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Delhi NCR News: सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए करवाएं पैपस्मीयर टेस्ट
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-सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए केवल 1-2% महिलाएं ही करवातीं हैं पैपस्मीयर टेस्ट
- एचपीवी वैक्सीन सही उम्र उम्र में लगवाने से कैंसर से बचाव संभव
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के मुंह का कैंसर) से बचाव के लिए निशुल्क ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीनेशन अभियान शुरू है, लेकिन जब तक महिलाएं खुद जागरूक नहीं होंगी, तब तक कैंसर से मुक्ति नहीं मिल सकेगी। अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए केवल 1-2% महिलाएं ही पैपस्मीयर टेस्ट करवाती हैं। यह टेस्ट करवाने वाली 5-10 महिलाओं का टेस्ट रिजल्ट असामान्य आता है।
भंगेल सीएचसी की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक ने बताया कि केवल सर्वाइल कैंसर की ही वैक्सीन उपलब्ध है। इस कैंसर के प्री-स्टेज का पता पैपस्मीयर टेस्ट से चल जाता है। अगर सही समय पर इलाज हो तो यह कैंसर ठीक हो सकता है। इस कैंसर की स्क्रीनिंग 21 की उम्र से शुरू कर देनी चाहिए और 65 तक हर तीन साल में करवाते रहना चाहिए।
सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अजय राणा ने बताया कि अस्पताल में शुरुआत से ही पैपस्मीयर टेस्ट किया जाता है। रोजाना ओपीडी में आने वाली 10 से 15 महिलाएं पैपस्मीयर टेस्ट करवातीं हैं।
साफ तौर पर दिखाई नहीं पड़ते शुरुआती लक्षण
मैक्स हॉस्पिटल के आब्सटेट्रिक्स और गायनी विभाग की प्रमुख डॉ. राखी गुप्ता ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण साफ तौर पर दिखाई नहीं देते। इससे बीमारी बहुत आगे बढ़ जाती है, जो जानलेवा भी साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि अगर एचपीवी वैक्सीन सही उम्र यानी 9 से 26 साल के बीच लग जाए तो सर्वाइकल कैंसर के कारक वायरस से काफी हद तक सुरक्षा संभव है।
चाइल्ड पीजीआई और जिला अस्पताल में निशुल्क लग रही वैक्सीन
जिला अस्पताल और चाइल्ड पीजीआई में किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन निशुल्क लगाई जा रही है। यह वैक्सीन उन किशोरियों को लगाई जा रहीं हैं, जो 14 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी हैं और 15 वर्ष से कम की हैं।
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- एचपीवी वैक्सीन सही उम्र उम्र में लगवाने से कैंसर से बचाव संभव
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के मुंह का कैंसर) से बचाव के लिए निशुल्क ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीनेशन अभियान शुरू है, लेकिन जब तक महिलाएं खुद जागरूक नहीं होंगी, तब तक कैंसर से मुक्ति नहीं मिल सकेगी। अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए केवल 1-2% महिलाएं ही पैपस्मीयर टेस्ट करवाती हैं। यह टेस्ट करवाने वाली 5-10 महिलाओं का टेस्ट रिजल्ट असामान्य आता है।
भंगेल सीएचसी की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक ने बताया कि केवल सर्वाइल कैंसर की ही वैक्सीन उपलब्ध है। इस कैंसर के प्री-स्टेज का पता पैपस्मीयर टेस्ट से चल जाता है। अगर सही समय पर इलाज हो तो यह कैंसर ठीक हो सकता है। इस कैंसर की स्क्रीनिंग 21 की उम्र से शुरू कर देनी चाहिए और 65 तक हर तीन साल में करवाते रहना चाहिए।
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सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अजय राणा ने बताया कि अस्पताल में शुरुआत से ही पैपस्मीयर टेस्ट किया जाता है। रोजाना ओपीडी में आने वाली 10 से 15 महिलाएं पैपस्मीयर टेस्ट करवातीं हैं।
साफ तौर पर दिखाई नहीं पड़ते शुरुआती लक्षण
मैक्स हॉस्पिटल के आब्सटेट्रिक्स और गायनी विभाग की प्रमुख डॉ. राखी गुप्ता ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण साफ तौर पर दिखाई नहीं देते। इससे बीमारी बहुत आगे बढ़ जाती है, जो जानलेवा भी साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि अगर एचपीवी वैक्सीन सही उम्र यानी 9 से 26 साल के बीच लग जाए तो सर्वाइकल कैंसर के कारक वायरस से काफी हद तक सुरक्षा संभव है।
चाइल्ड पीजीआई और जिला अस्पताल में निशुल्क लग रही वैक्सीन
जिला अस्पताल और चाइल्ड पीजीआई में किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन निशुल्क लगाई जा रही है। यह वैक्सीन उन किशोरियों को लगाई जा रहीं हैं, जो 14 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी हैं और 15 वर्ष से कम की हैं।