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रेलवे में ग्रीन युग: 1200KW की ताकत, 82 करोड़ लागत, धुआं नहीं छोड़ती है भाप, जानिए हाइड्रोजन ट्रेन की खासियतें

Fri, 17 Jul 2026 09:05 AM IST
Akash Dubey संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Published by: Akash Dubey Updated Fri, 17 Jul 2026 09:05 AM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को जींद से पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यह जींद-सोनीपत रूट पर भारतीय रेलवे के ग्रीन युग की शुरुआत करेगी।

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Green Era in Railways Discover features of hydrogen trains
हाइड्रोजन ट्रेन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत रेलवे के इतिहास में शुक्रवार को प्रगति का नया अध्याय जुड़ जाएगा। जींद जंक्शन पर सुबह सवा ग्यारह बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को सोनीपत की ओर रवाना करेंगे और देशवासियों को पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन सौंपेंगे। जींद-सोनीपत रूट पर इसके परिचालन के साथ ही भारतीय रेलवे के ग्रीन युग की शुरुआत भी हो जाएगी। इस उपलब्धि के बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन विकसित की है।

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करीब 82 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन की क्षमता 1200 किलोवाट है। यह एक बार में लगभग 2600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है। ट्रेन को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि इसमें यात्रियों को आरामदायक सफर के साथ आधुनिक सुविधाएं भी मिलें। पिछले तीन माह से इस ट्रेन का विभिन्न रेल मार्गों पर सफल परीक्षण सफल रहने के बाद आज करोड़ो देशवासियों का इसे पटरी पर उतारने का सपना साकार होने वाला है।

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तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में किए गए ट्रायल के दौरान ट्रेन के प्रदर्शन, गति, सुरक्षा और ईंधन प्रणाली की व्यापक जांच की गई। सभी परीक्षण सफल रहने के बाद इसे नियमित संचालन के लिए तैयार किया गया है। शुभारंभ के लिए हाइड्रोजन ट्रेन को दुल्हन की तरह सजाया गया है। ट्रेन और हाइड्रोजन प्लांट के शुभारंभ को लेकर जींद रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई हैं और स्टेशन परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है।

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हानिकारक गैसें नहीं, सिर्फ भाप छोड़ेगी
इस ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें डीजल या अन्य ईंधन का उपयोग नहीं होगा। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से संचालित होने वाली यह ट्रेन संचालन के दौरान धुआं या हानिकारक गैसें नहीं छोड़ेगी। इसके संचालन के बाद केवल जल वाष्प और पानी का उत्सर्जन होगा, जिससे वायु प्रदूषण लगभग शून्य रहेगा। यह ट्रेन शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करती है और इसका एकमात्र उत्सर्जन जल वाष्प है। इंजन में डीजल की जगह फ्यूल सेल, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन डाली जाएगी। ऑक्सीजन की मदद से हाइड्रोजन नियंत्रित ढंग से जलेगी और इससे पैदा होने वाली बिजली लिथियम आयन बैटरी को चार्ज करेगी। ट्रेन से न सिर्फ प्रदूषण कम होगा बल्कि ईंधन खर्च में भी कमी आएगी।

प्लांट में पानी से तैयार हो रही गैस
जींद में करीब 125 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक हाइड्रोजन उत्पादन एवं री-फ्यूलिंग प्लांट भी स्थापित किया गया है। इसमें पानी से हाइड्रोजन गैस तैयार की जा रही है, जिसे ट्रेन में ईंधन के रूप में भरा जा रहा है। इससे ईंधन आपूर्ति की पूरी व्यवस्था पर्यावरण के अनुकूल बनेगी।

सुबह 10.30 बजे रवाना होगी ट्रेन
ट्रेन सुबह लगभग सवा 10.30 बजे जींद जंक्शन से रवाना होगी, जो जींद सिटी स्टेशन, पांडू-पिंडारा, ललितखेड़ा हाट, भंभेवा, ईसापुर खेड़ी हाट, बुटाना हाट, खंदराई हाट, गोहाना, राबरा हाट, लाठ हाट, मुहाना हरियाणा, बरवासनी हाट होते हुए सोनीपत दोपहर लगभग एक बजे पहुंचेगी। ट्रेन में अलग-अलग स्टेशनों से बच्चे सवार होंगे।

10 बजे पीएम मोदी पहुंचेंगे जींद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को सुबह 10.30 बजे प्रधानमंत्री हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी देकर रवाना करेंगे। वह 10 बजे जींद पहुंच जाएंगे। वहीं रेल मंत्री अश्विनी कुमार वैष्णव इससे पहले ही अपनी स्पेशल ट्रेन से जींद पहुंच जाएंगे। प्लेटफार्म नंबर एक के पास स्पेशल स्टेज बनाया गया है, जहां से प्रधानमंत्री हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी देकर रवाना करेंगे।

जानिए हाइड्रोजन ट्रेन के बारे में
- दुनिया की सबसे सस्ते किराये वाली यह हाइड्रोजन ट्रेन है। इसमें पांच रुपये में भी यात्रा कर सकेंगे। जींद से सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर का किराया 25 रुपये होगा।
- दुनिया में सबसे कम लागत 82 करोड़ में बनी हाइड्रोजन ट्रेन।

- दुनिया की सबसे लंबी 10-कोच वाली ट्रेन है। इसमें दो पावर कार (इंजन) और आठ यात्री कोच हैं। जो करीब 1200 केवी की क्षमता का शक्तिशाली इंजन, 120 किमी. प्रति घंटा की गति से दौड़ने में सक्षम। फिलहाल 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी।
-ट्रेन के कोच मेट्रो की तर्ज पर खुलेंगे और बंद होंगे। पूरी तरह दरवाजे बंद होने के बाद ही ट्रेन स्टेशन छोड़ेगी।

- हर कोच में बैठने के लिए 32 सीटें हैं
-सफर के दौरान पंखे और लाइट की व्यवस्था।

-हर कोच में डिस्प्ले लगा होने से आने वाले स्टेशन के बारे में पहले ही सूचना मिल जाएगी।
-सामान्य इलेक्ट्रिक ट्रेनों के विपरीत यह ट्रेन अपने फ्यूल सेल और बैटरी सिस्टम से स्वयं बिजली बनाएगी। यह प्रदूषण मुक्त है। धुआं नहीं, भाप छोड़ेगी।
-इस ट्रेन में हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, फ्लेम डिटेक्शन सिस्टम और गैस की निरंतर निगरानी जैसी उन्नत सुरक्षा तकनीकें शामिल हैं। आपात स्थिति में हाइड्रोजन की आपूर्ति अपने आप बंद हो जाएगी।

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