाद ही फिरोज ने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
परिजनों का आरोप है कि मौत के बाद उन्हें शव को घर ले जाने के लिए कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। काफी देर तक इंतजार करने के बावजूद व्यवस्था नहीं होने पर उन्हें सब्जी वाले ठेले का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद परिजन शव को ठेले पर रखकर अपने घर ले गए।
यह पहला मामला नहीं है। इसी साल जनवरी में एक टीबी पीड़ित महिला की मौत के बाद परिजनों को शव वाहन नहीं मिला था। उस समय भी शव को ठेले पर ले जाने का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया था। घटना पर संज्ञान लेते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जवाब तलब किया था। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन भी किया गया था।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से अस्पताल में शव वाहन व्यवस्था की उपलब्धता और उसके संचालन पर सवाल उठ रहे हैं। आम लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को कम से कम अंतिम समय में ऐसी परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए।
आपातकालीन विभाग के बाहर शव वाहन की उपलब्धता संबंधी सूचना बोर्ड लगाया गया है, जिस पर चालक का मोबाइल नंबर भी अंकित है। जरूरत पड़ने पर कोई भी व्यक्ति उस नंबर पर संपर्क कर सकता है। कई बार लोग संपर्क नहीं करते हैं। फिर भी नर्सिंग अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जरूरतमंद परिजनों को शव वाहन उपलब्ध कराया जाए।
-डॉ. विकास गोयल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी