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Jabalpur Cruise Accident: मन्नतों का त्रिशान, मां से लिपटकर सदा के लिए सो गया; मौत का सबब बनी अप्रशिक्षित टीम

ज्योति सिंह, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 03 May 2026 03:09 AM IST
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सार

हादसे के वक्त क्रूज में परिवार के छह सदस्य मौजूद थे, जिनमें से तीन की मौत हो गई। शनिवार को मां-बेटे को एक साथ दफनाया गया तो हर आंख नम थी।

jabalpur cruise tragedy aftermaths and boat team
बरगी डैम में पानी के बीच मां के सीने से लिपटा मिला मासूम बेटा... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश में जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे के बाद आई एक-दूसरे से लिपटे मां और मासूम बेटे की तस्वीर ने सभी को झकझोर दिया है। यह तस्वीर दिल्ली के मसीह परिवार की बेटी मरीना और नवासे त्रिशान की थी। हादसे के वक्त क्रूज में परिवार के छह सदस्य मौजूद थे, जिनमें से तीन की मौत हो गई। शनिवार को मां-बेटे को एक साथ दफनाया गया तो हर आंख नम थी।

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हेमलता ने बताया, कि सबसे बड़ी बेटी सिया के जन्म के 10 साल बाद छोटे बेटे त्रिशांत का जन्म हुआ था। काफी मन्नतों के बाद त्रिशांत मरीना की गोद पा सका था। हाल ही में उसका दाखिला माउंट कार्मेल स्कूल के प्रेप में कराया गाया था। अभी-अभी उसकी प्रारंभिक शिक्षा शुरू हुई थी। 
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हाल ही में उसका दाखिला माउंट कार्मेल स्कूल के प्रेप में कराया गाया था। उसकी प्रारंभिक शिक्षा शुरू ही हुई थी। घर का सबसे छोटा त्रिशान मृत्यु के अंतिम क्षणों में भी मां के सीने से बड़े लाड से लगा रहा। कब्रिस्तान में मरीना की मां मधुर को नवासे आैर बेटी से थोड़ी दूर दफनाया गया। पति प्रदीप की आंखें लोगों से नजरें चुराती, मानों एक अफसोस हो, अंत में अपनों को नहीं बचा पाने का दर्द। 

प्रदीप ने अपनी मां जैसी सास, अपनी पत्नी और अपना चार वर्षीय बेटा खोया था। उधर जूलियस ने अपनी पत्नी अपनी बेटी और लाडले नाती को खो दिया। इस हादसे में दो पिता और दो पतियों ने वो सब खोया जिसे अब दुबारा पा नहीं सकते। इससे पहले एक ही परिवार के तीन जनाजे जब एक साथ उठे तो दिल्ली की खजान बस्ती के लोग फफक पड़े। 

सारी बातें सुनने वाला एआई, चीखें क्यों नहीं सुनता
ये फोन सब कुछ सुनता है, फिर उसी से जुड़ी तस्वीरें हमें दिखाता है। हम वह तस्वीरें देखना नहीं चाहतें। फोन खोलते ही अब डर लगता है। फोन में एआई है लेकिन ये कैसा सिस्टम, जो हर बात सुनता है लेकिन जब कोई समस्या आती है तो यह बहरा क्यों हो जाता है। तब क्यों नहीं ये चेतावनी जारी करता और जिम्मेदारों को खबर देता है कि कोई फंस गया है, किसी की जान खतरे में हैं। मेरा परिवार मदद के लिए राह जोहता रहा।  क्रूज पर लोग खुद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे थे। यह शब्द हेमलता के हैं जिन्हें सुनकर वहां मौजूद महिलाएं फफक पड़ीं। 

अप्रशिक्षित क्रूज टीम बनी मौतों की वजह 
क्रूज टीम की लापरवाही ने हमारा हंसता-खेलता परिवार उजाड़ दिया। मेरे ससुर इसके चश्मदीद गवाह हैं। हेमलता ने बताया कि क्रूज पर बैठते ही लाइफ जैकेट देनी चाहिए थी लेकिन किसी ने सेफ्टी का ध्यान नहीं रखा। टीम प्रशिक्षित होती तो आज परिवार के तीनों सदस्य सकुशल होते। 

हेमलता ने बताया कि नाव में जब पानी भरने लगा तो मेरे ससुर ने खुद से पैकेट फाड़कर लाइफ जैकेट निकालें और वहां मौजूद लोगों को बांटना शुरु कर दिया। लोग खुद से जैकेट पहन रहे थे। नाव डूबने के बाद क्रूज टीम के कई लोग अपनी जान बचाकर भाग गए, लेकिन सवारी वहीं, फंसी रही। किसी तरह आसपास के लोगों ने रस्सी फेंककर डूब रहे लोगों को खींचना शुरु किया। उसमें मेरे ससुर भी शामिल थे। वरना आज सास के साथ ससुर और नंदोई को भी खो बैठती।

परिजनों के मुताबिक, जैकेट पर्याप्त नहीं थीं। आखिरी में एक जैकेट बची थी और सामने थीं दो जिंदगियां, एक मां और उनका चार साल का बेटा। तब बेटी मरीना को जूलियस ने जैकेट दिया। प्रदीप ने मरीना के जैकेट में बेटे त्रिशान के दोनों पैर डालें और मरीना ने बेटे को गले लगाकर ऊपर से बेल्ट बांध ली। शायद ये सोचकर कि मैं नहीं, मेरा बच्चा बच जाए लेकिन लहरें बेरहम थीं और किस्मत उससे भी ज्यादा। दोनों के साथ मरीना की मां मधुर मसीह की सांसें उसी पानी में थम गईं। स्थानीय गांव वालों ने हिम्मत दिखाते हुए रस्सियां फेंकीं और कई लोगों की जान बचाई। जूलियस, प्रदीप और 14 वर्षीय बेटी सिया को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कुलदीप  ने बताया कि पहले से येलो वेदर का अलर्ट था लेकिन टूरिस्टों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। अगर लोगों को खतरे के बारे में बताया जाता, तो कोई भी उस नाव पर सवार नहीं होता। 

बचाओ... हमारी नाव डूब रही है
मध्य प्रदेश के बरगी बांध की शांत लहरें बृहस्पतिवार शाम अचानक चीखों और सिसकियों से भर उठीं। जो सफर हंसी, जश्न और यादों के लिए शुरू हुआ था, वही कुछ ही पलों में एक ऐसे दर्दनाक हादसे में बदल गया, जिसने दिल्ली के एक पूरे परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया। मरीना के भाई कुलदीप ने बताया कि परिवार के लोग क्रूज के ऊपरी डेक पर थे, तभी मौसम खराब हो गया। मेरी बहन मरीना हमारे साथ वीडियो कॉल पर थी। वह हमें नज़ारा और पानी दिखा रही थी।

अचानक हालात बदल गए। वह घबराकर रोने लगी और कहने लगी, मुझे बचाओ... मुझे बचाओ... और फिर फोन कट गया। मेरे जीजा प्रदीप थेड़ा तैरना जानते हैं, उन्होंने खुद को और अपनी टीनएज बेटी को बचा लिया लेकिन जब वे मेरी बहन, उसके बच्चों और मेरी मां को ढूंढने के लिए लौटे तब तक वे पलटी हुई नाव के नीचे फंसकर गायब हो चुके थे। जबलपुर में नया मकान बना था, गृह प्रवेश था, बेटी सिया के अच्छे नंबर आए थे हर तरफ उत्सव का माहौल था। 








 

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