सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Future Skills Index: India ranks 13th

Future Skills Index: भारत का 13वां स्थान, मजबूत आर्थिक क्षमता और ईकोसिस्टम की सराहना मगर स्किल गैप चुनौती

सीमा शर्मा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 24 Jun 2026 06:19 AM IST
विज्ञापन
सार

रिपोर्ट में भारत की मजबूत आर्थिक क्षमता और तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम की सराहना की गई है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी गई है कि उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करना देश की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

Future Skills Index: India ranks 13th
demo - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार

क्यूएस वर्ल्ड फ्यूचर स्किल्स इंडेक्स 2027 में भारत 89 देशों में 13वें स्थान पर रहा है। रिपोर्ट में भारत की मजबूत आर्थिक क्षमता और तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम की सराहना की गई है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी गई है कि उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करना देश की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।



क्यूएस के अध्यक्ष नुनजियो क्वाक्वेरेली ने कहा कि भारत ने भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत आधार तैयार किया है, लेकिन अब ध्यान कौशल की गुणवत्ता और उसकी निरंतरता पर केंद्रित करने की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार भारत को पिछले एक दशक में शिक्षा और डिजिटल अवसंरचना के असाधारण विस्तार का लाभ मिला है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यही वजह है कि देश 89.4 अंकों के साथ वैश्विक रैंकिंग में 13वें स्थान पर पहुंचा है। कम और मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में भारत ‘फ्यूचर ऑफ वर्क’ संकेतक में पांचवें, आर्थिक परिवर्तन (इकोनॉमिक ट्रांसफॉर्मेशन) में 14वें और कौशल तालमेल (स्किल फिट) में 18वें स्थान पर है। 
विज्ञापन


सूचकांक में शीर्ष पर रहने वाले अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देश वर्कफोर्स ट्रांसफॉर्मेशन में इसलिए आगे हैं क्योंकि वहां एआई का उपयोग मानव उत्पादकता को बढ़ाने के लिए हो रहा है, न कि इंसानों को बदलने के लिए।

उच्च कौशल वाले ग्रेजुएट तैयार करना बड़ी परीक्षा
रिपोर्ट में कहा गया है कि रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप उच्च कौशल वाले स्नातक तैयार करना अभी भी भारत के लिए बड़ी चुनौती है। देश के पास करीब 58 लाख पेशेवरों वाला दुनिया का सबसे बड़ा आईटी कार्यबल है, लेकिन बदलती तकनीकों के अनुरूप इसके निरंतर कौशल अपग्रेड करने की आवश्यकता होगी।रिपोर्ट के मुताबिक कृषि, स्वास्थ्य सेवा, वित्तीय और व्यावसायिक सेवाओं में एआई का बढ़ता उपयोग भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत कर सकता है।

हालांकि बीपीओ और कॉल सेंटर जैसे पारंपरिक रूप से मजबूत क्षेत्रों पर ऑटोमेशन का सबसे अधिक दबाव रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में सफलता उन देशों को मिलेगी जो एआई का उपयोग मानव क्षमता बढ़ाने के लिए करेंगे, न कि मानव श्रम को पूरी तरह प्रतिस्थापित करने के लिए।

आर्थिक क्षमता में पूरे अंक
भारत ने लगातार तीन वर्षों तक जी-20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बने रहने, मजबूत जीडीपी वृद्धि, श्रम बाजार में निवेश और बुनियादी ढांचे पर फोकस के दम पर क्यूएस के ‘इकोनॉमिक कैपेसिटी’ संकेतक में 100 में से 100 अंक हासिल किए हैं। इस श्रेणी में भारत शीर्ष स्थान पर रहा। रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत एआई को प्रभावी ढंग से अपनाने में सफल रहता है तो 2030 तक अर्थव्यवस्था में करीब 500 अरब डॉलर का अतिरिक्त योगदान जुड़ सकता है।

देश का डिजिटल कार्यबल तेजी से ऐसे स्तर पर पहुंच रहा है, जिसकी बराबरी दुनिया के बहुत कम देश कर सकते हैं। दुनिया के सबसे बड़े आईटी कार्यबल और विशाल उच्च शिक्षित युवा आबादी के कारण भारत के पास अगले दशक में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बने रहने की क्षमता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed