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Delhi NCR News: नकली दवाओं के अंतरराज्यीय रैकेट का सरगना गिरफ्तार
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जामिया से बीबीए पास आरोपी महीनों से फरार था, मुजफ्फरनगर से दबोचा, इस मामले में यह 10वीं गिरफ्तारी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने नकली दवाओं के निर्माण और अंतरराज्यीय वितरण में शामिल गिरोह के सरगना मोहम्मद अकदस सिद्दीकी (28) को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में यह 10वीं गिरफ्तारी है। आरोपी 1 अप्रैल 2026 को नकली दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पर मारे गए छापे के बाद से फरार चल रहा था।
अपराध शाखा की साइबर सेल के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने बताया कि मुजफ्फरनगर निवासी अकदस सिद्दीकी ने जामिया मिलिया इस्लामिया से बीबीए किया है। जांच में वह नकली दवाओं के निर्माण और उनके अंतरराज्यीय नेटवर्क के मुख्य मास्टरमाइंड के रूप में सामने आया। उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किए गए थे।
इंस्पेक्टर मंजीत कुमार और एसआई शबनम सैफी की टीम ने लगातार तकनीकी निगरानी, स्थानीय खुफिया सूचना और फॉलो-अप के आधार पर उसे मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार किया। इससे पहले मामले में बाबा श्याम मेडिकोज, भागीरथी प्लेस के संचालक निखिल अरोड़ा, राधे श्याम ट्रेडर्स, नोएडा के सप्लायर शिवम त्यागी, विमल फार्मा, गाजियाबाद के सप्लायर मयंक अग्रवाल, सप्लायर मोहित कुमार शर्मा, बम बम फार्मा, लखनऊ के सप्लायर तरुण कुमार हांडा, फर्जी जीएसटी फर्म उपलब्ध कराने वाले शाहरुख और राहुल, जीएसटी पंजीकरण धारक हर्ष स्वामी तथा बैंक खाता धारक निरंजन मिश्रा को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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जानी-मानी दवा कंपनियों के नाम पर नकली दवाएं तैयार करते थे
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी हाई-टेक यूनिट में जानी-मानी दवा कंपनियों के नाम पर नकली दवाएं तैयार करते थे। इसके लिए नकली पैकेजिंग सामग्री, जाली लेबल, फर्जी ट्रेडमार्क, डाई, पंच सेट और असली उत्पादों जैसे दिखने वाले प्रिंटिंग मटीरियल का इस्तेमाल किया जाता था। तैयार दवाओं को ब्रांडेड उत्पाद बताकर बाजार में उतारा जाता था।
बाजार कीमत से करीब 60 प्रतिशत कम दाम पर बेचा जाता
जांच के अनुसार, गिरोह बेहद कम लागत में नकली दवाएं बनाकर उन्हें थोक और खुदरा विक्रेताओं को असली दवाओं की बाजार कीमत से करीब 60 प्रतिशत कम दाम पर बेचता था। पुलिस का कहना है कि इससे दवा कंपनियों को आर्थिक नुकसान पहुंचा, वहीं गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली नकली दवाओं ने मरीजों के स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा पैदा किया। इन दवाओं में निर्धारित गुणवत्ता, सुरक्षा और चिकित्सीय मानकों का पालन नहीं किया गया था।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने नकली दवाओं के निर्माण और अंतरराज्यीय वितरण में शामिल गिरोह के सरगना मोहम्मद अकदस सिद्दीकी (28) को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में यह 10वीं गिरफ्तारी है। आरोपी 1 अप्रैल 2026 को नकली दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पर मारे गए छापे के बाद से फरार चल रहा था।
अपराध शाखा की साइबर सेल के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने बताया कि मुजफ्फरनगर निवासी अकदस सिद्दीकी ने जामिया मिलिया इस्लामिया से बीबीए किया है। जांच में वह नकली दवाओं के निर्माण और उनके अंतरराज्यीय नेटवर्क के मुख्य मास्टरमाइंड के रूप में सामने आया। उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किए गए थे।
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इंस्पेक्टर मंजीत कुमार और एसआई शबनम सैफी की टीम ने लगातार तकनीकी निगरानी, स्थानीय खुफिया सूचना और फॉलो-अप के आधार पर उसे मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार किया। इससे पहले मामले में बाबा श्याम मेडिकोज, भागीरथी प्लेस के संचालक निखिल अरोड़ा, राधे श्याम ट्रेडर्स, नोएडा के सप्लायर शिवम त्यागी, विमल फार्मा, गाजियाबाद के सप्लायर मयंक अग्रवाल, सप्लायर मोहित कुमार शर्मा, बम बम फार्मा, लखनऊ के सप्लायर तरुण कुमार हांडा, फर्जी जीएसटी फर्म उपलब्ध कराने वाले शाहरुख और राहुल, जीएसटी पंजीकरण धारक हर्ष स्वामी तथा बैंक खाता धारक निरंजन मिश्रा को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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जानी-मानी दवा कंपनियों के नाम पर नकली दवाएं तैयार करते थे
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी हाई-टेक यूनिट में जानी-मानी दवा कंपनियों के नाम पर नकली दवाएं तैयार करते थे। इसके लिए नकली पैकेजिंग सामग्री, जाली लेबल, फर्जी ट्रेडमार्क, डाई, पंच सेट और असली उत्पादों जैसे दिखने वाले प्रिंटिंग मटीरियल का इस्तेमाल किया जाता था। तैयार दवाओं को ब्रांडेड उत्पाद बताकर बाजार में उतारा जाता था।
बाजार कीमत से करीब 60 प्रतिशत कम दाम पर बेचा जाता
जांच के अनुसार, गिरोह बेहद कम लागत में नकली दवाएं बनाकर उन्हें थोक और खुदरा विक्रेताओं को असली दवाओं की बाजार कीमत से करीब 60 प्रतिशत कम दाम पर बेचता था। पुलिस का कहना है कि इससे दवा कंपनियों को आर्थिक नुकसान पहुंचा, वहीं गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली नकली दवाओं ने मरीजों के स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा पैदा किया। इन दवाओं में निर्धारित गुणवत्ता, सुरक्षा और चिकित्सीय मानकों का पालन नहीं किया गया था।