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Ghaziabad News: पिंक बूथ में मौत के मामले में दो महिला पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, जांच जारी
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गाजियाबाद। मधुबन-बापूधाम थाना क्षेत्र की सेक्टर-23 स्थित पिंक बूथ के गेट पर हाथ पटकने से हुई फरियादी की मौत के मामले में एसीपी महिला अपराध ने पांच पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए हैं। साथ ही पिंक बूथ के नजदीक दुकानदार और सीसीटीवी से घटनास्थल पर मौजूद सात प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की है। जांच के दौरान पिंक बूथ पर तैनात दो महिला पुलिसकर्मियों, प्रभारी और सेक्टर-23 चौकी इंचार्ज की लापरवाही उजागर हुई है। प्रथम दृष्टया घटना स्थल की वायरल वीडियो और सीसीटीवी फुटेज का आंकलन कर डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने दो मुख्य आरक्षी दिव्या रानी और प्रशिक्षु महिला कांस्टेबल प्रिया को लाइन हाजिर कर दिया है।
12 जुलाई की दोपहर ऑटो चालक से विवाद के बाद नशे की हालत में पिंक बूथ पहुंचे राजकुमार ने कार्रवाई की मांग करते हुए परिसर में शोर मचाया। इस दौरान पिंक बूथ कार्यालय बंद था। राजकुमार ने दरवाजा खोलने का प्रयास किया लेकिन अंदर से बंद होने के कारण विफल रहा। कार्यालय में महिला मुख्य आरक्षी दिव्या रानी और प्रशिक्षु सिपाही प्रिया तैनात थीं।
चौकी इंचार्ज प्रीती सिंह ड्यूटी पर होने के बावजूद पिंक बूथ से नदारद थीं। करीब तीन मिनट तक राजकुमार हमलावरों से बचने की गुहार लगाता रहा। पिंक बूथ का दरवाजा न खुलने पर उन्होंने कांच में दोनों हाथ पटके। इस वजह से शीशा टूट गया और राजकुमार के दोनों हाथों में टूटे कांच धंस गए। इससे छूटी खून की फुहार देखकर महिला पुलिसकर्मी घबरा गईं और उन्होंने सेक्टर-23 चौकी इंचार्ज को कॉल कर सूचना देनी चाही। चार बार कॉल करने पर भी चौकी इंचार्ज संजीव कुमार ने कॉल रिसीव नहीं की।
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एसीपी महिला अपराध ने पिंक बूथ पर तैनात पांच पुलिसकर्मियों, प्रभारी और घटना से मिले सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सात प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए हैं। जांच अधिकारी के मुताबिक पुलिसकर्मियों ने मानवता को शर्मसार किया है और उनकी लापरवाही उजागर हुई है। घायल को उपचार देने के लिए एंबुलेंस या पुलिस सहायता के लिए भी कॉल किया जा सकता था, लेकिन पुलिसकर्मियों ने ऐसा नहीं किया। अधिक रक्तस्राव और उपचार में देरी होने से राजकुमार की मौत हुई है।
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पुरुष पुलिसकर्मी नदारद
आसपास के लोगों ने बताया कि पिंक बूथ पर एक पुरुष पुलिसकर्मी भी सादी वर्दी में मौजूद था। 12 और 13 जुलाई तक पिंक बूथ कार्यालय में बैठकर पुलिसकर्मी सरकारी दस्तावेजों का काम निपटा रहा था। ऐसी बात सामने निकलकर आई है। घटना सुर्खियों में आई तो पुलिसकर्मी पिंक बूथ से नदारद हो गया। एसीपी महिला अपराध ने बताया कि पुरुष पुलिसकर्मी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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12 जुलाई की दोपहर ऑटो चालक से विवाद के बाद नशे की हालत में पिंक बूथ पहुंचे राजकुमार ने कार्रवाई की मांग करते हुए परिसर में शोर मचाया। इस दौरान पिंक बूथ कार्यालय बंद था। राजकुमार ने दरवाजा खोलने का प्रयास किया लेकिन अंदर से बंद होने के कारण विफल रहा। कार्यालय में महिला मुख्य आरक्षी दिव्या रानी और प्रशिक्षु सिपाही प्रिया तैनात थीं।
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चौकी इंचार्ज प्रीती सिंह ड्यूटी पर होने के बावजूद पिंक बूथ से नदारद थीं। करीब तीन मिनट तक राजकुमार हमलावरों से बचने की गुहार लगाता रहा। पिंक बूथ का दरवाजा न खुलने पर उन्होंने कांच में दोनों हाथ पटके। इस वजह से शीशा टूट गया और राजकुमार के दोनों हाथों में टूटे कांच धंस गए। इससे छूटी खून की फुहार देखकर महिला पुलिसकर्मी घबरा गईं और उन्होंने सेक्टर-23 चौकी इंचार्ज को कॉल कर सूचना देनी चाही। चार बार कॉल करने पर भी चौकी इंचार्ज संजीव कुमार ने कॉल रिसीव नहीं की।
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एसीपी महिला अपराध ने पिंक बूथ पर तैनात पांच पुलिसकर्मियों, प्रभारी और घटना से मिले सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सात प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए हैं। जांच अधिकारी के मुताबिक पुलिसकर्मियों ने मानवता को शर्मसार किया है और उनकी लापरवाही उजागर हुई है। घायल को उपचार देने के लिए एंबुलेंस या पुलिस सहायता के लिए भी कॉल किया जा सकता था, लेकिन पुलिसकर्मियों ने ऐसा नहीं किया। अधिक रक्तस्राव और उपचार में देरी होने से राजकुमार की मौत हुई है।
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पुरुष पुलिसकर्मी नदारद
आसपास के लोगों ने बताया कि पिंक बूथ पर एक पुरुष पुलिसकर्मी भी सादी वर्दी में मौजूद था। 12 और 13 जुलाई तक पिंक बूथ कार्यालय में बैठकर पुलिसकर्मी सरकारी दस्तावेजों का काम निपटा रहा था। ऐसी बात सामने निकलकर आई है। घटना सुर्खियों में आई तो पुलिसकर्मी पिंक बूथ से नदारद हो गया। एसीपी महिला अपराध ने बताया कि पुरुष पुलिसकर्मी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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