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जेएनयू में भर्ती व प्रोन्नति में पारदर्शिता नहीं : शिक्षक संघ
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प्रशासन पर आरक्षण नीति के उल्लंघन का भी लगाया आरोप
1500 से घटकर 1143 हुई एससी छात्रों की संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(जेएनयू) शिक्षक संघ ने फैकल्टी सदस्यों की प्रोन्नति, भर्ती प्रक्रिया और आरक्षण नीति के पालन में भारी अनियमितता का आरोप लगाया है। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है। शिक्षक संघ के अध्यक्ष सैयद अख्तर हुसैन और सचिव अविनाश कुमार के अनुसार, फरवरी 2022 से फरवरी 2026 के बीच 228 प्रोन्नति के मामलों पर विचार किया गया, जबकि इसी अवधि में 361 सीधी भर्ती के लिए चयन समितियां आयोजित हुईं। संघ का दावा है कि अगस्त 2025 के बाद सिर्फ 18 प्रोन्नति हुई, 170 से अधिक प्रमोशन मामले लंबित हैं।
कुछ शिक्षकों के रिटायर होने तक प्रोन्नति नहीं मिलने और कुछ को गैर-शैक्षणिक आधार पर रोके जाने का भी आरोप संघ ने लगाया है। साथ ही भर्ती प्रक्रिया में कोई भी उपयुक्त नहीं, के बढ़ते इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। संघ के अनुसार, 360 से अधिक पदों में से करीब 140 पदों को कोई भी उपयुक्त नहीं घोषित किया गया। इनमें से अधिकतर आरक्षित वर्ग के थे।
केंद्रीय सूचना आयोग ने लगाई थी फटकार
17 फरवरी को केंद्रीय सूचना आयोग ने प्रोन्नति और वरिष्ठता से जुड़े मामलों में सूचना देने से इन्कार करने पर जेएनयू प्रशासन को फटकार लगाई थी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। जेएनयू शिक्षक संघ ने छात्र दाखिले में भी आरक्षण नीति के उल्लंघन का आरोप लगाया है। शिक्षक संघ के अनुसार, एससी छात्रों की संख्या 1500 से घटकर 1143, एसटी छात्रों की संख्या 741 से घटकर 545 और महिला छात्रों का प्रतिशत 51.4 फीसदी से घटकर 41.6 फीसदी रह गई है।
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1500 से घटकर 1143 हुई एससी छात्रों की संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(जेएनयू) शिक्षक संघ ने फैकल्टी सदस्यों की प्रोन्नति, भर्ती प्रक्रिया और आरक्षण नीति के पालन में भारी अनियमितता का आरोप लगाया है। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है। शिक्षक संघ के अध्यक्ष सैयद अख्तर हुसैन और सचिव अविनाश कुमार के अनुसार, फरवरी 2022 से फरवरी 2026 के बीच 228 प्रोन्नति के मामलों पर विचार किया गया, जबकि इसी अवधि में 361 सीधी भर्ती के लिए चयन समितियां आयोजित हुईं। संघ का दावा है कि अगस्त 2025 के बाद सिर्फ 18 प्रोन्नति हुई, 170 से अधिक प्रमोशन मामले लंबित हैं।
कुछ शिक्षकों के रिटायर होने तक प्रोन्नति नहीं मिलने और कुछ को गैर-शैक्षणिक आधार पर रोके जाने का भी आरोप संघ ने लगाया है। साथ ही भर्ती प्रक्रिया में कोई भी उपयुक्त नहीं, के बढ़ते इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। संघ के अनुसार, 360 से अधिक पदों में से करीब 140 पदों को कोई भी उपयुक्त नहीं घोषित किया गया। इनमें से अधिकतर आरक्षित वर्ग के थे।
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केंद्रीय सूचना आयोग ने लगाई थी फटकार
17 फरवरी को केंद्रीय सूचना आयोग ने प्रोन्नति और वरिष्ठता से जुड़े मामलों में सूचना देने से इन्कार करने पर जेएनयू प्रशासन को फटकार लगाई थी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। जेएनयू शिक्षक संघ ने छात्र दाखिले में भी आरक्षण नीति के उल्लंघन का आरोप लगाया है। शिक्षक संघ के अनुसार, एससी छात्रों की संख्या 1500 से घटकर 1143, एसटी छात्रों की संख्या 741 से घटकर 545 और महिला छात्रों का प्रतिशत 51.4 फीसदी से घटकर 41.6 फीसदी रह गई है।