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Gurugram News: करोडों योजनाओं के बाद भी गुरुग्राम में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक
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सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में गुरुग्राम 11वें और मानेसर 48वें स्थान पर
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। रिपोर्ट ने एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण के संकट को उजागर किया है। 2025 में गुरुग्राम प्रदूषण चार्ट में 11वें स्थान पर रहा। लोनी देश का सबसे प्रदूषित शहर बना, इसके बाद दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा का स्थान है। गुरुग्राम का वार्षिक औसत पीएम 2.5 स्तर 74.6 माइक्रोग्राम/घन मीटर रहा, जबकि नवंबर में यह पीक पर 153.6 माइक्रोग्राम/घन मीटर तक पहुंच गया था। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में पीएम 2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुझाए गए स्तर से 13 गुना अधिक है।
सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में गुरुग्राम में 11वें और मानेसर में 48वें स्थान पर रहे। पिछले वर्षों की तुलना में गुरुग्राम की रैंकिंग में सुधार या स्थिरता देखी गई है। हालांकि, शहर की हवा में सूक्ष्म कणों (पीएम 2.5) का स्तर अभी भी खतरनाक श्रेणी में है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने का खतरा बना हुआ है।
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ग्रेप चार लागू रहने के बाद भी खराब स्थिति
बढ़ते प्रदूषण के कारण अस्पतालों में श्वसन और हृदय रोगों के मामलों में इजाफा हुआ है। प्रशासन ने अधिक गंभीर स्थिति के दौरान स्कूल बंद किए, निर्माण कार्य रोके और डीजल जनरेटर पर प्रतिबंध लगाया। इसके बावजूद कोई खास सुधार नहीं देखा गया है। नगर निगम, जीएमडीए और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से करोड़ों रुपये की योजनाओं के बावजूद शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने में मुश्किलें बनी हुई है। प्रदूषण स्तर कम करने के लिए एंटी फॉग मशीन का इस्तेमाल किया गया, लेकिन जर्जर सड़कें और उड़ती धूल के कारण कई क्षेत्रों में सुधार नहीं दिखा।
कागजों में धूलमुक्त योजना
धूलमुक्त करने के बाद भी गुरुग्राम की हवा प्रदूषित बनी हुई है। नगर निगम हर साल करोड़ों खर्च करके सड़कों की सफाई और धूलमुक्त योजनाएं चलाता है लेकिन स्थिति गंभीर बनी हुई है। शहर की सड़कों धूलमुक्त योजना कागजी नजर आ रही हैं। जर्जर सड़कें और तेजी से बढ़ती वाहनों की संख्या प्रदूषण बढ़ा रही हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। रिपोर्ट ने एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण के संकट को उजागर किया है। 2025 में गुरुग्राम प्रदूषण चार्ट में 11वें स्थान पर रहा। लोनी देश का सबसे प्रदूषित शहर बना, इसके बाद दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा का स्थान है। गुरुग्राम का वार्षिक औसत पीएम 2.5 स्तर 74.6 माइक्रोग्राम/घन मीटर रहा, जबकि नवंबर में यह पीक पर 153.6 माइक्रोग्राम/घन मीटर तक पहुंच गया था। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में पीएम 2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुझाए गए स्तर से 13 गुना अधिक है।
सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में गुरुग्राम में 11वें और मानेसर में 48वें स्थान पर रहे। पिछले वर्षों की तुलना में गुरुग्राम की रैंकिंग में सुधार या स्थिरता देखी गई है। हालांकि, शहर की हवा में सूक्ष्म कणों (पीएम 2.5) का स्तर अभी भी खतरनाक श्रेणी में है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने का खतरा बना हुआ है।
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ग्रेप चार लागू रहने के बाद भी खराब स्थिति
बढ़ते प्रदूषण के कारण अस्पतालों में श्वसन और हृदय रोगों के मामलों में इजाफा हुआ है। प्रशासन ने अधिक गंभीर स्थिति के दौरान स्कूल बंद किए, निर्माण कार्य रोके और डीजल जनरेटर पर प्रतिबंध लगाया। इसके बावजूद कोई खास सुधार नहीं देखा गया है। नगर निगम, जीएमडीए और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से करोड़ों रुपये की योजनाओं के बावजूद शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने में मुश्किलें बनी हुई है। प्रदूषण स्तर कम करने के लिए एंटी फॉग मशीन का इस्तेमाल किया गया, लेकिन जर्जर सड़कें और उड़ती धूल के कारण कई क्षेत्रों में सुधार नहीं दिखा।
कागजों में धूलमुक्त योजना
धूलमुक्त करने के बाद भी गुरुग्राम की हवा प्रदूषित बनी हुई है। नगर निगम हर साल करोड़ों खर्च करके सड़कों की सफाई और धूलमुक्त योजनाएं चलाता है लेकिन स्थिति गंभीर बनी हुई है। शहर की सड़कों धूलमुक्त योजना कागजी नजर आ रही हैं। जर्जर सड़कें और तेजी से बढ़ती वाहनों की संख्या प्रदूषण बढ़ा रही हैं।