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Delhi: बस नेटवर्क मजबूत करने के लिए आईआईटी करेगा अध्ययन, फरवरी 2027 तक चलेगा सर्वे

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Mon, 30 Mar 2026 08:06 AM IST
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सार

परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अध्ययन का उद्देश्य बस सेवाओं की दक्षता और यात्रियों की सुविधाओं को बढ़ाना है। इसके तहत मौजूदा रूट, यात्री संख्या, ट्रैफिक पैटर्न और विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों का विश्लेषण किया जाएगा।

IIT to Conduct Study to Strengthen Bus Network
दिल्ली डीटीसी बस - फोटो : X/@dtchq_delhi
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विस्तार

दिल्ली सरकार ने राजधानी के बस नेटवर्क को मजबूत करने के लिए आईआईटी दिल्ली को एक साल का व्यापक अध्ययन सौंपा है। यह अध्ययन मार्च 2026 से शुरू होकर फरवरी 2027 तक चलेगा। इसकी रिपोर्ट के आधार पर बस रूटों के निर्धारण और सेवाओं की नई योजना तैयार की जाएगी।

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परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अध्ययन का उद्देश्य बस सेवाओं की दक्षता और यात्रियों की सुविधाओं को बढ़ाना है। इसके तहत मौजूदा रूट, यात्री संख्या, ट्रैफिक पैटर्न और विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों का विश्लेषण किया जाएगा। अध्ययन के दौरान फील्ड सर्वे, डाटा विश्लेषण और विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय किया जाएगा। 
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डीटीसी इस प्रक्रिया में डाटा उपलब्ध कराएगा और जमीनी स्तर पर सहयोग करेगा। अधिकारियों का कहना है कि अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर बस रूटों का पुनर्गठन किया जाएगा। कम उपयोग वाले रूटों में बदलाव और अधिक मांग वाले क्षेत्रों में सेवाओं का विस्तार होगा।

लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर जोर
अधिकारियों के अनुसार, 15 साल पुरानी लो-फ्लोर सीएनजी बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है। ऐसे में नई बसों की तैनाती और रूट निर्धारण के लिए एक व्यवस्थित योजना जरूरी हो गई है। अध्ययन का एक अहम पहलू बस सेवाओं को डीटीसी नेटवर्क के साथ बेहतर तरीके से जोड़ना है। रूट इस तरह तय किए जाएंगे कि यात्रियों को मेट्रो स्टेशनों तक पहुंचने में सुविधा हो और लास्ट माइल कनेक्टिविटी मजबूत हो सके।

बसें बढ़ीं, यात्री घटे
दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक, बसों की सवारी संख्या में पिछले पांच साल में करीब 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। 2019-20 में जहां रोजाना 51 लाख से अधिक यात्री बसों से सफर करते थे, वहीं 2024-25 में यह घटकर करीब 40.8 लाख रह गया। डीटीसी की सवारी 33.4 लाख से घटकर 25.6 लाख और क्लस्टर बसों की 17.7 लाख से घटकर 15.3 लाख रह गई। इसी अवधि में बसों की संख्या 6,672 से बढ़कर 6,966 हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बसों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। रूट कनेक्टिविटी, इंटरचेंज पॉइंट, समयबद्धता और यात्री सूचना प्रणाली की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।

पुराने वाहन हटे, लेकिन दबाव बरकरार
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर रोक के बाद 19 मार्च 2026 तक 66.2 लाख से अधिक पुराने वाहन डीरजिस्टर किए गए। इसके बावजूद कुल वाहनों की संख्या बढ़कर 87.6 लाख हो गई, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 7.9 फीसदी अधिक है। दोपहिया वाहन 68 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे अधिक हैं, जबकि कार-जीप करीब 24 फीसदी हैं। प्रति 1000 आबादी पर 522 वाहन होना निजी वाहनों पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है।

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