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हाईवे पर दौड़ती कार में हैवानियत: वो चीखती रही, सात घंटे तक घुमाते रहे; 10वीं की छात्रा को अगवा कर दरिंदगी
Mon, 03 Aug 2026 09:39 AM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: Sharukh Khan
Updated Mon, 03 Aug 2026 09:39 AM IST
सार
यूपी के गाजियाबाद जिले से सनसनीखेज खबर सामने आई है। यहां 10वीं की छात्रा को अगवा कर चलती कार में सामूहिक दुष्कर्म किया गया। आरोपी नाबालिग को सात घंटे कार में घुमाते रहे। इसके बाद एनएच-9 पर फेंककर फरार हो गए। राहगीरों की मदद से अगले दिन पीड़िता घर पहुंची। शिकायत के बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
10वीं कक्षा की छात्रा को गाजियाबाद के मसूरी थाने के पास से अगवा कर दो आरोपियों ने चलती कार में उसके साथ दुष्कर्म किया। किशोरी को कार में लेकर आरोपी करीब सात घंटे तक शहर की सड़कों पर घूमते रहे। देर रात उसे बदहवास हालत में एनएच-9 के किनारे फेंककर फरार हो गए। पीड़िता अगले दिन घर पहुंची।
मां की शिकायत पर पुलिस ने पॉक्सो, सामूहिक दुष्कर्म समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर दोनों आरोपियों मुजाहिद (45) व सलीम अख्तर (48) को गिरफ्तार कर लिया है। पिलखुवा के आजमपुर दहपा गांव निवासी दोनों आरोपी दोस्त हैं और साथ में ईंट भट्ठे का कारोबार करते हैं।
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मां की शिकायत पर पुलिस ने पॉक्सो, सामूहिक दुष्कर्म समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर दोनों आरोपियों मुजाहिद (45) व सलीम अख्तर (48) को गिरफ्तार कर लिया है। पिलखुवा के आजमपुर दहपा गांव निवासी दोनों आरोपी दोस्त हैं और साथ में ईंट भट्ठे का कारोबार करते हैं।
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मुजाहिद पिलखुवा का हिस्ट्रीशीटर है। मसूरी की कॉलोनी में रहने वाली पीड़िता की मां ने पुलिस को बताया कि 27 जुलाई को बेटी (16) किसी काम से घर से निकली थी।
शाम करीब साढ़े सात बजे वह मसूरी थाने के पास एनएच-9 की सर्विस रोड के किनारे वाहन का इंतजार कर रही थी। तभी कार सवारों ने उसे अकेला देखकर अगवा कर लिया।
डराया... मारने की धमकी
पीड़िता ने पुलिस को बताया, आरोपियों ने विरोध करने पर उसे डराया और जान से मारने की धमकी दी। कार में वह चीखती रही और छोड़ने की गुहार लगाती रही, पर आरोपियों ने उसकी एक नहीं सुनी। । कार के शीशों पर सन शेड लगी हुई थी, जिससे बाहर से अंदर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
पीड़िता ने पुलिस को बताया, आरोपियों ने विरोध करने पर उसे डराया और जान से मारने की धमकी दी। कार में वह चीखती रही और छोड़ने की गुहार लगाती रही, पर आरोपियों ने उसकी एक नहीं सुनी। । कार के शीशों पर सन शेड लगी हुई थी, जिससे बाहर से अंदर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
पीड़िता ने बताया कि जब शिकायत करने की बात कही तो आरोपी देर रात ढाई बजे उसे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के पास फेंककर भाग गए। 28 जुलाई की सुबह किसी राहगीर की मदद से वह घर पहुंची।
वारदात के बाद घर जाकर सो गए
एसीपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि कार नंबर व मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर दोनों आरोपियों को पिलखुवा से गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने वारदात कबूल कर ली है। दोनों शादीशुदा हैं। वारदात के बाद दोनों घर जाकर आराम से सो गए। कार भी बरामद कर ली गई है।
एसीपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि कार नंबर व मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर दोनों आरोपियों को पिलखुवा से गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने वारदात कबूल कर ली है। दोनों शादीशुदा हैं। वारदात के बाद दोनों घर जाकर आराम से सो गए। कार भी बरामद कर ली गई है।
मां बोलीं-मिले सख्त सजा
पीड़िता की मां ने बताया कि उन्होंने बेटी को गोद लिया था। उन्होंने आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग की है।
पीड़िता की मां ने बताया कि उन्होंने बेटी को गोद लिया था। उन्होंने आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग की है।
चीखती रही बेटी...सोता रहा सिस्टम
सात घंटे, एक कार और मदद की आस में गुजरता हर पल। 27 जुलाई की रात दरिंदगी की शिकार हुई 10वीं की छात्रा को उम्मीद थी कि कहीं न कहीं पुलिस दिखेगी, कोई उसकी चीख सुन लेगा और कार रुकवा देगा। कार दो बार थाने के सामने से गुजरी भी, रास्ते में पुलिस चौकियां मिलीं और पुलिसकर्मी भी दिखे, लेकिन किसी ने उसकी बेबस चीखें नहीं सुनीं।
