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Ghaziabad News: 600 करोड़ के हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी के संयुक्त निदेशक ने दर्ज कराया बयान
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गाजियाबाद। करीब 600 करोड़ रुपये के कथित हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी के संयुक्त निदेशक शरद कुमार ने विशेष अदालत में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने अदालत को मामले से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के बारे में जानकारी दी। बयान दर्ज होने के बाद अदालत ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 19 अगस्त की तारीख तय की।
प्रवर्तन निदेशालय की विशेष अदालत के पीठासीन अधिकारी विनोद कुमार के समक्ष हुई सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े आरोपों को रखा। अभियोजन के अनुसार मेसर्स पीआर फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक परवेश कुमार गुजराल, गुरदीप कुमार गुजराल और सुभाष अरोड़ा पर अन्य सह आरोपियों के साथ मिलकर वर्ष 2007 से 2014 के बीच संगठित आपराधिक साजिश रचने का आरोप है। आरोप है कि फर्जी आयात दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बैंकों के माध्यम से विदेशी मुद्रा को अवैध रूप से विदेश भेजा गया।
हांगकांग की कंपनियों को भेजी रकम
अभियोजन के मुताबिक मामले में राकेश जैन, मेसर्स स्वर्ण ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स कामाख्या फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक भावना वाधवा समेत अन्य आरोपियों की भूमिका भी सामने आई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि फर्जी कंपनियां और जाली दस्तावेज तैयार कर कथित अग्रिम आयात के नाम पर करीब 600 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा हांगकांग स्थित फर्जी कंपनियों को भेजी गई।
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ईडी के अनुसार यह रकम अनुसूचित अपराधों से अर्जित अपराध की आय थी। आरोप है कि आरोपियों ने नकदी के बदले विदेशी मुद्रा का विनिमय कराने, अवैध धन को बैंकिंग प्रणाली के जरिये वैध दिखाने, विदेशी मुद्रा भेजने की सुविधा उपलब्ध कराने और अपराध की आय को वैध लेनदेन के रूप में प्रस्तुत करने का काम किया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिये अपराध से अर्जित रकम को छिपाने, उसका इस्तेमाल करने और उसे वैध संपत्ति के रूप में दर्शाने का प्रयास किया गया। मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष अदालत में सुनवाई चल रही है।
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प्रवर्तन निदेशालय की विशेष अदालत के पीठासीन अधिकारी विनोद कुमार के समक्ष हुई सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े आरोपों को रखा। अभियोजन के अनुसार मेसर्स पीआर फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक परवेश कुमार गुजराल, गुरदीप कुमार गुजराल और सुभाष अरोड़ा पर अन्य सह आरोपियों के साथ मिलकर वर्ष 2007 से 2014 के बीच संगठित आपराधिक साजिश रचने का आरोप है। आरोप है कि फर्जी आयात दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बैंकों के माध्यम से विदेशी मुद्रा को अवैध रूप से विदेश भेजा गया।
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हांगकांग की कंपनियों को भेजी रकम
अभियोजन के मुताबिक मामले में राकेश जैन, मेसर्स स्वर्ण ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स कामाख्या फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक भावना वाधवा समेत अन्य आरोपियों की भूमिका भी सामने आई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि फर्जी कंपनियां और जाली दस्तावेज तैयार कर कथित अग्रिम आयात के नाम पर करीब 600 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा हांगकांग स्थित फर्जी कंपनियों को भेजी गई।
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ईडी के अनुसार यह रकम अनुसूचित अपराधों से अर्जित अपराध की आय थी। आरोप है कि आरोपियों ने नकदी के बदले विदेशी मुद्रा का विनिमय कराने, अवैध धन को बैंकिंग प्रणाली के जरिये वैध दिखाने, विदेशी मुद्रा भेजने की सुविधा उपलब्ध कराने और अपराध की आय को वैध लेनदेन के रूप में प्रस्तुत करने का काम किया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिये अपराध से अर्जित रकम को छिपाने, उसका इस्तेमाल करने और उसे वैध संपत्ति के रूप में दर्शाने का प्रयास किया गया। मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष अदालत में सुनवाई चल रही है।