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Gurugram News: म्यांमार-कंबोडिया ले जाकर युवक को बनाया बंधक
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थाईलैंड में अस्पताल में नौकरी दिलाने का दिया झांसा, करंट से दी यातनाएं
नूंह साइबर थाना पुलिस मामला दर्ज कर जांच में जुटी
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। पुन्हाना खंड के एक गांव निवासी युवक को थाईलैंड के अस्पताल में नौकरी दिलाने का झांसा देकर म्यांमार और कंबोडिया ले जाकर बंधक बनाने, ठगी कराने और अमानवीय यातनाएं देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। साढ़े चार महीने बाद किसी तरह जान बचाकर भारत लौटे पीड़ित ने आपबीती बताई, जिसके आधार पर नूंह साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित जहांगीर ने बताया कि वह बंगलुरु में काम करता था। इसी दौरान उसकी पहचान दिलशाद नाम के युवक से हुई, जिसने टेलीग्राम के जरिए थाईलैंड के एक अस्पताल में लैब टेक्नीशियन की नौकरी का ऑफर दिया। 80 हजार से एक लाख रुपये तक सैलरी का लालच देकर उसे भरोसे में लिया गया। परिजनों से चर्चा के बाद मां ने रुपये जुटाए। जहांगीर ने एजेंट को एक लाख रुपये नकद और 30 हजार रुपये यूपीआई से दिए। इसके बाद उसे बैंकॉक का टिकट भेज दिया गया।
25 अगस्त 2025 को वह दिल्ली से बैंकॉक पहुंचा। वहां से उसे अलग-अलग गाड़ियों में बैठाकर थाईलैंड के ताक इलाके तक ले जाया गया। बाद में कच्चे रास्तों, पहाड़ी इलाकों और नदियों के रास्ते म्यांमार (बर्मा) पहुंचा दिया गया। इस दौरान करीब दस गाड़ियां बदली गईं। म्यांमार में उसे 27 अन्य युवकों के साथ केके पार्क नामक स्थान पर रखा गया, जहां कथित इंटरव्यू के नाम पर औपचारिकता पूरी कराई गई और एक एग्रीमेंट साइन कराया गया।
जहांगीर के अनुसार, एग्रीमेंट में 81 हजार रुपये मासिक वेतन, 12 से 16 घंटे काम और एक साल तक कंपनी न छोड़ने की शर्त थी। इसके बाद उसे कंप्यूटर और मोबाइल देकर ऑनलाइन निवेश से जुड़ी चैटिंग का काम सौंपा गया। जब उसने अस्पताल की नौकरी की बात कही और काम करने से मना किया तो उसे घर भेजने के बदले 4800 यूएसडीटी की मांग की गई। पैसे न देने पर उसे बंधक बनाकर रखा गया।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि 20-22 दिन बाद उसे बंद कमरे में लात-घूंसों से पीटा गया और बिजली के करंट लगाए गए। बाद में एक अन्य पार्क में शिफ्ट कर फिर से मारपीट की गई। इसी बीच भारत, चीन, म्यांमार और थाईलैंड के संयुक्त ऑपरेशन में रेस्क्यू टीम ने उसे मुक्त कराया। 14 नवंबर को रेस्क्यू के बाद उसका इलाज कराया गया और इमिग्रेशन सेंटर में रखा गया। 7 जनवरी 2025 को वह भारत लौट सका।
जहांगीर के पिता हनीफ ने बताया कि आरोपियों ने डेढ़ लाख रुपये से अधिक की ठगी की है। परिवार ने मानवाधिकार आयोग और पुलिस को शिकायत दी। नूंह साइबर थाना पुलिस ने आरोपी दिलशाद के खिलाफ ठगी, मानव तस्करी और साइबर अपराध की धाराओं में केस दर्ज किया है। पुन्हाना डीएसपी जितेंद्र कुमार राणा ने कहा कि मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी की जाएगी।
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नूंह साइबर थाना पुलिस मामला दर्ज कर जांच में जुटी
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। पुन्हाना खंड के एक गांव निवासी युवक को थाईलैंड के अस्पताल में नौकरी दिलाने का झांसा देकर म्यांमार और कंबोडिया ले जाकर बंधक बनाने, ठगी कराने और अमानवीय यातनाएं देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। साढ़े चार महीने बाद किसी तरह जान बचाकर भारत लौटे पीड़ित ने आपबीती बताई, जिसके आधार पर नूंह साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित जहांगीर ने बताया कि वह बंगलुरु में काम करता था। इसी दौरान उसकी पहचान दिलशाद नाम के युवक से हुई, जिसने टेलीग्राम के जरिए थाईलैंड के एक अस्पताल में लैब टेक्नीशियन की नौकरी का ऑफर दिया। 80 हजार से एक लाख रुपये तक सैलरी का लालच देकर उसे भरोसे में लिया गया। परिजनों से चर्चा के बाद मां ने रुपये जुटाए। जहांगीर ने एजेंट को एक लाख रुपये नकद और 30 हजार रुपये यूपीआई से दिए। इसके बाद उसे बैंकॉक का टिकट भेज दिया गया।
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25 अगस्त 2025 को वह दिल्ली से बैंकॉक पहुंचा। वहां से उसे अलग-अलग गाड़ियों में बैठाकर थाईलैंड के ताक इलाके तक ले जाया गया। बाद में कच्चे रास्तों, पहाड़ी इलाकों और नदियों के रास्ते म्यांमार (बर्मा) पहुंचा दिया गया। इस दौरान करीब दस गाड़ियां बदली गईं। म्यांमार में उसे 27 अन्य युवकों के साथ केके पार्क नामक स्थान पर रखा गया, जहां कथित इंटरव्यू के नाम पर औपचारिकता पूरी कराई गई और एक एग्रीमेंट साइन कराया गया।
जहांगीर के अनुसार, एग्रीमेंट में 81 हजार रुपये मासिक वेतन, 12 से 16 घंटे काम और एक साल तक कंपनी न छोड़ने की शर्त थी। इसके बाद उसे कंप्यूटर और मोबाइल देकर ऑनलाइन निवेश से जुड़ी चैटिंग का काम सौंपा गया। जब उसने अस्पताल की नौकरी की बात कही और काम करने से मना किया तो उसे घर भेजने के बदले 4800 यूएसडीटी की मांग की गई। पैसे न देने पर उसे बंधक बनाकर रखा गया।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि 20-22 दिन बाद उसे बंद कमरे में लात-घूंसों से पीटा गया और बिजली के करंट लगाए गए। बाद में एक अन्य पार्क में शिफ्ट कर फिर से मारपीट की गई। इसी बीच भारत, चीन, म्यांमार और थाईलैंड के संयुक्त ऑपरेशन में रेस्क्यू टीम ने उसे मुक्त कराया। 14 नवंबर को रेस्क्यू के बाद उसका इलाज कराया गया और इमिग्रेशन सेंटर में रखा गया। 7 जनवरी 2025 को वह भारत लौट सका।
जहांगीर के पिता हनीफ ने बताया कि आरोपियों ने डेढ़ लाख रुपये से अधिक की ठगी की है। परिवार ने मानवाधिकार आयोग और पुलिस को शिकायत दी। नूंह साइबर थाना पुलिस ने आरोपी दिलशाद के खिलाफ ठगी, मानव तस्करी और साइबर अपराध की धाराओं में केस दर्ज किया है। पुन्हाना डीएसपी जितेंद्र कुमार राणा ने कहा कि मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी की जाएगी।