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Gurugram News: जीडब्ल्यूएस को पाइपलाइन में तब्दील करने में सबसे अधिक राशि देगा जीएमडीए
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सोनीपत से गुरुग्राम तक बनने वाली कैनाल के निर्माण में छह विभाग देंगे 1989 करोड़
para_count-0 नंबर गेम - 35 फीसदी राशि जीएमडीए देगा para_count-0
para_count-0 अमर उजाला ब्यूरो para_count-0
para_count-0 गुरुग्राम। गुरुग्राम वाटर सप्लाई चैनल (जीडब्ल्यूएस) को री मॉडलिंग कर पाइपलाइन में तब्दील का टेंडर जल्द जारी होने की उम्मीद है। जीडब्ल्यूएस के निर्माण में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण को करीब 702.99 करोड़ देना होगा। मुख्य सचिव ने जीएमडीए को पत्र लिखकर जीडब्ल्यूएस निर्माण के लिए इस वित्त वर्ष के लिए करीब 246 करोड़ का प्रावधान करने को कहा है। परियोजना के तहत जीएमडीए 213 क्यूसेक पानी के लिए 35.34 फीसदी देगा। para_count-0
para_count-1 सोनीपत के ककरोई से गुरुग्राम तक 69 किलोमीटर गुरुग्राम वाटर सप्लाई चैनल (गुरुग्राम कैनाल) साल 1990 में बना था। अब जर्जर हालत में है। ऐसे में नहर में पानी की सप्लाई कम करनी पड़ती है। बसई स्थित जल शोधन संयंत्र में गुरुग्राम कैनाल से पानी आता है। गर्मियों में संयंत्र में पानी की कमी हो जाती है और एनसीआर चैनल से लाना पड़ता है। पहले जीडब्ल्यूएस को 175 क्यूसेक पानी के लिए डिजाइन किया था। अब री मॉडलिंग कर 653.71 क्यूसेक तक करने की योजना है। सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता रविंद्र कुमार ने बताया कि जीडब्ल्यूएस को री-मॉडलिंग करने के लिए जल्द टेंडर जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ईपीसी मोड पर परियोजना पर काम होगा। पुराने ढांचे को बदलकर पानी की क्षमता बढ़ाया जाना है। इसके निर्माण पर करीब 1989.39 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है।
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para_count-1 सोनीपत के ककरोई से गुरुग्राम तक 69 किलोमीटर गुरुग्राम वाटर सप्लाई चैनल (गुरुग्राम कैनाल) साल 1990 में बना था। अब जर्जर हालत में है। ऐसे में नहर में पानी की सप्लाई कम करनी पड़ती है। बसई स्थित जल शोधन संयंत्र में गुरुग्राम कैनाल से पानी आता है। गर्मियों में संयंत्र में पानी की कमी हो जाती है और एनसीआर चैनल से लाना पड़ता है। पहले जीडब्ल्यूएस को 175 क्यूसेक पानी के लिए डिजाइन किया था। अब री मॉडलिंग कर 653.71 क्यूसेक तक करने की योजना है। सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता रविंद्र कुमार ने बताया कि जीडब्ल्यूएस को री-मॉडलिंग करने के लिए जल्द टेंडर जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ईपीसी मोड पर परियोजना पर काम होगा। पुराने ढांचे को बदलकर पानी की क्षमता बढ़ाया जाना है। इसके निर्माण पर करीब 1989.39 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है।
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