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Delhi NCR News: गंगवानी में बढ़ा बंदरों का खौफ, दर्जनभर लोग हो चुके जख्मी
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गंगवानी गांव में घर की छत पर घूमते बंदर।
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एक वर्ष पहले ग्रामीणों ने पहल करते हुए बंदरों को पकड़कर पहाड़ी क्षेत्र में छोड़ा था, मिली थी राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
पिनगवां। गांव गंगवानी में एक बार फिर बंदरों का आतंक बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। दर्जनभर लोग उनके हमले से जख्मी हो चुके है। गांव में बंदरों के पहुंचने से लोगों को घरों से बाहर निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदर आए दिन घरों में घुसकर खाने-पीने का सामान उठा ले जाते हैं और लोगों पर हमला करने का प्रयास करते हैं। सबसे अधिक परेशानी बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब एक वर्ष पहले भी गांव में बंदरों का आतंक काफी बढ़ गया था। उस समय ग्रामीणों ने खुद पहल करते हुए बंदरों को पकड़कर पहाड़ी क्षेत्र में छोड़ दिया था। इसके बाद कुछ समय तक गांव में स्थिति सामान्य रही, लेकिन अब दोबारा बड़ी संख्या में बंदर गांव में पहुंच गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वे दिनभर गांव की गलियों, घरों की छतों पर घूमते रहते हैं।
ग्रामीण साजिद खान, साबिर खान, जमालुद्दीन, अलाउद्दीन, आमिर खान, सोहेल खान, शाहिद खान, आकिल खान और मुजाहिद खान ने बताया कि बंदर दर्जन भर से अधिक बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर हमला कर चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई लोग बंदरों के हमले से जख्मी भी हुए हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को लेकर अभिभावकों में विशेष चिंता बनी हुई है। बच्चों को अकेले स्कूल भेजने और बाहर खेलने से रोकना पड़ रहा है।
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भगाने का प्रयास करने पर होते हैं आक्रामक
ग्रामीणों ने बताया कि बंदर घरों की छतों पर चढ़कर कपड़े और घरेलू सामान को नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार घरों में घुसकर रसोई से खाने-पीने का सामान उठा ले जाते हैं। लोगों द्वारा उन्हें भगाने का प्रयास करने पर बंदर आक्रामक हो जाते हैं। स्कूल के आसपास बंदरों का उत्पात सबसे अधिक बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों के डर से छोटे बच्चों और बुजुर्गों को अकेले घर से बाहर भेजना मुश्किल हो गया है। खेतों में काम करने जाने वाली महिलाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से जल्द विशेष अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ने तथा उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की मांग की है।
कोट
बंदरों का आतंक सबसे ज्यादा स्कूल के आसपास है। बच्चों को स्कूल भेजते समय अभिभावक चिंतित रहते हैं। प्रशासन को अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ना चाहिए। -शाहिद खान, ग्रामीण
करीब एक साल पहले ग्रामीणों ने बंदरों को पकड़कर पहाड़ी क्षेत्र में छोड़ा था। कुछ समय राहत मिली, लेकिन अब दोबारा बड़ी संख्या में बंदर गांव में आ गए हैं। -साजिद खान, ग्रामीण
बंदर घरों की छतों पर चढ़कर कपड़े और घरेलू सामान खराब कर देते हैं। कई बार लोगों पर हमला भी करते हैं। वन विभाग को जल्द प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। -आकिल खान, ग्रामीण
वर्जन
मामला संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा कोई मामला सामने आया है तो इसकी जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई होगी। -अंकित यादव, पंचायत अधिकारी, खंड पिनगवां
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संवाद न्यूज एजेंसी
पिनगवां। गांव गंगवानी में एक बार फिर बंदरों का आतंक बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। दर्जनभर लोग उनके हमले से जख्मी हो चुके है। गांव में बंदरों के पहुंचने से लोगों को घरों से बाहर निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदर आए दिन घरों में घुसकर खाने-पीने का सामान उठा ले जाते हैं और लोगों पर हमला करने का प्रयास करते हैं। सबसे अधिक परेशानी बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब एक वर्ष पहले भी गांव में बंदरों का आतंक काफी बढ़ गया था। उस समय ग्रामीणों ने खुद पहल करते हुए बंदरों को पकड़कर पहाड़ी क्षेत्र में छोड़ दिया था। इसके बाद कुछ समय तक गांव में स्थिति सामान्य रही, लेकिन अब दोबारा बड़ी संख्या में बंदर गांव में पहुंच गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वे दिनभर गांव की गलियों, घरों की छतों पर घूमते रहते हैं।
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ग्रामीण साजिद खान, साबिर खान, जमालुद्दीन, अलाउद्दीन, आमिर खान, सोहेल खान, शाहिद खान, आकिल खान और मुजाहिद खान ने बताया कि बंदर दर्जन भर से अधिक बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर हमला कर चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई लोग बंदरों के हमले से जख्मी भी हुए हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को लेकर अभिभावकों में विशेष चिंता बनी हुई है। बच्चों को अकेले स्कूल भेजने और बाहर खेलने से रोकना पड़ रहा है।
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भगाने का प्रयास करने पर होते हैं आक्रामक
ग्रामीणों ने बताया कि बंदर घरों की छतों पर चढ़कर कपड़े और घरेलू सामान को नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार घरों में घुसकर रसोई से खाने-पीने का सामान उठा ले जाते हैं। लोगों द्वारा उन्हें भगाने का प्रयास करने पर बंदर आक्रामक हो जाते हैं। स्कूल के आसपास बंदरों का उत्पात सबसे अधिक बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों के डर से छोटे बच्चों और बुजुर्गों को अकेले घर से बाहर भेजना मुश्किल हो गया है। खेतों में काम करने जाने वाली महिलाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से जल्द विशेष अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ने तथा उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की मांग की है।
कोट
बंदरों का आतंक सबसे ज्यादा स्कूल के आसपास है। बच्चों को स्कूल भेजते समय अभिभावक चिंतित रहते हैं। प्रशासन को अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ना चाहिए। -शाहिद खान, ग्रामीण
करीब एक साल पहले ग्रामीणों ने बंदरों को पकड़कर पहाड़ी क्षेत्र में छोड़ा था। कुछ समय राहत मिली, लेकिन अब दोबारा बड़ी संख्या में बंदर गांव में आ गए हैं। -साजिद खान, ग्रामीण
बंदर घरों की छतों पर चढ़कर कपड़े और घरेलू सामान खराब कर देते हैं। कई बार लोगों पर हमला भी करते हैं। वन विभाग को जल्द प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। -आकिल खान, ग्रामीण
वर्जन
मामला संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा कोई मामला सामने आया है तो इसकी जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई होगी। -अंकित यादव, पंचायत अधिकारी, खंड पिनगवां