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Delhi NCR News: ड्रोन और डिजिटल ट्विन तकनीक से संपत्ति सर्वे करेगी एमसीडी, चार एजेंसियों के साथ एमओयू
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमसीडी ने संपत्ति कर व्यवस्था को मजबूत करने और शहरी प्रशासन को आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाने के लिए चार एजेंसियों के साथ ड्रोन-आधारित जियोस्पेशियल सर्वे एवं डिजिटल ट्विन पहल के पायलट प्रोजेक्ट के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। एमसीडी का कहना है कि यह पहल शहर में संपत्तियों के अधिक सटीक आकलन और बेहतर शहरी नियोजन में अहम भूमिका निभाएगी।
एमसीडी के अनुसार, पायलट परियोजनाओं के तहत ड्रोन आधारित हवाई सर्वेक्षण, लिडार मैपिंग, डिजिटल ट्विन तकनीक, थ्री-डी सिटी मॉडलिंग, जीआईएस आधारित एसेट मैपिंग और आधुनिक डाटा एनालिटिक्स का उपयोग किया जाएगा। इन तकनीकों के जरिए उन संपत्तियों की पहचान की जा सकेगी जिनका अब तक मूल्यांकन नहीं हुआ है या जिनका मूल्यांकन वास्तविक स्थिति से कम दर्ज है।
अधिकारियों के मुताबिक इस परियोजना से संपत्ति कर विभाग को कर दायरे का विस्तार करने और राजस्व संग्रह प्रणाली को अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही शहरी नियोजन, परिसंपत्ति प्रबंधन और नागरिक सेवाओं के लिए एक मजबूत जियोस्पेशियल डेटाबेस तैयार किया जा सकेगा। एमसीडी ने स्पष्ट किया कि ये पायलट प्रोजेक्ट किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के बिना पूरे किए जाएंगे। परियोजना में शामिल एजेंसियां अपने संसाधनों और तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल करते हुए सर्वेक्षण और संबंधित कार्य करेंगी।
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नई दिल्ली। एमसीडी ने संपत्ति कर व्यवस्था को मजबूत करने और शहरी प्रशासन को आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाने के लिए चार एजेंसियों के साथ ड्रोन-आधारित जियोस्पेशियल सर्वे एवं डिजिटल ट्विन पहल के पायलट प्रोजेक्ट के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। एमसीडी का कहना है कि यह पहल शहर में संपत्तियों के अधिक सटीक आकलन और बेहतर शहरी नियोजन में अहम भूमिका निभाएगी।
एमसीडी के अनुसार, पायलट परियोजनाओं के तहत ड्रोन आधारित हवाई सर्वेक्षण, लिडार मैपिंग, डिजिटल ट्विन तकनीक, थ्री-डी सिटी मॉडलिंग, जीआईएस आधारित एसेट मैपिंग और आधुनिक डाटा एनालिटिक्स का उपयोग किया जाएगा। इन तकनीकों के जरिए उन संपत्तियों की पहचान की जा सकेगी जिनका अब तक मूल्यांकन नहीं हुआ है या जिनका मूल्यांकन वास्तविक स्थिति से कम दर्ज है।
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अधिकारियों के मुताबिक इस परियोजना से संपत्ति कर विभाग को कर दायरे का विस्तार करने और राजस्व संग्रह प्रणाली को अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही शहरी नियोजन, परिसंपत्ति प्रबंधन और नागरिक सेवाओं के लिए एक मजबूत जियोस्पेशियल डेटाबेस तैयार किया जा सकेगा। एमसीडी ने स्पष्ट किया कि ये पायलट प्रोजेक्ट किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के बिना पूरे किए जाएंगे। परियोजना में शामिल एजेंसियां अपने संसाधनों और तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल करते हुए सर्वेक्षण और संबंधित कार्य करेंगी।