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Sahitya Academy: डॉ. प्रतिभा राय समेत तीन रचनाकारों को साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता, जल्द होगा सम्मान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 01 Apr 2026 03:56 AM IST
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सार

साहित्य अकादमी ने देश के तीन प्रख्यात साहित्यकारों को अपनी सर्वोच्च उपाधि ‘महत्तर सदस्यता’ प्रदान करने की घोषणा की है। अकादमी की सामान्य परिषद ने 30 मार्च को हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाई।

Three litterateurs including Dr. Pratibha Rai were given the higher membership of Sahitya Academy
कमानी सभागार में आयोजित साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 अर्पण समारोह में शामिल साहित्याकर - फोटो : संवाद
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विस्तार

भारतीय साहित्य जगत के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक रहा। साहित्य अकादमी ने देश के तीन प्रख्यात साहित्यकारों को अपनी सर्वोच्च उपाधि ‘महत्तर सदस्यता’ प्रदान करने की घोषणा की है। अकादमी की सामान्य परिषद ने 30 मार्च को हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाई।

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इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए ओड़िआ लेखिका डॉ. प्रतिभा राय, सिंधी साहित्यकार लख्मी खिलाणी और उर्दू के दिग्गज रचनाकार अब्दुस समद का चयन किया गया है। साहित्य अकादमी की यह सदस्यता भारतीय साहित्य के क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान मानी जाती है, जो केवल उन्हीं विरले साहित्यकारों को दी जाती है जिन्होंने अपने लेखन से साहित्य को नई ऊंचाइयां दी हों। अकादमी ने इसे संस्थान के लिए गौरव का विषय बताया है। जल्द ही एक विशेष समारोह में इन विभूतियों को औपचारिक रूप से सम्मानित किया जाएगा। 
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डॉ. प्रतिभा राय (ओड़िया): वर्ष 2011 की ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता डॉ. प्रतिभा राय के नाम 20 उपन्यास और 24 कथा संग्रह दर्ज हैं। उनके कालजयी उपन्यासों ‘’याज्ञसेनी’’ (द्रौपदी) और ‘’शिलापद्म’’ (कोणार्क) का हिंदी सहित कई विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. राय की 50 से अधिक कृतियां वैश्विक साहित्य की धरोहर हैं।

लखमी खिलाणी (सिंधी): सिंधी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर लखमी खिलाणी को उनके चर्चित कहानी-संग्रह ‘’गुफा जे हुन पार’’ के लिए 1996 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। दो दर्जन से अधिक पुस्तकों के रचयिता खिलाणी एक प्रख्यात संपादक और विद्वान भी हैं।

अब्दुस समद (उर्दू): बिहार के नालंदा से ताल्लुक रखने वाले अब्दुस समद उर्दू साहित्य के स्तंभ माने जाते हैं। सामाजिक यथार्थ को पन्नों पर उतारने वाले समद को साहित्य अकादमी और गालिब पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

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