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Ghaziabad News: गैस की किल्लत से कपड़ा उद्योग पर संकट
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गाजियाबाद। व्यावसायिक सिलिंडर की किल्लत से कपड़ा उद्योग पर संकट गहराने लगा है। गैस न मिलने के कारण कपड़ों की रंगाई के काम पर असर पड़ने लगा है। उद्यमियों के अनुसार करीब 200 इकाइयां हैं, जो जींस, शूट समेत तमाम कपड़ों पर रंग चढ़ाने का कार्य करती हैं।
जिले में कपड़ा प्रमुख उद्योगों में से है। यहां कपड़ों की कटाई, बुनाई, छपाई और रंगाई तक का कई चरणों में कार्य होता है। उद्यमी सूर्यवली ने बताया कि कपड़ों की सिलाई के बाद इन पर डाइंग और रंगाई का कार्य किया जाता है, लेकिन सिलिंडर न मिलने के रंगाई और डाइंग में समस्या आ रही है। होली के बाद से अचानक से ही आपूर्ति बाधित हो गई है। इसकी वजह से ईद की तैयारियों और पुराने आर्डरों को पूरा कर पाना मुश्किल हो गया है। वहीं, उद्यमी राकेश चंदेल ने बताया कि महंगे दामों पर सिलिंडर मंगाना पड़ रहा है। इस वजह से रंगाई का कार्य भी महंगा पड़ रहा है। बताया कि दिल्ली के करोल बाग, सरोजनी नगर आदि स्थानों से जींसों की रंगाई का कार्य आता है। प्रतिदिन 15 से 20 हजार जींस की रंगाई और डाइंग का कार्य किया जाता था, लेकिन संसाधनों का अभाव और महंगाई की वजह से पुराने आर्डरों को पूरा करने में घाटा उठाना पड़ रहा है। कहा कि यूं मान लो कि जेब से ही इस बार सब देना पड़ रहा है।
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जिले में कपड़ा प्रमुख उद्योगों में से है। यहां कपड़ों की कटाई, बुनाई, छपाई और रंगाई तक का कई चरणों में कार्य होता है। उद्यमी सूर्यवली ने बताया कि कपड़ों की सिलाई के बाद इन पर डाइंग और रंगाई का कार्य किया जाता है, लेकिन सिलिंडर न मिलने के रंगाई और डाइंग में समस्या आ रही है। होली के बाद से अचानक से ही आपूर्ति बाधित हो गई है। इसकी वजह से ईद की तैयारियों और पुराने आर्डरों को पूरा कर पाना मुश्किल हो गया है। वहीं, उद्यमी राकेश चंदेल ने बताया कि महंगे दामों पर सिलिंडर मंगाना पड़ रहा है। इस वजह से रंगाई का कार्य भी महंगा पड़ रहा है। बताया कि दिल्ली के करोल बाग, सरोजनी नगर आदि स्थानों से जींसों की रंगाई का कार्य आता है। प्रतिदिन 15 से 20 हजार जींस की रंगाई और डाइंग का कार्य किया जाता था, लेकिन संसाधनों का अभाव और महंगाई की वजह से पुराने आर्डरों को पूरा करने में घाटा उठाना पड़ रहा है। कहा कि यूं मान लो कि जेब से ही इस बार सब देना पड़ रहा है।
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