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LPG Crisis: दिल्ली के बाजारों से मजदूरों का पलायन शुरू, एलपीजी संकट और कालाबाजारी से गांव की ओर बढ़ाए कदम
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Sun, 29 Mar 2026 08:19 PM IST
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सार
लक्ष्मी नगर, रघुवरपुरा और गांधी नगर मार्केट जैसे बड़े बाजारों से एक-एक करके मजदूर अब अपने घर यानी गांव की ओर लौट रहे हैं। गांधीनगर में कपड़े को छोटे-छोटे दुकानों तक पहुंचाने वाले सीतामढ़ी, बिहार निवासी लक्ष्मण कुमार ने बताया कि जितनी कमाई नहीं होती, उससे ज्यादा तो उनके रुपये खाने-पीने पर खर्च हो जाते हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब दिल्ली के बाजारों में भी दिखने लगा है। बढ़ते गैस संकट और कालाबाजारी की वजह से दिल्ली के बाजारों से मजदूरों की संख्या कम होती जा रही है। लक्ष्मी नगर, रघुवरपुरा और गांधी नगर मार्केट जैसे बड़े बाजारों से एक-एक करके मजदूर अब अपने घर यानी गांव की ओर लौट रहे हैं। ऐसे में व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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गांधीनगर में कपड़े को छोटे-छोटे दुकानों तक पहुंचाने वाले सीतामढ़ी, बिहार निवासी लक्ष्मण कुमार ने बताया कि जितनी कमाई नहीं होती, उससे ज्यादा तो उनके रुपये खाने-पीने पर खर्च हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि वह दिन का 600 से 700 रुपये कमा पाते हैं। वहीं, बाजारों में दुकानदार एक किलो गैस भरने के लिए 400 से 500 रुपये मांगते हैं। अब ऐसे में घर का किराया कैसे भरेंगे। घर रुपया कहां से भेजेंगे, और तो और खाना कैसे खाएंगे। उन्होंने बताया कि इसी वजह से वापस गांव जा रहे हैं। गोरखपुर, उत्तर प्रदेश निवासी सुमित ने बताया कि 500 से 600 रुपये तो मजदूरी गांव में मिल जाता है। वहां, पर न तो घर का किराये देने का झंझट है और न ही गैस के लिए परेशान होना है। उन्होंने कहा कि घर पर रहेंगे, तो कम से कम दो वक्त की रोटी तो खा पाएंगे।
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गांव गए मजदूर, तो बढ़ जाएंगी व्यापारियों की मुश्किलें
गांधीनगर के रघुवर पुरा शॉपकीपर एसोसिएशन के प्रधान पवन जिंदल ने बताया कि अगर गैस संकट के बीच सारे मजदूर अपने गांव चले जाएंगे, तो व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। मजदूर न मिलने से सारे काम रुक जाएंगे, जिससे कारोबार में नुकसान उठाना पड़ सकता है। साथ ही, इसका असर उत्पादन क्षमता पर देखने को मिल सकता है। उन्होंने बताया कि मजदूरों का कहना है कि जितनी मजदूरी उन्हें यहां मिलती है, उतनी मजदूरी उन्हें गांव में भी मिल जाती है। साथ ही, उन्हें गांव में घर का किराया भी नहीं देना पड़ता है। यही वजह है कि ज्यादातर मजदूर अपने गांव की ओर रवाना हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह मजदूरों को समझा रहे हैं कि यहां स्थिति सामान्य हो जाएंगी, गांव जाने की जरूरत नहीं हैं।