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Ghaziabad News: एमएमजी अस्पताल...आया कर रही ईसीजी, दर्जी बांट रहा दवाई
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गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल में मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्टाफ की कमी और प्रबंधन की लापरवाही के चलते कर्मचारियों से उनके मूल कार्यों के बजाय अन्य जिम्मेदारियां ली जा रही हैं। इससे अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अस्पताल में हालात ऐसे हैं कि वार्ड आया मरीजों की ईसीजी जांच कर रही है। दर्जी के पद पर तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दवा वितरण काउंटर पर दवाइयां बांट रहा है। दवा वितरण और स्टोर से दवाएं लाने से इन्कार करने पर उक्त कर्मचारी की शिकायत सीएमएस से की गई है।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, कक्ष संख्या 30 में सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक वार्ड आया ईसीजी जांच कर रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है।
वहीं, दवा वितरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए प्रशिक्षित फार्मासिस्ट की आवश्यकता होती है, लेकिन एमएमजी अस्पताल में यह जिम्मेदारी दर्जी के पद पर तैनात कर्मचारी को सौंपी गई है। इतना ही नहीं दर्जी के मूल कार्य के लिए एक संविदा महिला कर्मचारी को लगाया गया है।
यह मामला उजागर होने के बाद जांच के दौरान संबंधित कर्मचारी ने बयान दिया है कि वह पिछले दो वर्षों से अपने मूल पद के बजाय अन्य कार्य कर रहा है। अब वह अपने निर्धारित कार्य पर वापस लौटना चाहता है।
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प्रबंधन पर उठे सवाल, जांच समिति गठित
मामला उजागर होने के बाद अस्पताल में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने डॉ. एके दीक्षित और डॉ. पंकज शर्मा की संयुक्त जांच समिति गठित की है। समिति पूरे प्रकरण की जांच कर रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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अस्पताल में हालात ऐसे हैं कि वार्ड आया मरीजों की ईसीजी जांच कर रही है। दर्जी के पद पर तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दवा वितरण काउंटर पर दवाइयां बांट रहा है। दवा वितरण और स्टोर से दवाएं लाने से इन्कार करने पर उक्त कर्मचारी की शिकायत सीएमएस से की गई है।
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अस्पताल सूत्रों के अनुसार, कक्ष संख्या 30 में सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक वार्ड आया ईसीजी जांच कर रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है।
वहीं, दवा वितरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए प्रशिक्षित फार्मासिस्ट की आवश्यकता होती है, लेकिन एमएमजी अस्पताल में यह जिम्मेदारी दर्जी के पद पर तैनात कर्मचारी को सौंपी गई है। इतना ही नहीं दर्जी के मूल कार्य के लिए एक संविदा महिला कर्मचारी को लगाया गया है।
यह मामला उजागर होने के बाद जांच के दौरान संबंधित कर्मचारी ने बयान दिया है कि वह पिछले दो वर्षों से अपने मूल पद के बजाय अन्य कार्य कर रहा है। अब वह अपने निर्धारित कार्य पर वापस लौटना चाहता है।
प्रबंधन पर उठे सवाल, जांच समिति गठित
मामला उजागर होने के बाद अस्पताल में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने डॉ. एके दीक्षित और डॉ. पंकज शर्मा की संयुक्त जांच समिति गठित की है। समिति पूरे प्रकरण की जांच कर रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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