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Delhi NCR News: सड़क पुनर्विकास में हरियाली को प्राथमिकता, पेड़ काटना हुआ और कठिन
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एनसीआर में अब सड़कों के पुनर्विकास के दौरान पक्के फुटपाथ बनाने की बजाय हरियाली को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं, दिल्ली में पेड़ काटने की अनुमति पहले से अधिक सख्त बना दी गई है। यह जानकारी इंडिया इंटरनेशनल सेंटर एनेक्सी में आयोजित क्लीन एयर डायलॉग के तीसरे संस्करण में वरिष्ठ अधिकारियों ने दी। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और राहगीरी फाउंडेशन की संयुक्त पहल सीएक्यूएम रिसोर्स लैब द्वारा आयोजित संवाद में सरकारी एजेंसियों, शहरी योजनाकारों, पर्यावरण विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य विषय ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर रहा, जिसके तहत शहरों में जल निकायों, हरित क्षेत्रों, सड़कों और खुले स्थानों को एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया।
बैठक में कहा गया कि अब केवल पौधारोपण पर्याप्त नहीं है। तालाब, झील, जंगलों, पार्कों और सड़कों को जोड़कर ऐसी पारिस्थितिकी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जो वायु प्रदूषण कम करने के साथ-साथ गर्मी से राहत, जैव विविधता संरक्षण और नागरिकों के लिए सुरक्षित व सुगम सार्वजनिक स्थान उपलब्ध करा सके। सीएक्यूएम के सदस्य (तकनीकी) डॉ. एसडी अत्री ने कहा कि एनसीआर के सिटी एक्शन प्लान के तहत सड़क पुनर्विकास में पूरी सड़क को या तो हरित बनाया जाएगा या पक्का किया जाएगा, लेकिन प्राथमिकता हरियाली को दी जाएगी। उनका कहना था कि सड़कों के किनारे और खाली सरकारी भूमि पर मौजूद खुली मिट्टी धूल प्रदूषण का बड़ा स्रोत है, जिसे देशी पेड़ों, झाड़ियों और बहुस्तरीय हरियाली विकसित कर नियंत्रित किया जा सकता है। दिल्ली सरकार के पर्यावरण एवं शहरी विकास सचिव विजय कुमार बिधूड़ी ने कहा कि वायु प्रदूषण से निपटने का स्थायी समाधान सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में 13,000 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल की जा रही हैं और एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत अब तक 17 लाख पेड़ और झाड़ियां लगाई जा चुकी हैं।
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नई दिल्ली। एनसीआर में अब सड़कों के पुनर्विकास के दौरान पक्के फुटपाथ बनाने की बजाय हरियाली को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं, दिल्ली में पेड़ काटने की अनुमति पहले से अधिक सख्त बना दी गई है। यह जानकारी इंडिया इंटरनेशनल सेंटर एनेक्सी में आयोजित क्लीन एयर डायलॉग के तीसरे संस्करण में वरिष्ठ अधिकारियों ने दी। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और राहगीरी फाउंडेशन की संयुक्त पहल सीएक्यूएम रिसोर्स लैब द्वारा आयोजित संवाद में सरकारी एजेंसियों, शहरी योजनाकारों, पर्यावरण विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य विषय ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर रहा, जिसके तहत शहरों में जल निकायों, हरित क्षेत्रों, सड़कों और खुले स्थानों को एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया।
बैठक में कहा गया कि अब केवल पौधारोपण पर्याप्त नहीं है। तालाब, झील, जंगलों, पार्कों और सड़कों को जोड़कर ऐसी पारिस्थितिकी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जो वायु प्रदूषण कम करने के साथ-साथ गर्मी से राहत, जैव विविधता संरक्षण और नागरिकों के लिए सुरक्षित व सुगम सार्वजनिक स्थान उपलब्ध करा सके। सीएक्यूएम के सदस्य (तकनीकी) डॉ. एसडी अत्री ने कहा कि एनसीआर के सिटी एक्शन प्लान के तहत सड़क पुनर्विकास में पूरी सड़क को या तो हरित बनाया जाएगा या पक्का किया जाएगा, लेकिन प्राथमिकता हरियाली को दी जाएगी। उनका कहना था कि सड़कों के किनारे और खाली सरकारी भूमि पर मौजूद खुली मिट्टी धूल प्रदूषण का बड़ा स्रोत है, जिसे देशी पेड़ों, झाड़ियों और बहुस्तरीय हरियाली विकसित कर नियंत्रित किया जा सकता है। दिल्ली सरकार के पर्यावरण एवं शहरी विकास सचिव विजय कुमार बिधूड़ी ने कहा कि वायु प्रदूषण से निपटने का स्थायी समाधान सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में 13,000 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल की जा रही हैं और एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत अब तक 17 लाख पेड़ और झाड़ियां लगाई जा चुकी हैं।
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