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Gurugram News: सेक्टर-74ए के पास खाली प्लॉट बने डंपिंग ग्राउंड
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बढ़ता कूड़ा और बदबू बनी निवासियों के लिए मुसीबत
कुशाल रंगा
बादशाहपुर। सेक्टर-74ए के रिहायशी इलाकों में खाली पड़े प्लॉट अब लोगों के लिए जी का जंजाल बन गए हैं। इन खाली प्लॉटों में जमा कूड़े के ढेर न केवल वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर भी भारी पड़ रहे हैं। कूड़े से उठने वाली बदबू और मच्छरों के प्रकोप के कारण लोगों को परेशानी हो रही है।
स्थानीय निवासी अरुण तोमर का कहना है कि सुबह की सैर करना तो यहां नामुमकिन हो गया है। घर के दरवाजे खोलते ही कूड़े की बदबू आने लगती है। प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि सांस लेना मुश्किल है। अगर जल्द सफाई नहीं हुई, तो यहां रहना असंभव हो जाएगा।
बच्चों को बाहर खेलने भेजने में डर लगता है
खाली प्लॉट अब लावारिस पशुओं और मच्छरों का अड्डा बन गए हैं। बच्चों को बाहर खेलने भेजने में डर लगता है। डेंगू और मलेरिया का डर हर वक्त बना रहता है। - विमलेश
यह विडंबना है कि लाखों रुपये देकर यहां रह रहे हैं इसके बावजूद हमें स्वच्छ वातावरण भी नहीं मिल रहा। कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों के समय पर नहीं आने के कारण लोग यहां कूड़ा फेंककर चले जाते हैं। - देवेंद्र
बारिश के दिन में तो स्थिति और भी भयानक हो जाती है। कूड़ा सड़ने लगता है और सड़कों तक पानी के साथ बहकर आता है। - लालू कुमार
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कुशाल रंगा
बादशाहपुर। सेक्टर-74ए के रिहायशी इलाकों में खाली पड़े प्लॉट अब लोगों के लिए जी का जंजाल बन गए हैं। इन खाली प्लॉटों में जमा कूड़े के ढेर न केवल वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर भी भारी पड़ रहे हैं। कूड़े से उठने वाली बदबू और मच्छरों के प्रकोप के कारण लोगों को परेशानी हो रही है।
स्थानीय निवासी अरुण तोमर का कहना है कि सुबह की सैर करना तो यहां नामुमकिन हो गया है। घर के दरवाजे खोलते ही कूड़े की बदबू आने लगती है। प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि सांस लेना मुश्किल है। अगर जल्द सफाई नहीं हुई, तो यहां रहना असंभव हो जाएगा।
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बच्चों को बाहर खेलने भेजने में डर लगता है
खाली प्लॉट अब लावारिस पशुओं और मच्छरों का अड्डा बन गए हैं। बच्चों को बाहर खेलने भेजने में डर लगता है। डेंगू और मलेरिया का डर हर वक्त बना रहता है। - विमलेश
यह विडंबना है कि लाखों रुपये देकर यहां रह रहे हैं इसके बावजूद हमें स्वच्छ वातावरण भी नहीं मिल रहा। कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों के समय पर नहीं आने के कारण लोग यहां कूड़ा फेंककर चले जाते हैं। - देवेंद्र
बारिश के दिन में तो स्थिति और भी भयानक हो जाती है। कूड़ा सड़ने लगता है और सड़कों तक पानी के साथ बहकर आता है। - लालू कुमार