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Gurugram News: 15 साल के इंतजार के बाद साफ हुई आगरा नहर
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आगरा नहर से बहता पानी। संवाद
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-जिले की डेढ़ लाख एकड़ भूमि को मिलेगा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल।
आगरा नहर की सफाई होने के बाद सोमवार देर रात पानी को छोड़ दिया गया। पानी छोड़े जाने से जिले के किसानों में खुशी का माहौल है। आगरा नहर से जिले के 52 रजवाहे और नहरे निकलती हैं, जिनसे करीब डेढ़ लाख एकड़ भूमि की सिंचाई होती है। नहर के चालू होने से किसानों ने राहत की सांस ली है।
आगरा नहर का पानी बंद किए जाने के कारण किसानों को सिंचाई में काफी समस्या हो रही थी। बीते 15 साल से सफाई नहीं होने के कारण नहर में कीचड़ और गाद जम गई थी, जिससे इसकी जल वहन क्षमता प्रभावित हो गई थी। जहां नहर की निर्धारित क्षमता 4000 क्यूसिक है, वहीं वर्तमान में केवल करीब 3200 क्यूसिक पानी ही बह पा रहा था। इस वजह से न तो पानी आगरा तक पूरी तरह पहुंच रहा था और न ही पलवल के किसानों को पर्याप्त मात्रा में सिंचाई का पानी मिल पा रहा था।
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उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने आगरा नहर की करीब 15 वर्षों बाद बड़े स्तर पर सफाई की है। जेसीबी और अर्थमूवर मशीनों की मदद से आगरा नहर की सफाई की गई है। सफाई का मुख्य उद्देश्य नहर की जलधारा को उसकी पूरी क्षमता तक बहाल करना और पानी को आगरा के अंतिम छोर (टेल) तक पहुंचाना है। अब सफाई कार्य के पूरा होने के बाद जिले के रजवाहों और नहरों में भरपूर पानी छोड़ा जाएगा, जिससे किसानों को समय पर सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा। इससे फसलों की पैदावार बढ़ने के साथ-साथ किसानों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा।
आगरा नहर दिल्ली के कालिंदी कुंज से निकलकर फरीदाबाद, पलवल, मथुरा होते हुए आगरा तक जाती है। यह नहर क्षेत्र की प्रमुख सिंचाई स्रोतों में से एक है। विभाग के इस कदम से लंबे समय से पानी की कमी से जूझ रहे किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि आगरा नहर का नियंत्रण उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के पास है, जबकि इससे निकलने वाली गुरुग्राम नहर हरियाणा सिंचाई विभाग के अधीन आती है। गुरुग्राम नहर के माध्यम से फरीदाबाद, गुरुग्राम के सोहना, पलवल के मंडकौला, नूंह, फिरोजपुर झिरका होते हुए राजस्थान के अलवर जिले तक खेतों की सिंचाई होती है।
गंदगी के कारण पानी का बहाव हो गया था कम
जिले से गुजरने वाली आगरा नहर की 2300 क्यूसेक पानी की क्षमता है। नहर की सफाई नहीं होने और गंदगी के कारण पानी का बहाव काफी कम हो गया था। आगर नहर से जिले को करीब 200 क्यूसेक पानी मिलता है। पानी की सप्लाई कम होने के कारण पलवल और मेवात क्षेत्र के कई खेत प्यासे रह जाते थे। आगरा कैनाल से जिले के खेतों की सिंचाई के लिए 11 नहरें निकलती है जिनमें से आगे जाकर करीब 52 नहरें, रजवाहे और माइनर निकलते हैं। इससे खेतों तक पानी पहुंचता है। पानी आपूर्ति घटने के कारण दोनों जिलों के खेत प्यासे रह जाते थे।
50 से अधिक गांव सिंचाई के लिए आगरा नहर पर है निर्भर
जनौली, किठवाड़ी, भिडूकी, खांबी, लिखी, करमन, सौन्हद, घासेडा, होडल, दुर्गापुर, रतीपुर, भंगूरी, छज्जूनगर, अलावलपुर, पहलादपुर, रसूलपुर, नंदावाला, अमरौली, कुराली, बघौला, मानपुर, बिछौर, हथीन, डाडका, सेलौटी, असावटा, गुदराना, सीहा, गौडोता, विजयगढ़, नांगल जाट, मांदकौल, कटेसरा, गोपीखेडा व रहराना सहित कई गांव है।
किसानों से बातचीत
नहर में पानी की आपूर्ति सोमवार रात से ही शुरू हुई है। बुवाई का मौसम चल रहा है। नहर के पानी से सिंचाई करना आसान होता है और लागत भी कम आती है।-
- कमल, किसान, छज्जूनगर
काफी समय से नहर में पानी बंद था। सफाई के बाद अब पानी फिर से छोड़ा गया है। इससे हम लोगों को काफी फायदा मिलेगा।-
- धर्मेंद्र, किसान, छज्जूनगर
क्या कहते है अधिकारी
आगरा नहर के पहले चरण की सफाई पूरी कर ली गई है। नहर में पानी फिर से छोड़ दिया गया है। दूसरे चरण की सफाई भी जल्द की जाएगी।
- नवीन कुमार, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश

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