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Gurugram News: 70 स्कूलों की बाल वाटिकाओं में एक भी दाखिला नहीं, रिपोर्ट तलब
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- अब चलेगा विशेष नामांकन अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सरकारी स्कूलों में बच्चों के दाखिले बढ़ाने की कोशिशों के बीच जिले से चिंताजनक स्थिति सामने आई है। करीब 70 सरकारी स्कूल की बाल वाटिका में एक भी बच्चा दाखिला लेने नहीं पहुंचा। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित स्कूलों से रिपोर्ट मांगी गई है। बाल वाटिका को बच्चों की पढ़ाई की पहली और सबसे अहम कड़ी मानी जाती है।
बाल वाटिका में छोटे बच्चों के शारीरिक मानसिक और सामाजिक विकास की नींव रखी जाती है। ऐसे में इन कक्षाओं का खाली रहना शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों से साफ तौर पर पूछा है कि आखिर बच्चों के दाखिले क्यों नहीं हो रहे है। रिपोर्ट में यह भी बताना होगा कि क्या अभिभावक निजी स्कूल की ओर जा रहे हैं, क्या क्षेत्र में जागरूकता की कमी है या फिर स्कूलों में सुविधाओं की कोई दिक्कत है।
सुविधाओं की मांगी जानकारी
विभाग ने स्कूलों में जरूरी सुविधाओं जैसे- साफ पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई और मिड-डे मील की स्थिति की भी जानकारी मांगी है। अधिकारियों का मानना है कि इन सुविधाओं में कमी होन पर भी अभिभावक बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने से हिचकते हैं।
शिक्षा विभाग अब इन स्कूलों पर फोकस करेगा, जहां नामांकन पूरी तरह से शून्य है। ऐसे स्कूलों में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रो और स्थानीय लोगों की मदद से अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा, ताकि वे अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराए।
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गुरुग्राम। सरकारी स्कूलों में बच्चों के दाखिले बढ़ाने की कोशिशों के बीच जिले से चिंताजनक स्थिति सामने आई है। करीब 70 सरकारी स्कूल की बाल वाटिका में एक भी बच्चा दाखिला लेने नहीं पहुंचा। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित स्कूलों से रिपोर्ट मांगी गई है। बाल वाटिका को बच्चों की पढ़ाई की पहली और सबसे अहम कड़ी मानी जाती है।
बाल वाटिका में छोटे बच्चों के शारीरिक मानसिक और सामाजिक विकास की नींव रखी जाती है। ऐसे में इन कक्षाओं का खाली रहना शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों से साफ तौर पर पूछा है कि आखिर बच्चों के दाखिले क्यों नहीं हो रहे है। रिपोर्ट में यह भी बताना होगा कि क्या अभिभावक निजी स्कूल की ओर जा रहे हैं, क्या क्षेत्र में जागरूकता की कमी है या फिर स्कूलों में सुविधाओं की कोई दिक्कत है।
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सुविधाओं की मांगी जानकारी
विभाग ने स्कूलों में जरूरी सुविधाओं जैसे- साफ पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई और मिड-डे मील की स्थिति की भी जानकारी मांगी है। अधिकारियों का मानना है कि इन सुविधाओं में कमी होन पर भी अभिभावक बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने से हिचकते हैं।
शिक्षा विभाग अब इन स्कूलों पर फोकस करेगा, जहां नामांकन पूरी तरह से शून्य है। ऐसे स्कूलों में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रो और स्थानीय लोगों की मदद से अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा, ताकि वे अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराए।

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