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Ghaziabad News: जस्ट डायल पर फर्जी कंपनी बनाकर कई राज्यों में ठगी, चार आरोपी गिरफ्तार; एक सिम से खुला राज
Thu, 23 Jul 2026 08:23 AM IST
Rahul Kumar Tiwari
माई सिटी रिपोर्टर, नई दिल्ली
माई सिटी रिपोर्टर, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Thu, 23 Jul 2026 08:23 AM IST
सार
गाजियाबाद पुलिस ने जस्ट डायल पर फर्जी ट्रांसपोर्ट कंपनी बनाकर एडवांस राशि हड़पने वाले साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। चार आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला था और 64 बैंक खातों के जरिए एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की आशंका है।
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फर्जी कंपनी बनाकर कई राज्यों में ठगी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गाजियाबाद में एक सिम से शुरू हुई जांच ने देश के कई राज्यों में फैले साइबर ठगी के नेटवर्क का खुलासा कर दिया। मुरादनगर पुलिस और स्वाट टीम ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो जस्ट डायल पर फर्जी ट्रांसपोर्ट कंपनी की प्रोफाइल बनाकर लोगों को वाहन उपलब्ध कराने का झांसा देता था और एडवांस राशि लेकर मोबाइल फोन बंद कर देता था। पुलिस ने गिरोह से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके चार साथी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
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पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि ठगों का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के अलावा कर्नाटक, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ था। पुलिस को गिरोह से जुड़े 64 बैंक खातों की जानकारी मिली है। आशंका है कि आरोपियों ने करीब एक वर्ष में एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है। पुलिस अन्य राज्यों में हुई वारदातों की जानकारी जुटा रही है।
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डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि साइबर ठगी की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मुरादनगर पुलिस और स्वाट टीम को गिरोह की तलाश में लगाया गया था। सिम व बैंक खातों की जांच करते हुए टीम बदायूं में मोबाइल फोन की दुकान चलाने वाले दशमेश तक पहुंची और उससे पूछताछ में पूरे गिरोह का खुलासा हुआ।
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बुधवार को चार शातिर ठगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें हजरतपुर (बदायूं) निवासी दशमेश, अमृतनगर (फर्रुखाबाद) निवासी सौरभ सिंह व अभिषेक अवस्थी और मितौली (लखीमपुर खीरी) निवासी राकेश सिंह शामिल हैं। गिरोह में शामिल बदायूं निवासी विकास, अजय, सुरजीत और विजय फरार हैं। सभी आरोपी 12वीं पास हैं। इनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक कीपैड मोबाइल फोन और मोबाइल फोन खरीद के चार बिल बरामद हुए हैं।
कम कीमत में वाहन उपलब्ध कराने का देते थे झांसा
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी सौरभ फर्जी ट्रांसपोर्ट कंपनी तैयार करता था। उसने गुजरात और महाराष्ट्र के नाम से कंपनियां बनाई थीं और उन्हें जस्ट डायल पर सूचीबद्ध कराया था। सामान भेजने के लिए संपर्क करने वाले ग्राहकों को कम कीमत में वाहन उपलब्ध कराने का झांसा दिया जाता था। ग्राहक भरोसा कर लेते थे और बुकिंग के नाम पर 10 से 50 प्रतिशत तक एडवांस राशि ऑनलाइन जमा कर देते थे। रकम मिलते ही आरोपी मोबाइल फोन नंबर बंद कर देते थे।
ग्रामीणों की पहचान बनी ठगी का हथियार
जांच में सामने आया कि गिरोह फर्जी सिम और बैंक खातों के सहारे पूरा नेटवर्क चला रहा था। आरोपी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को कम कीमत में अधिक रिचार्ज और गिफ्ट का लालच देकर उनके नाम पर सिम निकलवाते थे। लोगों की आईडी का इस्तेमाल कर दो से तीन सिम जारी करा लिए जाते थे। इन्हीं नंबरों से ग्राहकों से संपर्क किया जाता था और ठगी की जाती थी। आरोपी दशमेश सिम उपलब्ध कराने का काम करता था। पुलिस के अनुसार, उसके पास नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) बैंकिंग सेवा की आईडी भी थी। इसी के जरिये वह ग्रामीणों को गुमराह कर बैंक खाते खुलवाता था। एक खाता खुलवाने के बदले उसे चार हजार रुपये मिलते थे।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी सौरभ फर्जी ट्रांसपोर्ट कंपनी तैयार करता था। उसने गुजरात और महाराष्ट्र के नाम से कंपनियां बनाई थीं और उन्हें जस्ट डायल पर सूचीबद्ध कराया था। सामान भेजने के लिए संपर्क करने वाले ग्राहकों को कम कीमत में वाहन उपलब्ध कराने का झांसा दिया जाता था। ग्राहक भरोसा कर लेते थे और बुकिंग के नाम पर 10 से 50 प्रतिशत तक एडवांस राशि ऑनलाइन जमा कर देते थे। रकम मिलते ही आरोपी मोबाइल फोन नंबर बंद कर देते थे।
ग्रामीणों की पहचान बनी ठगी का हथियार
जांच में सामने आया कि गिरोह फर्जी सिम और बैंक खातों के सहारे पूरा नेटवर्क चला रहा था। आरोपी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को कम कीमत में अधिक रिचार्ज और गिफ्ट का लालच देकर उनके नाम पर सिम निकलवाते थे। लोगों की आईडी का इस्तेमाल कर दो से तीन सिम जारी करा लिए जाते थे। इन्हीं नंबरों से ग्राहकों से संपर्क किया जाता था और ठगी की जाती थी। आरोपी दशमेश सिम उपलब्ध कराने का काम करता था। पुलिस के अनुसार, उसके पास नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) बैंकिंग सेवा की आईडी भी थी। इसी के जरिये वह ग्रामीणों को गुमराह कर बैंक खाते खुलवाता था। एक खाता खुलवाने के बदले उसे चार हजार रुपये मिलते थे।
ठगी की रकम आते ही निकाल लेते थे
पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम खाते में आते ही एटीएम से नकदी निकाल ली जाती थी। इससे पहले कि पीड़ित या पुलिस कोई कार्रवाई कर सके, मोबाइल फोन नंबर और खातों का इस्तेमाल बंद कर दिया जाता था।
लोकेशन ट्रेस न हो, इसलिए सड़क किनारे रहकर करते थे बात
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पीड़ितों से बातचीत करते समय सड़क किनारे या अलग-अलग स्थानों पर बैठते थे, ताकि उनकी लोकेशन ट्रेस न हो सके। कॉल के लिए सस्ते कीपैड मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया जाता था और काम पूरा होने के बाद उन्हें नष्ट कर दिया जाता था।
पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम खाते में आते ही एटीएम से नकदी निकाल ली जाती थी। इससे पहले कि पीड़ित या पुलिस कोई कार्रवाई कर सके, मोबाइल फोन नंबर और खातों का इस्तेमाल बंद कर दिया जाता था।
लोकेशन ट्रेस न हो, इसलिए सड़क किनारे रहकर करते थे बात
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पीड़ितों से बातचीत करते समय सड़क किनारे या अलग-अलग स्थानों पर बैठते थे, ताकि उनकी लोकेशन ट्रेस न हो सके। कॉल के लिए सस्ते कीपैड मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया जाता था और काम पूरा होने के बाद उन्हें नष्ट कर दिया जाता था।