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Bihar: विजय सिन्हा प्रकरण से भूमिहार नाराज! सम्राट मंत्रिमंडल में भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग का क्या होगा?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Aditya Anand Updated Wed, 29 Apr 2026 04:52 PM IST
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सार

Cabinet Expansion: बिहार में नई सरकार 15 अप्रैल को बनी थी। सम्राट चौधरी के अलावा भाजपा से किसी अन्य नेता ने उस दिन शपथ नहीं ली। अब सवाल उठ रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा? सीएम सम्राट की नई  टीम कैसी रहेगी? क्या चल रहा है भाजपा में? पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, पूर्व मंत्री दिलीप जायसवाल जैसे बड़े नेताओं का क्या होगा? आइये इन सब सवालों का जवाब जानते हैं? 

Bihar News: What will be the social engineering of BJP in Samrat Chaudhary cabinet? Vijay Sinha, BJP Team
पीएम मोदी के साथ सम्राट चरी - फोटो : Social Media
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विस्तार

बिहार में नई सरकार के गठन के बाद अब सबकी निगाहें संभावित कैबिनेट विस्तार पर टिकी हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनने वाले नए मंत्रिमंडल को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा के भीतर मंत्री पद के लिए पूर्व मंत्रियों, विधायकों और विधान पार्षदों  के बीच जोरदार लॉबिंग जारी है। हालांकि, 15 अप्रैल को नई सरकार बनने के बाद से अब तक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के काम करने के तौर तरीके और बयानों से स्पष्ट हो गया है कि वह एक नई टीम चाहते हैं। सम्राट चौधरी के करीबी इसे 'नई विकास टीम' का नाम दे रहे हैं। नई टीम में कई चेहरों का नाम फाइल हो चुका है। कुछ पर मंथन चल रहा है। 

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सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने रणनीतिक तौर पर कैबिनेट विस्तार को फिलहाल टालने का मन बनाया। इसकी बड़ी वजह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को माना जा रहा है, जिसमें भाजपा के कई विधायक और एमएलसी सक्रिय रूप से जुटे हैं। ऐसे में अगर अभी विस्तार होता है तो मंत्री पद से वंचित नेताओं की नाराजगी चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी बंगाल चुनाव के बाद ही मंत्रिमंडल गठन या विस्तार करने की योजना बना रही है।
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विजय सिन्हा को लेकर क्या चर्चा? 
पूर्व डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की कथित नाराजगी और भूमिहार समाज में उठ रहे असंतोष को देखते हुए पार्टी कोई बड़ा और चौंकाने वाला फैसला ले सकती है। हाल की घटनाओं पर नजर डालें तो ऐसा लग रहा है कि सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा के बीच सबकुछ ठीक नहीं है। भूमिहार समाज भी भाजपा पर अपने नेता की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं। पिछले दो दिनों में विजय सिन्हा के करीबी आईएएस अधिकारी सीके अनिल और गोपाल मीणा के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के तबादले ने काफी बातें स्पष्ट कर दी हैं। सोशल मीडिया पर विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी के बीच नोंकझोंक के पुराने वीडियो वायरल होने लगे। चर्चा होने लगी कि विजय सिन्हा अब किनारे कर दिए जाएंगे। तेजस्वी यादव ने भी विधानसभा में कहा कि विजय सिन्हा की नजर सम्राट चौधरी की पगड़ी पर है। हालांकि, आखिरी फैसला दिल्ली दरबार में बैठे आलाकमान को ही लेना है। अब वहीं से सारा कुछ तय होगा।  

संतुलन हर वर्ग को मौका देगी भाजपा
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की है। पार्टी सोशल इंजीनियरिंग के तहत सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश में है। संकेत यह मिल रहे हैं कि भाजपा नए चेहरों को मौका दे सकते हैं। विजय सिन्हा, मंगल पांडेय, रामकृपाल यादव, दिलीप जायसवाल जैसे पुराने दिग्गजों को दुबारा मौका मिल सकता है। युवा और महिलाओं पर सम्राट चौधरी का विशेष फोकस रहेगा। आलाकमान चाहते हैं कि सरकार में सोशल इंजीनियरिंग का खास ख्याल रखा जाए। हर वर्ग को मौका मिले ताकि संतुलन बरकरार रहे। सम्राट चौधरी की नई टीम में क्षेत्रीय और समाजिक समीकरण का समावेश दिख सकता है। 
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कई एमएलसी का कार्यकाल खत्म होने के करीब
राजनीतिक विश्लेषक आशुतोष कुमार बताते हैं कि भाजपा के कई एमएलसी का कार्यकाल अब सीमित समय के लिए ही बचा है, जिससे उनकी दावेदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं। अगर इन नेताओं को मंत्री बनाया जाता है तो कुछ ही महीनों बाद फिर से कैबिनेट में बदलाव करना पड़ेगा, जो सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है। भाजपा कोटे से मंत्री रहे प्रमोद कुमार और जनक राम का कार्यकाल सीमित बचा है। वहीं हरि सहनी और संतोष सिंह के पास भी करीब 11 महीने का ही कार्यकाल शेष है। ऐसे में पार्टी इन नामों पर दोबारा विचार कर सकती है। इसी बीच पूर्व मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल को लेकर भी सस्पेंस बना हुआ है। वह भी एमएलसी हैं और उनका कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं बचा है। उनके राजनीतिक कद को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि पार्टी उन्हें दोबारा मंत्री बना सकती है और आगे चलकर फिर से विधान परिषद भेजने की रणनीति अपना सकती है।

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