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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Master Plan Delhi-2047: Land pooling to get a boost; Yamuna's boundaries to be demarcated.

मास्टर प्लान दिल्ली-2047: लैंड पूलिंग को लगेंगे पंख, यमुना की भी होगी हदबंदी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2026 09:24 PM IST
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20 हेक्टेयर के भूखंडों का समूह भी नीति में शामिल होगा, 60% जमीन डेवलपर और 40% डीडीए के पास रहेगी
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टीओडी में किफायती आवास बढ़ेगा, विरासत इमारतों के संरक्षण और कम घनत्व वाले इलाकों को नियमित करने का रास्ता खुलेगा

आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली। मास्टर प्लान दिल्ली-2047 में बदलावों के बाद राजधानी में लैंड पूलिंग नीति को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। अब 40 हेक्टेयर के बजाय 20 हेक्टेयर जमीन का समूह भी लैंड पूलिंग के दायरे में आ सकेगा। इससे छोटे भूखंडों के मालिकों के लिए जमीन को एक साथ लाकर आवासीय और अन्य योजनाबद्ध परियोजनाओं का रास्ता खुलेगा। खासकर बाहरी दिल्ली के उन इलाकों को इसका लाभ मिल सकता है, जहां बड़े भूखंड उपलब्ध नहीं हैं।
नीति में जमीन के बंटवारे का तरीका भी बदला गया है। कुल पूल की गई जमीन में 60 फीसदी हिस्सा डेवलपर को मिलेगा, जबकि 40 फीसदी डीडीए के पास रहेगा। डीडीए अपने हिस्से की 35 फीसदी जमीन पर सड़क, सीवेज और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करेगा। शेष पांच फीसदी जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियों की गुंजाइश होगी। इससे निजी विकास के साथ सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भी एकीकृत तरीके से तैयार किया जा सकेगा।
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डेवलपर के साथ डीडीए भी करेगा विकास
लैंड पूलिंग में डीडीए की भूमिका सिर्फ जमीन लेने तक सीमित नहीं रहेगी। उसके हिस्से की जमीन का उपयोग सड़क, सीवेज और अन्य जरूरी सुविधाओं के विकास में किया जाएगा। पांच फीसदी जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियां विकसित करने का प्रावधान भी है। इससे नए विकसित होने वाले क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों को साथ बढ़ाने पर जोर रहेगा।
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टीओडी से परिवहन और आवास पर जोर
ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) के नियमों में भी बदलाव किया गया है। 2000 वर्गमीटर क्षेत्र को इसके दायरे में रखते हुए फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) 500 से घटाकर 400 किया गया है। किफायती आवास में 65 फीसदी घर 60 वर्गमीटर क्षेत्रफल के होंगे। वहीं सोसाइटी की परिभाषा में बदलाव करते हुए 200 के बजाय 300 घरों वाली सोसाइटी को शामिल किया जा सकेगा। सार्वजनिक परिवहन के आसपास विकास को बढ़ावा देकर यातायात दबाव कम करने पर जोर है।


बाढ़ क्षेत्र की नई सीमा तय, 6295 हेक्टेयर में निर्माण पर रोक
मास्टर प्लान में यमुना के ओ-जोन और बाढ़ क्षेत्र की नई सीमा तय की गई है। दिल्ली में यमुना का कुल बाढ़ क्षेत्र 9934 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है, जिसमें 6295 हेक्टेयर को सक्रिय बाढ़ क्षेत्र माना गया है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं होगी। सक्रिय फ्लड एरिया के बाहर बचे फ्लड प्लेन में मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियां विकसित की जा सकेंगी।
यमुना रिवर फ्रंट पर करीब 52 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक विकसित करने की योजना है। इससे नदी किनारे हरित, पैदल और साइकिल आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश होगी।



विरासत वाली इमारतों और कम घनत्व वाले इलाकों को राहत
विरासत वाली इमारतों के संरक्षण के लिए एफएआर 50 करने का प्रावधान किया गया है। इससे इनके संरक्षण, सुधार और सुंदरीकरण के लिए सीमित विकास की अनुमति मिल सकेगी। वहीं कम घनत्व वाले क्षेत्रों को नियमित करने का रास्ता खुलने से लंबे समय से नियमन की प्रतीक्षा कर रहे इलाकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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