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LPG संकट से बदला रसोई का ट्रेंड: 10 वर्षों में नहीं बिके उतने इंडक्शन चूल्हे, जितने मार्च में लोगों ने खरीदे

धीरेंद्र मिश्र, अमर उजाला, गाजियाबाद Published by: Akash Dubey Updated Wed, 22 Apr 2026 07:05 AM IST
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सार

एलपीजी किल्लत से इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में भारी उछाल आया है। मार्च में गाजियाबाद, नोएडा, हापुड़ में एक लाख से अधिक चूल्हे बिके हैं, जिससे बिजली की खपत भी बढ़ी है।

LPG Crisis More induction stoves were sold in March than in 10 years.
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

एलपीजी की किल्लत ने रसोई के पारंपरिक ढांचे को झटका देते हुए उपभोक्ताओं को अन्य विकल्पों की ओर मोड़ दिया है। इसका सबसे बड़ा असर इंडक्शन चूल्हों की बिक्री पर दिख रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप गर्ग का दावा है कि जितने इंडक्शन चूल्हे पिछले 10 वर्षों में नहीं बिके, उतने अकेले मार्च महीने में बिक गए।

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इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप गर्ग के मुताबिक, गाजियाबाद, नोएडा और हापुड़ में मार्च के दौरान करीब एक लाख इंडक्शन चूल्हों की बिक्री हुई। गाजियाबाद और नोएडा में लगभग 40-40 हजार, जबकि हापुड़ में करीब 20 हजार चूल्हे बिके। वहीं, एक से 15 अप्रैल के बीच भी 25 हजार से ज्यादा चूल्हे बिक चुके हैं। गैस संकट से पहले तक हर माह 600 से 700 इंडक्शन की ही बिक्री हो रही थी।
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एलपीजी सिलिंडर की अनियमित आपूर्ति और समय पर डिलीवरी न मिलने से उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर निम्न और मध्यम वर्गीय परिवारों के साथ-साथ किरायेदारों पर इसका ज्यादा असर पड़ा है। ऐसे में इंडक्शन चूल्हा एक आसान और तत्काल विकल्प बनकर उभरा है। छात्र और नौकरीपेशा लोग भी इसकी सुविधा को देखते हुए इसे तेजी से अपना रहे हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में अचानक आई इस मांग ने कारोबार को भी नई गति दी है। दुकानदार विनोद गुप्ता बताते हैं कि पहले जहां इंडक्शन की बिक्री सीमित थी, अब रोजाना बड़ी संख्या में ग्राहक इन्हें खरीदने पहुंच रहे हैं। कारोबारियों का मानना है कि अगर एलपीजी की स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो इंडक्शन चूल्हों का बाजार और तेजी से बढ़ सकता है।

1200 से 2000 वाट तक के मॉडल, कीमत 1400 से 5000 रुपये
बाजार में 1200 वाट से लेकर 2000 वाट तक के इंडक्शन कुकटॉप उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 1400 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक है। इलेक्ट्रॉनिक्स विशेषज्ञ विकास आहूजा के अनुसार, यदि रोजाना दो घंटे इंडक्शन का उपयोग किया जाए तो करीब दो यूनिट बिजली की खपत होती है।

बिजली पर बढ़ा लोड: 60 लाख यूनिट की अतिरिक्त खपत
ऊर्जा निगम के अधीक्षण अभियंता एके सिंह के मुताबिक, तीनों जिलों में एक लाख इंडक्शन चूल्हों के इस्तेमाल से करीब 60 लाख यूनिट बिजली की खपत हो रही है। यह लगभग पांच एमवीए मासिक लोड के बराबर है।

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