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Delhi NCR News: रंगदारी मामले में लॉरेंस बिश्नोई और दो को समन जारी
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
साकेत कोर्ट ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और दो अन्य आरोपियों को एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगने वाले व्हाट्सएप और फोन कॉल वाले एक्सटॉर्शन मामले में समन जारी किया है। यह फैसला महज एक महीने बाद आया है, जब एक निचली अदालत ने फरवरी में उन्हें इस मामले में बरी कर दिया था।
साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने राज्य सरकार की संशोधन याचिका पर सुनवाई करते हुए आरोपी पक्ष को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा रिवीजन पिटिशन की नोटिस जांच अधिकारी (आईओ) के माध्यम से आरोपियों को अगली तारीख के लिए जारी की जाए। सनलाइट कॉलोनी पुलिस स्टेशन में अप्रैल 2023 में दर्ज इस मामले में शिकायतकर्ता रमनदीप सिंह ने आरोप लगाया था कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्यों ने व्हाट्सएप पर एक करोड़ रुपये की मांग करते हुए जान से मारने की धमकी दी थी। फरवरी 2026 में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नूपुर गुप्ता ने लॉरेंस बिश्नोई, हरेंद्र सरापदड़िया और आशीष शर्मा को इस मामले में बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष ने एक्सटॉर्शन की धारा के जरूरी तत्व साबित नहीं किए, क्योंकि शिकायतकर्ता ने कोई धन या संपत्ति देने की बात नहीं बताई थी। मात्र धमकी और मांग पर्याप्त नहीं है।
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नई दिल्ली।
साकेत कोर्ट ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और दो अन्य आरोपियों को एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगने वाले व्हाट्सएप और फोन कॉल वाले एक्सटॉर्शन मामले में समन जारी किया है। यह फैसला महज एक महीने बाद आया है, जब एक निचली अदालत ने फरवरी में उन्हें इस मामले में बरी कर दिया था।
साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने राज्य सरकार की संशोधन याचिका पर सुनवाई करते हुए आरोपी पक्ष को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा रिवीजन पिटिशन की नोटिस जांच अधिकारी (आईओ) के माध्यम से आरोपियों को अगली तारीख के लिए जारी की जाए। सनलाइट कॉलोनी पुलिस स्टेशन में अप्रैल 2023 में दर्ज इस मामले में शिकायतकर्ता रमनदीप सिंह ने आरोप लगाया था कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्यों ने व्हाट्सएप पर एक करोड़ रुपये की मांग करते हुए जान से मारने की धमकी दी थी। फरवरी 2026 में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नूपुर गुप्ता ने लॉरेंस बिश्नोई, हरेंद्र सरापदड़िया और आशीष शर्मा को इस मामले में बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष ने एक्सटॉर्शन की धारा के जरूरी तत्व साबित नहीं किए, क्योंकि शिकायतकर्ता ने कोई धन या संपत्ति देने की बात नहीं बताई थी। मात्र धमकी और मांग पर्याप्त नहीं है।
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