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West Asia Crisis: दिल्ली में अब इलाज पर भी भारी पड़ रहा है युद्ध का असर, गैस संकट से सूने होने लगे बाजार

सिमरन, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 30 Mar 2026 06:39 AM IST
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सार

तनाव के कारण प्लास्टिक, पीवीसी और रेजिन की लागत बढ़ने से स्वास्थ्य जगत में ब्लड बैग, आईवी ट्यूबिंग, डिस्पोजेबल चिकित्सा उपकरण और अस्पताल के बुनियादी ढांचे समेत कई वस्तुओं के दाम भी बढ़ गए हैं। तनाव अगर लंबा खींचता है, तो महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। इससे आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।
 

West Asia Crisis: The impact of war is now taking a toll on medical treatment in Delhi
ईरान में हमला - फोटो : PTI
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विस्तार

मध्य-पूर्व में बढ़ते ईरान-इस्राइल तनाव का असर मेडिकल लाइन पर भी पड़ने लगा है। इसके कारण प्लास्टिक, पीवीसी और रेजिन की लागत बढ़ने से स्वास्थ्य जगत में ब्लड बैग, आईवी ट्यूबिंग, डिस्पोजेबल चिकित्सा उपकरण और अस्पताल के बुनियादी ढांचे समेत कई वस्तुओं के दाम भी बढ़ गए हैं। तनाव अगर लंबा खींचता है, तो महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। इससे आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।

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दवाओं में इस्तेमाल होने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) के दाम बढ़ने से करीब 100 से ज्यादा दवाएं और प्लास्टिक और मेडिकल के डिस्पोजेबल उत्पाद महंगे होने जा रहे हैं। दवा के थोक कारोबारियों के अनुसार, दवाओं का स्टॉक मार्केट में उपलब्ध होने की वजह से दाम बढ़ने का असर तत्काल नहीं दिखेगा, लेकिन कंपनियों ने बता दिया है कि अगली बिलिंग नए और बढ़े दामों पर होगी।
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आरएमएल अस्पताल के पास मेडिकल शॉप चलाने वाले दुकानदार कुणाल ने बताया कि कंपनियों की तरफ से साफ संकेत मिल चुके हैं कि अगली सप्लाई महंगे रेट पर आएगी। खासकर जिन दवाओं में एपीआई और प्लास्टिक का इस्तेमाल ज्यादा होता है, उनके दाम बढ़ना तय है। 

क्या होता है एपीआई
एपीआई यानी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट जिसे बल्क ड्रग भी कहा जाता है, किसी भी दवा का मुख्य सक्रिय हिस्सा होता है, जो बीमारी के इलाज, रोकथाम या राहत के लिए सीधे जिम्मेदार होता है। यह हिस्सा दवा को बीमारियों या स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए प्रभावी बनाता है।

15 से 20 फीसदी तक दाम बढ़ गए
थोक दवा बाजार भागीरथ पैलेस की दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव आशीष ग्रोवर ने बताया कि देश में एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) की कमी के कारण इसके दाम बढ़ने लगे हैं। उन्होंने बताया कि करीब 100 से ज्यादा दवाओं की कीमतों पर इसका असर पड़ने की आशंका है। सिरिंज, ग्लव्स और पैकेजिंग सामग्री भी महंगे हो सकते हैं। 

गैस संकट से सूने होने लगे बाजार, पलायन

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच बढ़ते गैस संकट और कालाबाजारी से परेशान मजदूरों ने गांव का रुख करना शुरू कर दिया है। लक्ष्मी नगर, रघुवरपुरा और गांधी नगर मार्केट जैसे बड़े बाजारों से एक-एक करके मजदूर गांव लौटने लगे हैं। ऐसे में व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। परेशान व्यापारी मजदूरों को समझा रहे हैं कि यहां स्थिति जल्द सामान्य हो जाएंगी। दरअसल, मजदूरों के पलायन करने से सारे काम रुक जाएंगे।   

