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Ghaziabad News: डिजिटल अरेस्ट कर सेवानिवृत्त वृद्ध से 30 लाख रुपये ठगे
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गाजियाबाद। साइबर ठगों ने विजयनगर के सिद्धार्थ नगर में रहने वाले सरकारी विभाग से सेवानिवृत्त राघवन कृष्णन (64) को कस्टम विभाग का अधिकारी बनकर कॉल की। धमकी दी कि उनके आधार कार्ड से थाईलैंड एक पार्सल भेजा गया है। मुंबई अपराध शाखा, सीबाईआई और ईडी के अधिकारी बताकर दो दिनों तक डिजीटल अरेस्ट रखे गए। ठगों से भयभीत पीड़ित ने आरोपियों के बताए बैंक खाते में 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
एडीसीपी अपराध पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि सिद्धार्थ विहार में रहने वाले राघवन कृष्णन के मुताबिक वह सरकारी विभाग से सेवानिवृत्त हैं। राघवन कृष्णन के मुताबिक 10 मार्च को उनके मोबाइल फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को ब्लू डॉर्ट कूरियर सेवा से बताया। कॉलर ने बताया कि मुंबई कस्टम विभाग ने उनका पार्सल जब्त कर दिया है। बताया कि पार्सल में 40 ग्राम प्रतिबंधित दवाएं, कुछ पासपोर्ट और संदिग्ध एटीएम कार्ड हैं। पार्सल उनके नाम से थाईलैंड के बैंकॉक के पते पर पहुंचाया जा रहा था। पीड़ित ने अपना पार्सल होने से इन्कार किया तो कॉलर ने पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट लाने को कहा। साथ ही दूसरे व्यक्ति को फोन दे दिया। दूसरे कॉलर ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच से विजय चड्ढा होना बताया। विजय चड्ढा ने बताया कि वह मनी लॉड्रिंग और ड्रग तस्करी में शामिल हैं। केस अपराध शाखा अंधेरी पूर्व मुंबई, सीबीआई और ईडी को ट्रांसफर कर दिया है। धमकी दी कि जांच में सहयोग न करने पर गिरफ्तार कर लिए जाएंगे। ठगों के तीसरे साथी ने खुद को क्राइम ब्रांच मुंबई से डीसीपी राजपूत बताया। उन्होंने धमकी दी कि वह वीडियो कॉल रिसीव करे, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती वह डिजिटल अरेस्ट रहेंगे। आरोपियों ने उन्हें सीबीआई के फर्जी लेटरपैड पर समझौता भी भेजा। वह लगातार वीडियो कॉल पर रहे जबकि पीड़ित ऑडियो कॉल पर उनके सवालों के जवाब देते रहे। ठगों ने मनी लॉड्रिंग से संबंधित पांच ट्रांजक्शन में 30 लाख रुपये का ट्रांजक्शन भेजा। पुष्टि करने के लिए 30 लाख रुपये उनके बताए बैंक खाते में ट्रांसफर करने को कहा गया। विरोध करने पर जेल भेजने की धमकी दी गई। दो दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रहने के बाद वह इतने भयभीत हुए कि उन्होंने घर के नजदीक आईसीआईसीआई शाखा से ठगों को आरटीजीएस और एनईएफटी के माध्यम से 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जिसके बाद पूर्व उत्तर में रहने वाले उनके बेटे की कॉल आई। जिसे पीड़ित राघवन कृष्णन घटना की बाबत जानकारी दी। 12 मार्च को उनका बेटा घर पहुंचा और साइबर पॉर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। एडीसीपी ने बताया पीड़ित की तहरीर साइबर ठगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है, जांच कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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एडीसीपी अपराध पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि सिद्धार्थ विहार में रहने वाले राघवन कृष्णन के मुताबिक वह सरकारी विभाग से सेवानिवृत्त हैं। राघवन कृष्णन के मुताबिक 10 मार्च को उनके मोबाइल फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को ब्लू डॉर्ट कूरियर सेवा से बताया। कॉलर ने बताया कि मुंबई कस्टम विभाग ने उनका पार्सल जब्त कर दिया है। बताया कि पार्सल में 40 ग्राम प्रतिबंधित दवाएं, कुछ पासपोर्ट और संदिग्ध एटीएम कार्ड हैं। पार्सल उनके नाम से थाईलैंड के बैंकॉक के पते पर पहुंचाया जा रहा था। पीड़ित ने अपना पार्सल होने से इन्कार किया तो कॉलर ने पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट लाने को कहा। साथ ही दूसरे व्यक्ति को फोन दे दिया। दूसरे कॉलर ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच से विजय चड्ढा होना बताया। विजय चड्ढा ने बताया कि वह मनी लॉड्रिंग और ड्रग तस्करी में शामिल हैं। केस अपराध शाखा अंधेरी पूर्व मुंबई, सीबीआई और ईडी को ट्रांसफर कर दिया है। धमकी दी कि जांच में सहयोग न करने पर गिरफ्तार कर लिए जाएंगे। ठगों के तीसरे साथी ने खुद को क्राइम ब्रांच मुंबई से डीसीपी राजपूत बताया। उन्होंने धमकी दी कि वह वीडियो कॉल रिसीव करे, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती वह डिजिटल अरेस्ट रहेंगे। आरोपियों ने उन्हें सीबीआई के फर्जी लेटरपैड पर समझौता भी भेजा। वह लगातार वीडियो कॉल पर रहे जबकि पीड़ित ऑडियो कॉल पर उनके सवालों के जवाब देते रहे। ठगों ने मनी लॉड्रिंग से संबंधित पांच ट्रांजक्शन में 30 लाख रुपये का ट्रांजक्शन भेजा। पुष्टि करने के लिए 30 लाख रुपये उनके बताए बैंक खाते में ट्रांसफर करने को कहा गया। विरोध करने पर जेल भेजने की धमकी दी गई। दो दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रहने के बाद वह इतने भयभीत हुए कि उन्होंने घर के नजदीक आईसीआईसीआई शाखा से ठगों को आरटीजीएस और एनईएफटी के माध्यम से 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जिसके बाद पूर्व उत्तर में रहने वाले उनके बेटे की कॉल आई। जिसे पीड़ित राघवन कृष्णन घटना की बाबत जानकारी दी। 12 मार्च को उनका बेटा घर पहुंचा और साइबर पॉर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। एडीसीपी ने बताया पीड़ित की तहरीर साइबर ठगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है, जांच कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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