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Delhi NCR News: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर हाईकोर्ट सख्त
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कहा-शहर को अनावश्यक रूप से बंधक क्यों बनाया जाना चाहिए, अदालत ने केंद्र से पूछा सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के तौर पर इस्तेमाल किए जाने को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा कि शहर को अनावश्यक रूप से प्रदर्शनों के कारण बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए। अदालत ने दिल्ली पुलिस को अखिल भारतीय दलित ईसाई अधिकार संरक्षण समिति के 10 अगस्त को सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े आवेदन पर 8 अगस्त तक फैसला लेने का निर्देश दिया।
अदालत समिति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने का निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने कहा कि प्रदर्शन में अधिकतम 75 लोग शामिल होंगे और पुलिस जुलाई से लंबित आवेदन पर कोई निर्णय नहीं ले रही है।
इस पर न्यायमूर्ति महाजन ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से पूछा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के तौर पर बंद क्यों नहीं कर दिया जाता। उन्होंने कहा कि शहर के बीचोबीच इस तरह की गतिविधियां नहीं होनी चाहिए और शहर को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने माना कि इस संबंध में फैसला सरकार को लेना है।
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एएसजी चेतन शर्मा ने बताया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल घोषित किया जाए या नहीं, इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में पहले से सुनवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि इलाके में पाबंदी लागू है और स्वतंत्रता दिवस नजदीक होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। उन्होंने आशंका जताई कि 75 लोगों के प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने के बाद संख्या बढ़कर 75 हजार तक पहुंच सकती है।
याचिकाकर्ता ने शाहीन बाग मामले का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को मान्यता दे चुका है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकार अपनी जगह हैं, लेकिन शहर को बंधक नहीं बनाया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने पुलिस को आवेदन पर 8 अगस्त तक निर्णय लेने का निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के तौर पर इस्तेमाल किए जाने को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा कि शहर को अनावश्यक रूप से प्रदर्शनों के कारण बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए। अदालत ने दिल्ली पुलिस को अखिल भारतीय दलित ईसाई अधिकार संरक्षण समिति के 10 अगस्त को सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े आवेदन पर 8 अगस्त तक फैसला लेने का निर्देश दिया।
अदालत समिति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने का निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने कहा कि प्रदर्शन में अधिकतम 75 लोग शामिल होंगे और पुलिस जुलाई से लंबित आवेदन पर कोई निर्णय नहीं ले रही है।
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इस पर न्यायमूर्ति महाजन ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से पूछा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के तौर पर बंद क्यों नहीं कर दिया जाता। उन्होंने कहा कि शहर के बीचोबीच इस तरह की गतिविधियां नहीं होनी चाहिए और शहर को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने माना कि इस संबंध में फैसला सरकार को लेना है।
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एएसजी चेतन शर्मा ने बताया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल घोषित किया जाए या नहीं, इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में पहले से सुनवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि इलाके में पाबंदी लागू है और स्वतंत्रता दिवस नजदीक होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। उन्होंने आशंका जताई कि 75 लोगों के प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने के बाद संख्या बढ़कर 75 हजार तक पहुंच सकती है।
याचिकाकर्ता ने शाहीन बाग मामले का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को मान्यता दे चुका है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकार अपनी जगह हैं, लेकिन शहर को बंधक नहीं बनाया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने पुलिस को आवेदन पर 8 अगस्त तक निर्णय लेने का निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।