{"_id":"6a7c9740e2fcd168900e15cb","slug":"late-night-screen-time-disrupting-sleep-cycles-number-of-sleep-disorder-patients-rising-in-the-capital-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-150398-2026-08-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: देर रात तक स्क्रीन पर बिताया समय बिगाड़ रहा नींद का चक्र, राजधानी में बढ़ रहे स्लीप डिसऑर्डर के मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: देर रात तक स्क्रीन पर बिताया समय बिगाड़ रहा नींद का चक्र, राजधानी में बढ़ रहे स्लीप डिसऑर्डर के मरीज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल, बढ़ता तनाव और अनियमित दिनचर्या लोगों की नींद पर भारी पड़ रही है। राजधानी के अस्पतालों में नींद से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार कम या खराब नींद लेना केवल थकान और सुस्ती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लंबे समय में हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।
अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं जो नींद न आने, बार-बार नींद टूटने और दिनभर थकान की शिकायत कर रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार इनमें युवाओं की संख्या अधिक है, जो देर रात तक स्क्रीन का उपयोग करते हैं। कई मरीजों को जांच के बाद स्लीप डिसऑर्डर की पुष्टि हो रही है और उन्हें लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह दी जा रही है।
मोबाइल और ओटीटी ने बदली सोने की आदत
डॉक्टरों के मुताबिक देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप, सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित करता है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को प्रभावित कर सकती है, जिससे नींद आने में देरी होती है। लगातार देर से सोने की आदत बनने पर अनिद्रा की समस्या बढ़ सकती है। इसके कारण एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन, याददाश्त कमजोर होने और काम करने की क्षमता प्रभावित होने जैसी दिक्कतें सामने आती हैं।
विज्ञापन
केस स्टडी-1
रात दो बजे तक लैपटॉप और फिर मोबाइल
पूर्वी दिल्ली निवासी 28 वर्षीय युवक निजी आईटी कंपनी में काम करते हैं। काम के कारण वह रोज रात करीब दो बजे तक लैपटॉप पर रहते थे। इसके बाद भी मोबाइल पर सोशल मीडिया देखने में समय बिताते थे। कुछ महीनों बाद उन्हें रात में नींद नहीं आने, सुबह सिरदर्द और दिनभर थकान की शिकायत होने लगी। अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने स्लीप डिसऑर्डर की समस्या बताई। स्क्रीन टाइम कम करने और सोने-जागने का समय निर्धारित करने के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ।
केस स्टडी-2
महिला की कई बार टूटने लगी नींद
एक निजी कंपनी में कार्यरत 35 वर्षीय महिला भी देर रात तक लैपटॉप पर काम करती थीं। कुछ समय बाद रात में उनकी नींद कई बार टूटने लगी। इसके साथ चिड़चिड़ापन और दिनभर सुस्ती रहने लगी। डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने सोने का निश्चित समय तय किया और सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद कर दिया। नियमित व्यायाम शुरू करने के कुछ सप्ताह बाद उनकी नींद में सुधार हुआ।
नींद को दिनचर्या का जरूरी हिस्सा मानें : डॉ. प्रवीण कुमार
जीटीबी अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार ने कहा, “नींद शरीर और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए उतनी ही जरूरी है, जितना संतुलित भोजन और शारीरिक गतिविधि। देर रात तक स्क्रीन देखने और अनियमित दिनचर्या से नींद का चक्र प्रभावित हो सकता है। लोगों को सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बनानी चाहिए। रोज एक निश्चित समय पर सोने और जागने की आदत डालने के साथ नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। यदि लंबे समय तक नींद न आने या बार-बार नींद टूटने की समस्या रहे तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।”
बाक्सः आदतों से सुधरेगी नींद
- सोने और जागने का समय रोज लगभग एक जैसा रखें।
- सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी से दूरी बनाएं।
- शाम के बाद चाय-कॉफी का अधिक सेवन न करें।
- दिन में नियमित शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करें।
- सोने से पहले तनावपूर्ण काम और सोशल मीडिया से बचें।
- लगातार नींद की समस्या रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
नई दिल्ली। देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल, बढ़ता तनाव और अनियमित दिनचर्या लोगों की नींद पर भारी पड़ रही है। राजधानी के अस्पतालों में नींद से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार कम या खराब नींद लेना केवल थकान और सुस्ती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लंबे समय में हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।
अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं जो नींद न आने, बार-बार नींद टूटने और दिनभर थकान की शिकायत कर रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार इनमें युवाओं की संख्या अधिक है, जो देर रात तक स्क्रीन का उपयोग करते हैं। कई मरीजों को जांच के बाद स्लीप डिसऑर्डर की पुष्टि हो रही है और उन्हें लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह दी जा रही है।
विज्ञापन
मोबाइल और ओटीटी ने बदली सोने की आदत
डॉक्टरों के मुताबिक देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप, सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित करता है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को प्रभावित कर सकती है, जिससे नींद आने में देरी होती है। लगातार देर से सोने की आदत बनने पर अनिद्रा की समस्या बढ़ सकती है। इसके कारण एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन, याददाश्त कमजोर होने और काम करने की क्षमता प्रभावित होने जैसी दिक्कतें सामने आती हैं।
विज्ञापन
केस स्टडी-1
रात दो बजे तक लैपटॉप और फिर मोबाइल
पूर्वी दिल्ली निवासी 28 वर्षीय युवक निजी आईटी कंपनी में काम करते हैं। काम के कारण वह रोज रात करीब दो बजे तक लैपटॉप पर रहते थे। इसके बाद भी मोबाइल पर सोशल मीडिया देखने में समय बिताते थे। कुछ महीनों बाद उन्हें रात में नींद नहीं आने, सुबह सिरदर्द और दिनभर थकान की शिकायत होने लगी। अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने स्लीप डिसऑर्डर की समस्या बताई। स्क्रीन टाइम कम करने और सोने-जागने का समय निर्धारित करने के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ।
केस स्टडी-2
महिला की कई बार टूटने लगी नींद
एक निजी कंपनी में कार्यरत 35 वर्षीय महिला भी देर रात तक लैपटॉप पर काम करती थीं। कुछ समय बाद रात में उनकी नींद कई बार टूटने लगी। इसके साथ चिड़चिड़ापन और दिनभर सुस्ती रहने लगी। डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने सोने का निश्चित समय तय किया और सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद कर दिया। नियमित व्यायाम शुरू करने के कुछ सप्ताह बाद उनकी नींद में सुधार हुआ।
नींद को दिनचर्या का जरूरी हिस्सा मानें : डॉ. प्रवीण कुमार
जीटीबी अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार ने कहा, “नींद शरीर और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए उतनी ही जरूरी है, जितना संतुलित भोजन और शारीरिक गतिविधि। देर रात तक स्क्रीन देखने और अनियमित दिनचर्या से नींद का चक्र प्रभावित हो सकता है। लोगों को सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बनानी चाहिए। रोज एक निश्चित समय पर सोने और जागने की आदत डालने के साथ नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। यदि लंबे समय तक नींद न आने या बार-बार नींद टूटने की समस्या रहे तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।”
बाक्सः आदतों से सुधरेगी नींद
- सोने और जागने का समय रोज लगभग एक जैसा रखें।
- सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी से दूरी बनाएं।
- शाम के बाद चाय-कॉफी का अधिक सेवन न करें।
- दिन में नियमित शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करें।
- सोने से पहले तनावपूर्ण काम और सोशल मीडिया से बचें।
- लगातार नींद की समस्या रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लें।