सात घंटे, एक कार और मदद की आस में गुजरता हर पल। 27 जुलाई की रात दरिंदगी की शिकार हुई 10वीं की छात्रा को उम्मीद थी कि कहीं न कहीं पुलिस दिखेगी, कोई उसकी चीख सुन लेगा और कार रुकवा देगा। कार दो बार थाने के सामने से गुजरी भी, रास्ते में पुलिस चौकियां मिलीं और पुलिसकर्मी भी दिखे, लेकिन किसी ने उसकी बेबस चीखें नहीं सुनीं।
चौंकाने वाली बात यह है कि दिन में चार पहिया वाहनों के शीशों से काली फिल्म उतरवाने वाली पुलिस रात में आरोपियों की कार के शीशे पर सन शेड लगा होने के बाद भी नहीं चेती।
इतना ही नहीं, पीड़िता के पुलिस की चौखट पर पहुंचने के बाद एफआईआर दर्ज होने में भी चार दिन लग गए। इस पूरी घटना ने कानून व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात में कार के शीशे पर सन शेड लगा होने के बाद भी पुलिस का नहीं चेतना और चौंकाने वाला है।
उस बोझिल रात को दुष्कर्म की शिकार हुई किशोरी जितनी बेबस थी, अपराधी उतने ही बेखौफ और व्यवस्था सुस्त। पीड़िता के मुताबिक, आरोपी पहली बार रात करीब आठ बजे और दूसरी बार करीब दो बजे उसे कार में लेकर मसूरी थाने के सामने से गुजरे। रास्ते में दो स्थानों पर पुलिस का वाहन खड़ा मिला।
मेडिकल स्टोर से खरीदीं कुछ दवाएं
पिलखुवा की ओर जाते समय सड़क किनारे चीता बाइक पर पुलिसकर्मी भी दिखाई दिए। इस दौरान वह लगातार रोती-गिड़गिड़ाती रही, लेकिन उसकी आवाज किसी तक नहीं पहुंच सकी। रास्ते में आरोपियों ने एक मेडिकल स्टोर पर कार रोकी और कुछ दवाएं खरीदीं।
पिलखुवा की ओर जाते समय सड़क किनारे चीता बाइक पर पुलिसकर्मी भी दिखाई दिए। इस दौरान वह लगातार रोती-गिड़गिड़ाती रही, लेकिन उसकी आवाज किसी तक नहीं पहुंच सकी। रास्ते में आरोपियों ने एक मेडिकल स्टोर पर कार रोकी और कुछ दवाएं खरीदीं।
इस दौरान किशोरी ने कार से निकलने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने उसे काबू कर लिया। इसके बाद वे उसे एक सुनसान रास्ते पर बने फार्म हाउस में ले गए। वहां तैनात गार्ड ने गेट खोला। कुछ देर अंदर रहने के बाद आरोपी फिर उसे लेकर निकल गए। पीड़िता का कहना है कि अगर कहीं भी किसी ने सतर्कता दिखाई होती तो शायद उसकी पीड़ा इतनी लंबी न होती।
फार्म हाउस का राज भी जांच के घेरे में
पीड़ित मां का कहना है कि पुलिस को फार्म हाउस के गार्ड और मालिक से भी पूछताछ करनी चाहिए। उनका कहना है कि गार्ड ने गेट खोला था, इसलिए उसकी भूमिका की भी जांच जरूरी है। यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि आरोपी वहां किस मकसद से गए थे। हालांकि, सदमे में होने के कारण किशोरी फार्म हाउस की सही लोकेशन नहीं बता पा रही है।
पीड़ित मां का कहना है कि पुलिस को फार्म हाउस के गार्ड और मालिक से भी पूछताछ करनी चाहिए। उनका कहना है कि गार्ड ने गेट खोला था, इसलिए उसकी भूमिका की भी जांच जरूरी है। यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि आरोपी वहां किस मकसद से गए थे। हालांकि, सदमे में होने के कारण किशोरी फार्म हाउस की सही लोकेशन नहीं बता पा रही है।
चार दिन तक एफआईआर नहीं, मेडिकल में भी देरी
पीड़िता की मां का आरोप है कि उन्होंने 28 जुलाई की दोपहर मसूरी थाने में शिकायत दी थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय कई सवाल पूछकर उन्हें टाल दिया। उनका कहना है कि एक अगस्त को यानी चार दिन बाद तब एफआईआर दर्ज की गई, जब उन्होंने पुलिस आयुक्त से शिकायत करने की बात कही।
पीड़िता की मां का आरोप है कि उन्होंने 28 जुलाई की दोपहर मसूरी थाने में शिकायत दी थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय कई सवाल पूछकर उन्हें टाल दिया। उनका कहना है कि एक अगस्त को यानी चार दिन बाद तब एफआईआर दर्ज की गई, जब उन्होंने पुलिस आयुक्त से शिकायत करने की बात कही।
आरोप है कि पीड़िता का मेडिकल भी समय पर नहीं कराया गया और आरोपियों की पहचान बताने के बावजूद गिरफ्तारी में देरी हुई।
हालांकि, एसीपी सुनील कुमार सिंह का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी थी। शुरुआती जांच में कुछ विरोधाभासी तथ्य सामने आए थे, इसलिए सत्यापन के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई।
उठ रहे सवाल
- रात में कार के शीशे पर सन शेड लगा देखकर भी पुलिस को अंदेशा क्यों नहीं हुआ।
- जब कार दो बार थाने के सामने से गुजरी तो वह पुलिस की नजर से कैसे बची?
- हाईवे और सर्विस रोड पर गश्त के दावों के बावजूद किसी ने कार को क्यों नहीं रोका?
- मेडिकल स्टोर और फार्म हाउस तक पहुंचने के दौरान किसी को शक क्यों नहीं हुआ?
- शिकायत मिलने के बाद एफआईआर दर्ज करने और मेडिकल कराने में चार दिन की देरी क्यों हुई?
- फार्म हाउस और वहां मौजूद गार्ड की भूमिका की अब तक गहराई से जांच क्यों नहीं हुई?