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Delhi NCR News: विधानसभा में बहस, अनुशासन और डिजिटल कामकाज के लिए विधायक अनिल गोयल अव्वल
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18 साल बाद लौटी सर्वश्रेष्ठ विधायक चुनने की परंपरा, स्वस्थ बहस को बढ़ावा देने की पहल
360 डिग्री मूल्यांकन के आधार पर किया गया चयन, 100 अंकों की पारदर्शी प्रणाली
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली में 18 साल बाद सर्वश्रेष्ठ विधायक चुनने की परंपरा फिर से शुरू हुई है। विधानसभा में स्वस्थ बहस और बेहतर कामकाज को बढ़ावा देने के मकसद से उठाए गए इस कदम के तहत कृष्णा नगर से विधायक डॉ अनिल गोयल को आठवीं विधानसभा का वार्षिक सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार दिया जाएगा। दिल्ली विधानसभा ने बृहस्पतिवार को वार्षिक सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार की घोषणा की। स्वस्थ बहस, उपस्थिति, अनुशासन और डिजिटल कामकाज के लिए डॉ अनिल गोयल को इसके लिए चुना गया है। ये फैसला विधानसभा में आयोजित चयन समिति की बैठक में लिया गया। इस चयन प्रक्रिया की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने की। समिति में पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल, लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य, दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी रितेश सिंह, वरिष्ठ पत्रकार महेश के शुक्ला और विधानसभा सचिव रणजीत सिंह शामिल रहे। डॉ गोयल को ये सम्मान जल्द ही एक औपचारिक समारोह में दिया जाएगा। इसके तहत उन्हें ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और 51 हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी।
पारदर्शी प्रणाली से हुआ चयन : विजेंद्र गुप्ता
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया, पुरस्कार के लिए चयन एक तय और पारदर्शी प्रणाली के आधार पर किया गया है। कुल 100 अंकों के मूल्यांकन में 65 अंक विधानसभा के रिकॉर्ड के आधार पर और 35 अंक चयन समिति के गुणात्मक आकलन से दिए गए। इस 360 डिग्री मूल्यांकन में विधायक के काम के हर पहलू को शामिल किया गया। सबसे ज्यादा 50 अंक सदन की कार्यवाही में योगदान के लिए रखे गए। इसमें बहस की गुणवत्ता, मुद्दों की समझ और भाषा पर पकड़ को 20 अंक मिले। वहीं, 15 अंक उपस्थिति और 15 अंक प्रश्न पूछने, नोटिस देने जैसे कामों के लिए तय किए गए। इसके अलावा, समितियों में भागीदारी को भी अहम माना गया। इसके लिए कुल 30 अंक रखे गए, जिसमें 15 अंक सक्रिय योगदान और 15 अंक उपस्थिति के लिए दिए गए। अनुशासन और आचरण भी इस मूल्यांकन का हिस्सा रहे। नियमों का पालन, अध्यक्ष के निर्देशों का सम्मान और समय पर कार्यवाही को 12 अंक दिए गए। वहीं, डिजिटल और पेपरलेस कामकाज को बढ़ावा देने के लिए नेवा प्रणाली के इस्तेमाल पर 8 अंक तय किए गए।
सदन में प्रतिस्पर्धा और कार्यवाही बढ़ेगी : विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जो विधायक सदन में सार्थक बहस करते हैं और जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाते हैं, उन्हें सम्मानित करना जरूरी है। इस तरह के पुरस्कार से न सिर्फ विधायकों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि सदन की कार्यवाही का स्तर भी बेहतर होगा।
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360 डिग्री मूल्यांकन के आधार पर किया गया चयन, 100 अंकों की पारदर्शी प्रणाली
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली में 18 साल बाद सर्वश्रेष्ठ विधायक चुनने की परंपरा फिर से शुरू हुई है। विधानसभा में स्वस्थ बहस और बेहतर कामकाज को बढ़ावा देने के मकसद से उठाए गए इस कदम के तहत कृष्णा नगर से विधायक डॉ अनिल गोयल को आठवीं विधानसभा का वार्षिक सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार दिया जाएगा। दिल्ली विधानसभा ने बृहस्पतिवार को वार्षिक सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार की घोषणा की। स्वस्थ बहस, उपस्थिति, अनुशासन और डिजिटल कामकाज के लिए डॉ अनिल गोयल को इसके लिए चुना गया है। ये फैसला विधानसभा में आयोजित चयन समिति की बैठक में लिया गया। इस चयन प्रक्रिया की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने की। समिति में पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल, लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य, दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी रितेश सिंह, वरिष्ठ पत्रकार महेश के शुक्ला और विधानसभा सचिव रणजीत सिंह शामिल रहे। डॉ गोयल को ये सम्मान जल्द ही एक औपचारिक समारोह में दिया जाएगा। इसके तहत उन्हें ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और 51 हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी।
पारदर्शी प्रणाली से हुआ चयन : विजेंद्र गुप्ता
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया, पुरस्कार के लिए चयन एक तय और पारदर्शी प्रणाली के आधार पर किया गया है। कुल 100 अंकों के मूल्यांकन में 65 अंक विधानसभा के रिकॉर्ड के आधार पर और 35 अंक चयन समिति के गुणात्मक आकलन से दिए गए। इस 360 डिग्री मूल्यांकन में विधायक के काम के हर पहलू को शामिल किया गया। सबसे ज्यादा 50 अंक सदन की कार्यवाही में योगदान के लिए रखे गए। इसमें बहस की गुणवत्ता, मुद्दों की समझ और भाषा पर पकड़ को 20 अंक मिले। वहीं, 15 अंक उपस्थिति और 15 अंक प्रश्न पूछने, नोटिस देने जैसे कामों के लिए तय किए गए। इसके अलावा, समितियों में भागीदारी को भी अहम माना गया। इसके लिए कुल 30 अंक रखे गए, जिसमें 15 अंक सक्रिय योगदान और 15 अंक उपस्थिति के लिए दिए गए। अनुशासन और आचरण भी इस मूल्यांकन का हिस्सा रहे। नियमों का पालन, अध्यक्ष के निर्देशों का सम्मान और समय पर कार्यवाही को 12 अंक दिए गए। वहीं, डिजिटल और पेपरलेस कामकाज को बढ़ावा देने के लिए नेवा प्रणाली के इस्तेमाल पर 8 अंक तय किए गए।
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सदन में प्रतिस्पर्धा और कार्यवाही बढ़ेगी : विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जो विधायक सदन में सार्थक बहस करते हैं और जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाते हैं, उन्हें सम्मानित करना जरूरी है। इस तरह के पुरस्कार से न सिर्फ विधायकों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि सदन की कार्यवाही का स्तर भी बेहतर होगा।

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