Saket Building Collapse: तीन दिन बाद जागी एमसीडी, छह मौतों पर टूटी चुप्पी; अवैध भवन चिन्हित कर रिपोर्ट जारी
घटनास्थल के आसपास कई अनधिकृत रूप से निर्मित भवनों के मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं और नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी है। एमसीडी का कहना है कि अब केवल नई शिकायतों ही नहीं बल्कि पुराने रिकॉर्ड और पहले दर्ज शिकायतों की भी समीक्षा होगी।
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सैदुल्लाजाब में बहुमंजिला इमारत गिरने के तीन दिन और छह मौतों के बाद आखिरकार एमसीडी की अवैध निर्माण के मामले में नींद टूट गई है। अब उसने जहां अवैैध निर्माण को चिह्नित करना शुरू कर दिया है, वहीं मंगलवार को विस्तृत रिपोर्ट जारी कर अपनी कार्रवाई और बचाव अभियान की जानकारी भी दी है।
मंगलवार को घटनास्थल के आसपास कई अनधिकृत रूप से निर्मित भवनों के मालिकों केे नोटिस जारी किए गए हैं और नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी है। एमसीडी ने कहा कि हादसे की सूचना मिलते ही अधिकारियों और मशीनरी को घटनास्थल पर भेज दिया गया था।
एमसीडी के अनुसार, हादसे के बाद क्षेत्र में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया जिसमें भवन निर्माण मानकों और स्वीकृत नक्शों से अलग बने कई ढांचों को चिह्नित किया गया। प्राथमिक जांच में पाया गया कि कुछ इमारतों में निर्धारित सीमा से अधिक निर्माण और बिना अनुमति व्यवसायिक गतिविधियां संचालित होने जैसी अनियमितताएं मौजूद हैं।
एमसीडी का कहना है कि अब केवल नई शिकायतों ही नहीं बल्कि पुराने रिकॉर्ड और पहले दर्ज शिकायतों की भी समीक्षा होगी। अधिकारियों ने बताया कि सैदुल्लाजाब, साकेत, महरौली, पर्यावरण कॉम्प्लेक्स और फ्रीडम फाइटर्स एन्क्लेव समेत दक्षिण दिल्ली के कई इलाकों में अभियान चलाया जाएगा। विशेष रूप से ग्राउंड प्लस थ्री (जी+3) सीमा से अधिक निर्माण वाली इमारतों की जांच की जा रही है। जिन भवनों में नियमों का उल्लंघन पाया गया है, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। निर्धारित 72 घंटे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीलिंग, खाली कराने और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इधर, विस्तृत रिपोर्ट जारी कर एमसीडी ने अपनी कार्रवाई और बचाव अभियान की जानकारी भी दी। रिपोर्ट के अनुसार, 30 मई की शाम 7:55 बजे जोनल कंट्रोल रूम को खसरा संख्या-262, गली नंबर-5, वेस्टर्न मार्ग स्थित भवन के ध्वस्त होने की सूचना मिली थी। इसके बाद कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता और अन्य कर्मचारियों को मौके पर रवाना किया गया। साथ ही जेसीबी, ट्रक और अन्य मशीनरी भी भेजी गई। एमसीडी के मुताबिक उसकी टीम करीब 8:30 बजे घटनास्थल पर पहुंच गई थी, लेकिन दिल्ली पुलिस द्वारा क्षेत्र की घेराबंदी किए जाने के कारण अधिकारियों को रात लगभग 10:30 बजे तक अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं मिल सकी।
वहीं एमसीडी ने दावा किया कि भवन एवं अनुरक्षण विभाग की टीमें पिछले लगभग 42 घंटों से लगातार मलबा हटाने और राहत कार्य में जुटी रहीं। अभियान में तीन जेसीबी, दो पोकलेन, तीन हाइड्रा मशीनों समेत अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया गया तथा 80 से 90 ट्रक मलबा हटाया गया।
अनधिकृत कॉलोनी में था भवन
एमसीडी ने बताया कि करीब 300 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाला यह भवन एक अनधिकृत कॉलोनी में स्थित था, जो नियमितीकरण के लिए चिह्नित 1511 कॉलोनियों में भी शामिल नहीं है। भवन में बेसमेंट से दूसरी मंजिल तक का निर्माण 12-13 वर्ष पहले हुआ था, जबकि तीसरी-चौथी मंजिल का निर्माण हाल के वर्षों में किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, हादसे के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और दमकल विभाग ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। स्निफर डॉग्स और भारी मशीनों की मदद से 24 लोगों का पता लगाया गया, जिनमें से 18 को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इनमें 12 घायलों को ट्रॉमा सेंटर भेजा गया, जबकि छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई।
