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एक सदी बाद भी प्रासंगिक है महात्मा गांधी का अहिंसा का रास्ता: सोनम वांगचुक
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- अस्पताल से छुट्टी के बाद सोनम वांगचुक ने राजघाट पर गांधी को दी श्रद्धांजलि
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन का अनशन समाप्त करने के बाद सोमवार को गुरुग्राम के अस्पताल से छुट्टी मिलने पर अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गांधी का सत्य और अहिंसा का रास्ता आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना 100 साल पहले था।
वांगचुक ने लोगों से मांगों के समाधान के लिए शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीके अपनाने की अपील की। हाल के छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह सफलता हिंसा या ताकत से नहीं, बल्कि शांति, संयम और त्याग से मिली। पिछले 5-6 साल से वह लद्दाख में अहिंसक मार्ग पर चल रहे हैं और सकारात्मक परिणाम मिला है।
शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में कदम उठाए जाने पर उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को शुरुआत बताते हुए कहा कि केवल इस्तीफा काफी नहीं, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार जरूरी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और संबंधित पक्षों के बीच सकारात्मक बातचीत के जरिए बेहतर व्यवस्था तैयार की जाएगी। संसद में पेश सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पर गंभीर चर्चा की जानी चाहिए, ताकि छात्रों और देश के हित में सोच-समझकर फैसले हो सकें।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन का अनशन समाप्त करने के बाद सोमवार को गुरुग्राम के अस्पताल से छुट्टी मिलने पर अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गांधी का सत्य और अहिंसा का रास्ता आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना 100 साल पहले था।
वांगचुक ने लोगों से मांगों के समाधान के लिए शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीके अपनाने की अपील की। हाल के छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह सफलता हिंसा या ताकत से नहीं, बल्कि शांति, संयम और त्याग से मिली। पिछले 5-6 साल से वह लद्दाख में अहिंसक मार्ग पर चल रहे हैं और सकारात्मक परिणाम मिला है।
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शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में कदम उठाए जाने पर उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को शुरुआत बताते हुए कहा कि केवल इस्तीफा काफी नहीं, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार जरूरी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और संबंधित पक्षों के बीच सकारात्मक बातचीत के जरिए बेहतर व्यवस्था तैयार की जाएगी। संसद में पेश सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पर गंभीर चर्चा की जानी चाहिए, ताकि छात्रों और देश के हित में सोच-समझकर फैसले हो सकें।
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