गांधीनगर के रघुवर पुरा शॉपकीपर एसोसिएशन के प्रधान पवन जिंदल ने बताया कि अगर गैस संकट के बीच सारे मजदूर अपने गांव चले जाएंगे, तो व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। कारोबार में नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका असर उत्पादन क्षमता पर देखने को मिलेगा। उन्होंने बताया कि मजदूरों का कहना है कि जितनी मजदूरी उन्हें यहां मिलती है, उतनी मजदूरी उन्हें गांव में भी मिल जाती है। 
गांव में घर का किराया भी नहीं देना पड़ता है। यही वजह है कि ज्यादातर मजदूर अपने गांव की ओर रवाना हो रहे हैं।  उनका यहां रहना लगभग अंसभव सा हो रहा है। गांधीनगर में कपड़े को छोटे-छोटे दुकानों तक पहुंचाने वाले सीतामढ़ी, बिहार निवासी लक्ष्मण कुमार ने बताया कि जितनी कमाई नहीं होती, उससे ज्यादा तो उनके रुपये खाने-पीने पर खर्च हो जाते हैं।

दिहाड़ी गैस भराने में हो रही खर्च तो यहां रुककर क्या फायदा 
लक्ष्मण कुमार ने बताया कि वह दिन का 600 से 700 रुपये कमा पाते हैं। बाजारों में दुकानदार अब एक किलो गैस भरने के लिए 400 से 500 रुपये मांगने लगे हैं। अब ऐसे में घर का किराया कैसे भरेंगे। घर रुपया कहां से भेजेंगे और तो और खाना कैसे खाएंगे। उन्होंने बताया कि इसी वजह से वापस गांव जा रहे हैं। गोरखपुर, उत्तर प्रदेश निवासी सुमित ने बताया कि 500 से 600 रुपये तो मजदूरी गांव में मिल जाती है। वहां, न घर का किराये देने का झंझट है और न गैस के लिए परेशान होना है। उन्होंने कहा कि घर पर रहेंगे, तो कम से कम दो वक्त की रोटी तो खा पाएंगे।

बाजारों में बंद हो रहीं छोटी दुकानें
राजधानी के बाजारों में जहां कभी शाम होते ही खाने-पीने की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ती थी, वहीं अब कई दुकानें बंद पड़ी नजर आ रही हैं। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में हुई अचानक बढ़ोतरी है, जिसने छोटे दुकानदारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।

करोल बाग, लाजपत नगर, चांदनी चौक, सरोजिनी नगर, आरके पुरम और सदर बाजार समेत कई बाजारों में गैस की कमी के कारण खाने पीने की कई छोटी दुकानें बंद हो गई हैं। दुकानदारों के अनुसार, कुछ समय पहले तक जो एलपीजी सिलिंडर 3000 रुपये के आसपास मिल जाता था, उसकी कीमत अब 4500 रुपये तक पहुंच गई है।  सरोजिनी नगर मार्केट में चाट की दुकान चलाने वाले राजेश कुमार ने बताया कि पहले एक दिन में जितनी कमाई होती थी। उससे आसानी से गैस, सामान और बाकी खर्च निकल जाता था। लेकिन अब सिलिंडर इतना महंगा हो गया है कि हर बार खरीदना मुश्किल लगने लगा है।

आरके पुरम में मोमोज का स्टॉल लगाने वाले मोहम्मद इरफान ने बताया कि हमने करीब एक महीने पहले दुकान बंद कर दी। रोज का खर्च निकलना मुश्किल हो गया था। गैस के साथ-साथ सब्जियों और अन्य सामान की कीमतें भी बढ़ गई हैं। ऐसे में घाटा सहना मुश्किल हो गया है। करोल बाग में गोलगप्पे बेचने वाली मीना ने बताया कि अगर हम प्लेट का दाम 10 से 20 रुपये भी बढ़ाते हैं, तो ग्राहक तुरंत मोलभाव करने लगते हैं या दूसरी दुकान पर चले जाते हैं। 

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