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विकल्प: पेट्रोल-डीजल से नहीं आईआईटी दिल्ली स्वदेशी ईंधन से दौड़ा रहा कार, सीबीजी से चल रही है गाड़ी
ललित कौशिक, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 23 Mar 2026 04:51 AM IST
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सार
आईआईटी दिल्ली हॉस्टल और घरों से निकलने वाले कचरे से बायोगैस तैयार कर कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) में तब्दील कर उससे गाड़ी का संचालन कर रहा है।
IIT Delhi
- फोटो : IIT Official
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विस्तार
इस्राइल-अमेरिका और ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच आईआईटी दिल्ली की ओर से गाड़ी में स्वदेशी ईंधन का उपयोग किया जा रहा है। यह भविष्य के ईंधन के उपयोग के नए रास्ते खोल सकता है। इससे दूसरे देशों पर पेट्रोल-डीजल और गैस की निर्भरता कम होगी। आईआईटी दिल्ली हॉस्टल और घरों से निकलने वाले कचरे से बायोगैस तैयार कर कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) में तब्दील कर उससे गाड़ी का संचालन कर रहा है।
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आईआईटी दिल्ली के ग्रामीण विकास एवं प्रौद्योगिकी केंद्र में प्रो. वीरेंद्र कुमार विजय ने बताया कि रोजाना 250 किलोग्राम कचरे से 25 क्यूबिक मीटर बायोगैस बनाई जा रही है। इस गैस को प्यूरीफाई करने पर आठ किलोग्राम सीबीजी बनती है। इसका इस्तेमाल गाड़ी से लेकर ट्रैक्टर और दोपहिया वाहन में किया जा रहा है। सीबीजी के इस्तेमाल के परीक्षण को लेकर वर्ष 2011 में आईआईटी दिल्ली को एक गाड़ी मिली थी। इसे अब तक डेढ़ लाख किलोमीटर तक चलाया जा चुका है। सीबीजी के इस्तेमाल से गाड़ी की माइलेज 21 किलोमीटर दर्ज की गई है। गाड़ी के अंदर एक सिलिंडर लगा है जिसमें 200 किलोग्राम प्रेशर से सीबीजी को भरा जाता है।
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प्रदूषण के लिहाज से फायदेमंद
प्रदूषण के लिहाज से भी सीबीजी काफी फायदेमंद है। गाड़ी से नाइट्रोजन ऑक्साइड और सीओ2 का उत्सर्जन स्तर दूसरे ईंधन की तुलना में कम हो रहा है। इसको लेकर सरकार से रिपोर्ट भी साझा की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि बायोगैस बनाने के लिए आईआईटी दिल्ली में पहले से प्लांट स्थापित है। इस प्लांट से बनने वाली गैस का इस्तेमाल पिछले तीन साल में शोध के लिए ट्रैक्टर और दोपहिया वाहन पर किया जा रहा है। इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे है। इसके अलावा बायोगैस का उपयोग चाय बनाने के अलावा बिजली उत्पादन के लिए भी लैब में किया जा रहा है।
पांच हजार सीबीजी प्लांट होने थे स्थापित
प्रो. वीरेंद्र ने बताया कि वर्ष 2018 की बायोफ्यूल पॉलिसी के अनुसार देशभर में पांच हजार से अधिक सीबीजी प्लांट स्थापित किए जाने थे। अभी तक 132 के करीब प्लांट ही स्थापित हो सके है। अगर प्लांट स्थापित करने की गति को रफ्तार मिले तो स्वदेशी ईंधन का बड़े स्तर पर उत्पादन देश में किया जा सकता है। इससे दूसरे देशों पर ईंधन की निर्भरता कम होगी।
प्राकृतिक गैस के समान गुणवत्ता वाला ईंधन
भारत के सात लाख से अधिक गांवों में कृषि अवशेष, गोबर, पशु अपशिष्ट, खाद्य अपशिष्ट और अन्य जैविक पदार्थ बड़ी मात्रा में उत्पन्न होते हैं। शहरों में बड़ी मात्रा में जैविक कचरा है। अगर इन संसाधनों को वैज्ञानिक ढंग से एकत्रित कर बायोगैस बनाने में परिवर्तित किया जाए तो यह स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत बन सकता है। बायोगैस को शुद्ध और उन्नत करके कंप्रेस्ड बायोगैस में परिवर्तित किया जा सकता है जो प्राकृतिक गैस के समान गुणवत्ता वाला ईंधन है।
51 लाख से अधिक बायोगैस संयंत्र स्थापित
उन्होंने कहा कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के जैव ऊर्जा कार्यक्रम के अनुसार देश भर मे 1.2 करोड़ घरेलू बायोगैस स्थापित करने की क्षमता है। साथ ही शहरों की विभिन्न आवासीय कॉलोनियों में रसोई अपशिष्ट एवं घरेलू जैव अपशिष्ट से बड़ी संख्या में घरेलू बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जा सकते हैं। देश में अब तक लगभग 51 लाख से अधिक घरेलू बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।