मौत की इमारतों के सूत्रधार बेलदार, अधिकारियों के साथ उनके गठजोड़ से होता है अवैध निर्माण
दिल्ली में कोई अवैध इमारत गिरती है और उसके मलबे से लाशें निकलती हैं। जांच की सुई सबसे पहले जूनियर इंजीनियर (जेई), असिस्टेंट इंजीनियर (एई) और वरिष्ठ अधिकारियों की ओर घूमती है लेकिन इन अवैध इमारतों का अहम किरदार का कोई नाम नहीं लेता।
निगम के गलियारों में वर्षों से काम कर रहे अधिकारी बताते हैं कि अवैध निर्माण के पूरे खेल का सबसे कम चर्चित किरदार बेलदार होता है जो सरकारी व्यवस्था में सबसे निचले पायदान का कर्मचारी माना जाता है। यही बेलदार जमीनी स्तर पर अवैध निर्माण की पूरी समानांतर व्यवस्था का संचालन करता है।
सैदुल्लाजाब में निर्माधीन सात मंजिला इमारत गिरने की ताजा घटना ने फिर उस नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो अवैध निर्माण शुरू होने से लेकर उसके पूरा होने तक सक्रिय रहता है। निगम के कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों ने बताया कि किसी भी वार्ड में निर्माण शुरू होते ही सबसे पहले बेलदार को सूचना मिलती है। इसके बाद वह सीधे निर्माणकर्ता या प्रॉपर्टी मालिक तक पहुंचता है और सेटिंग-गेटिंग की बातचीत शुरू होती है।
निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बेलदार केवल सूचना देने वाला कर्मचारी नहीं रह गया है। वह वसूली का फील्ड एजेंट बन गया है। आरोप है कि वह जेई और एई के नाम पर रकम मांगता है और कई मामलों में निजी लोगों को भी वसूली के लिए लगा देता है। कई बार ऐसे निर्माणों पर भी पैसे वसूले जाते हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई करने का कोई वास्तविक इरादा भी नहीं होता।
हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां...
दिल्ली में पिछले वर्षों में भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों की कार्रवाई भी इस भूमिका की ओर इशारा कर चुकी है। 2024 में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने शाहदरा जोन में एक बेलदार और एक जूनियर इंजीनियर को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया था कि बेलदार ने जेई के कहने पर रिश्वत मांगी थी। 2025 में सीबीआई ने शाहदरा जोन में एक बेलदार और एक सहायक अभियंता को कथित रूप से दो लाख रुपये की रिश्वत मांगने और लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। शिकायत के अनुसार बेलदार इंजीनियरिंग स्टाफ की ओर से रकम मांग रहा था।
बेलदार...हर अवैध निर्माण के जानकार
निगम के रिकॉर्ड बताते हैं कि बेलदार इंजीनियरिंग विभाग की स्थापित श्रेणी का हिस्सा हैंैं। जमीनी स्तर पर उनकी भूमिका मजदूरी या सहायक कार्यों तक सीमित नहीं रह गई है। भवन विभाग के कई अधिकारी स्वीकारते हैं कि वार्ड स्तर पर अवैध निर्माण की सबसे सटीक जानकारी बेलदारों के पास होती है। वर्षों पहले कुछ बेलदारों के पास करोड़ों रुपये की संपत्ति मिलने के मामलों ने भी सनसनी मचाई थी।
सदन में भी गूंज चुके हैं इनकी वसूली के किस्से
एमसीडी के सदन, स्थायी समिति और निर्माण समिति की बैठकों में कई बार बेलदारों की वसूली और अवैध निर्माण से जुड़े नेटवर्क का मुद्दा उठ चुका है। विभिन्न दलों के पार्षद आरोप लगाते रहे हैं कि कुछ बेलदार अपनी हैसियत से कहीं अधिक ऐशो-आराम की जिंदगी जीते दिखाई देते हैं। सदन में कई बार यह सवाल उठाया गया कि बेलदार महंगी गाड़ियों से आते हैं और कीमती आभूषण पहनते हैं।