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Delhi NCR News: कोल ब्लॉक मामले में हिंडाल्को को बड़ी राहत, राउज एवेन्यू कोर्ट ने बंद किया केस
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कोर्ट ने कहा- आपराधिक इरादा या धोखाधड़ी के सबूत नहीं, पूर्व सीईओ समेत सभी आरोपी बरी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने कोयला आवंटन घोटाले से जुड़े एक मामले में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसके अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए पूरे मामले को बंद कर दिया है। विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) धीरज मोर ने 30 मई को दिए आदेश में कंपनी के पूर्व प्रेसिडेंट एवं सीईओ एसके तमोटिया और जनरल मैनेजर (कॉर्पोरेट अफेयर्स) पीआरएस मणि को भी सभी आरोपों से बरी कर दिया।
अदालत ने कहा कि सीबीआई आरोपियों के खिलाफ कोई अवैध कार्य या आपराधिक मंशा साबित नहीं कर सकी। फैसले में स्पष्ट किया गया कि आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी या आपराधिक षड्यंत्र का प्रथमदृष्टया कोई मामला नहीं बनता।
मामला ओडिशा के तलबीरा-1 कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था। सीबीआई का आरोप था कि हिंडाल्को ने आवंटन की शर्तों का उल्लंघन करते हुए ब्लॉक से निकाले गए कोयले का उपयोग अपने हीराकुंड स्थित 67.5 मेगावाट कैप्टिव पावर प्लांट में किया, जबकि यह कोयला केवल प्रस्तावित नई परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल होना था।
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हालांकि अदालत ने माना कि आवंटन पत्र में दर्ज यह शर्त 2003 में ओडिशा सरकार के साथ हुए माइनिंग लीज समझौते का हिस्सा नहीं थी। अदालत के अनुसार कानूनी रूप से माइनिंग लीज ही प्रभावी दस्तावेज है, न कि आवंटन पत्र। सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया था कि कंपनी ने निर्धारित मात्रा से 4.80 मिलियन टन अतिरिक्त कोयला निकाला और अनुचित लाभ कमाया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य इन आरोपों को साबित नहीं करते।
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने कोयला आवंटन घोटाले से जुड़े एक मामले में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसके अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए पूरे मामले को बंद कर दिया है। विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) धीरज मोर ने 30 मई को दिए आदेश में कंपनी के पूर्व प्रेसिडेंट एवं सीईओ एसके तमोटिया और जनरल मैनेजर (कॉर्पोरेट अफेयर्स) पीआरएस मणि को भी सभी आरोपों से बरी कर दिया।
अदालत ने कहा कि सीबीआई आरोपियों के खिलाफ कोई अवैध कार्य या आपराधिक मंशा साबित नहीं कर सकी। फैसले में स्पष्ट किया गया कि आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी या आपराधिक षड्यंत्र का प्रथमदृष्टया कोई मामला नहीं बनता।
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मामला ओडिशा के तलबीरा-1 कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था। सीबीआई का आरोप था कि हिंडाल्को ने आवंटन की शर्तों का उल्लंघन करते हुए ब्लॉक से निकाले गए कोयले का उपयोग अपने हीराकुंड स्थित 67.5 मेगावाट कैप्टिव पावर प्लांट में किया, जबकि यह कोयला केवल प्रस्तावित नई परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल होना था।
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