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Delhi NCR News: हाईकोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड को 23 साल बाद समय से पहले रिहा करने का दिया आदेश
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड हरप्रीत सिंह को समय से पहले रिहा करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हरप्रीत सिंह ने जेल में 23 वर्ष से अधिक समय बिताया है और इस दौरान उनका आचरण अच्छा रहा है।
हरप्रीत सिंह को 2003 में दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क में एक 17 वर्षीय दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार और लूट मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट ने सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (एसआरबी) के 2016 से 2024 तक के 12 फैसलों को खारिज कर दिया, जिनमें उनकी समय से पहले रिहाई की याचिकाओं को बार-बार ठुकराया गया था। अदालत ने इन फैसलों को मनमाना, तर्कहीन और रिकॉर्ड के विपरीत बताया। न्यायमूर्ति कृष्णा ने फ्रांज काफ्का की प्रसिद्ध रचना द मेटामॉर्फोसिस का हवाला देते हुए कहा कि राज्य ने कैदी को उसके अतीत के अपराध की छवि में कैद कर रखा है, जबकि वह अब एक सुधरे हुए व्यक्ति के रूप में सामने आया है। हरप्रीत सिंह ने जेल में वोकेशनल ट्रेनिंग पूरी की, कई प्रशस्तियां प्राप्त कीं, साफ-सुथरे पारोल पर बाहर गए और कभी कोई उल्लंघन नहीं किया। कोर्ट ने माना कि सजा का मुख्य उद्देश्य सुधार है, न कि अनंत प्रतिशोध। 2009 में दोषसिद्धि के बाद हरप्रीत सिंह और उनके साथी सतेंद्र सिंह को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। दिल्ली सरकार की 2004 की रिमिशन नीति के तहत निर्धारित अधिकतम अवधि से अधिक समय जेल में बिताने के बाद कोर्ट ने तत्काल रिहाई का आदेश दिया।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड हरप्रीत सिंह को समय से पहले रिहा करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हरप्रीत सिंह ने जेल में 23 वर्ष से अधिक समय बिताया है और इस दौरान उनका आचरण अच्छा रहा है।
हरप्रीत सिंह को 2003 में दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क में एक 17 वर्षीय दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार और लूट मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट ने सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (एसआरबी) के 2016 से 2024 तक के 12 फैसलों को खारिज कर दिया, जिनमें उनकी समय से पहले रिहाई की याचिकाओं को बार-बार ठुकराया गया था। अदालत ने इन फैसलों को मनमाना, तर्कहीन और रिकॉर्ड के विपरीत बताया। न्यायमूर्ति कृष्णा ने फ्रांज काफ्का की प्रसिद्ध रचना द मेटामॉर्फोसिस का हवाला देते हुए कहा कि राज्य ने कैदी को उसके अतीत के अपराध की छवि में कैद कर रखा है, जबकि वह अब एक सुधरे हुए व्यक्ति के रूप में सामने आया है। हरप्रीत सिंह ने जेल में वोकेशनल ट्रेनिंग पूरी की, कई प्रशस्तियां प्राप्त कीं, साफ-सुथरे पारोल पर बाहर गए और कभी कोई उल्लंघन नहीं किया। कोर्ट ने माना कि सजा का मुख्य उद्देश्य सुधार है, न कि अनंत प्रतिशोध। 2009 में दोषसिद्धि के बाद हरप्रीत सिंह और उनके साथी सतेंद्र सिंह को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। दिल्ली सरकार की 2004 की रिमिशन नीति के तहत निर्धारित अधिकतम अवधि से अधिक समय जेल में बिताने के बाद कोर्ट ने तत्काल रिहाई का आदेश दिया।
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