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Ghaziabad News: लवली दीदी बोलीं...तकलीफ शरीर को होती है आत्मा को नहीं

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 17 Mar 2026 02:29 AM IST
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Lovely Didi said...the body feels pain, not the soul.
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साहिबाबाद। हरीश राणा के अंतिम सफर को पीड़ारहित बनाने का आशीष देने वाली ब्रह्माकुमारी बीके लवली दीदी का कहना है कि आत्मा और शरीर दोनों अलग-अलग बातें हैं। तकलीफ शरीर को होती है आत्मा को नहीं। शरीर गाड़ी है और आत्मा ड्राइवर। गाड़ी जब पुरानी होती है या काम नहीं करती तब कहा जाता है कि अब इसे छोड़ो और इससे बाहर आ जाओ।
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लवली दीदी ने यह बातें सोमवार को अमर उजाला से बातचीत में कहीं। वह एक दिन पहले हरीश को...सबको माफ करते, सबसे माफी मांगते हुए सो जाने का संदेश देकर चर्चा में हैं। उन्होंने बताया कि करीब 18 वर्षों से हरीश राणा का परिवार ब्रह्माकुमारीज से जुड़ा हुआ है। पांच वर्ष पहले यह परिवार दिल्ली से राजनगर एक्सटेंशन शिफ्ट हुआ था। इससे पहले वह करीब 13 वर्षों तक दिल्ली स्थित बीके केंद्र से जुड़ा रहा। हरीश के पिता कई बार ब्रह्माकुमारीज के प्रमुख केंद्र माउंट आबू भी जाते रहे हैं। हर रोज करीब एक घंटे तक बेटे की शांति और कुशलता के लिए मेडिटेशन करते थे। उनके अनुसार मैं समझ सकती हूं कि हरीश के माता-पिता ने बेटे के लिए इच्छामृत्यु मांगने निर्णय बहुत कठोर मन से लिया होगा।
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बेटे की पीड़ा देख मां ने मांगी थी मुक्ति
लवली दीदी ने बताया कि हरीश की मां निर्मला देवी 13 वर्षों तक अपने बेटे की पीड़ा देख दो साल पहले ही लड़ाई से हार गई थीं। रोज-रोज बेटे का दर्द देख पाना उनके बस में नहीं था। उसे पल-पल तड़पता देख उन्होंने पहली बार ब्रह्मकुमारी केंद्र में आकर उसकी मुक्ति के लिए इच्छामृत्यु का विचार रखा था। इस बारे में बात करते हुए उनकी आंखों से आंशू छलक रहे थे। उन्होंने कहा था कि ''...बस अब बहुत हो चुका...बेटे को इतने दुख में नहीं देख सकती। उसका शरीर अब बहुत पीड़ा में है और उसे मुक्ति दिला दीजिए।'' लवली दीदी ने कहा कि जब मां ने यह बात कही तो उन्होंने उन्हें ढांढस बंधाते हुए कहा कि शरीर को कष्ट हो सकता है, लेकिन आत्मा को नहीं। इसलिए उन्होंने हरीश के लिए जो सोचा है वह काफी बेहतर है। इसके बाद इच्छा मृत्यु के लिए विशेषज्ञों से बातचीत की और प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

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आर्किटेक्ट थीं 29 वर्ष से साधना कर रहीं दीदी



बीके लवली दीदी करीब 29 वर्षों से ब्रह्माकुमारीज से जुड़ी हैं। वह वर्तमान में प्रजापति ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के राजनगर एक्सटेंशन व मोहननगर केंद्र की प्रभारी हैं। उन्होंने बताया कि वह बचपन से ही माता-पिता के साथ ब्रह्माकुमारी केंद्रों पर आती रहीं। वहां पर एक अलग तरह की शांति का अहसास उन्हें हुआ। पढ़ाई-लिखाई कर इंजीनियर बनीं और आर्किटेक्ट के ताैर पर नौकरी भी की। 21 वर्ष की आयु में उन्हें ब्रह्माकुमारी केंद्रों में अलग-अलग स्थानों पर बतौर आर्किटेक्ट सेवा का मौका मिला। बाद में उन्होंने संस्था से पूरी तरह जुड़ जाने का फैसला लिया। पिता से जब इसकी अनुमति मांगी तो उन्होंने भी बिना देर किए रजामंदी दे दी। तभी से वह ब्रह्माकुमारीज से जुड़कर आध्यात्म का जीवन बिता रही हैं। उनकी दो बहनें भी ब्रह्माकुमारीज से जुड़ी हैं।





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आज से हरीश को पानी भी बंद होगा, डाॅक्टरों की नब्ज और धड़कन पर नजर



अमर उजाला ब्यूरो



नई दिल्ली। एम्स में हरीश राणा को मंगलवार से पानी भी देना बंद कर दिया जाएगा। इस तरह वे धीरे-धीरे इस दुनिया से अलविदा कहेंगे। सोमवार को मेडिकल कमेटी की बैठक हुई। जिसमें निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। हरीश को कोई ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया जा रहा है। अब तक सिर्फ ट्यूब के जरिए पोषण और हाइड्रेशन दिया जा रहा था, जिसे अब बंद कर दिया गया है। मंगलवार को पानी बंद करने के बाद ट्यूब पर कैप लगा दिया जाएगा, लेकिन उसे शरीर से निकाला नहीं जाएगा।



एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम हरीश की हर धड़कन, हर नब्ज पर मॉनिटर के जरिये नजर रख रही है। चरणबद्ध तरीके से जीवन रक्षक उपकरण हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। हालांकि इसको लेकर अस्पताल प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है और कोई औपचारिक बयान भी जारी नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि डॉक्टरों की 5 से 9 सदस्यों वाली मल्टीडिसिप्लिनरी टीम हर कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार करेगी। एम्स के शांत गलियारों में इस समय एक कठिन और भावनात्मक निर्णय की प्रक्रिया चल रही है, जहां चिकित्सा विज्ञान, कानून और मानवीय संवेदना तीनों एक साथ खड़े नजर आते हैं।
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