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Delhi NCR News: मुंगेशपुर ड्रेन होगी सुरक्षित, 11.25 करोड़ की परियोजना मंजूर
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दोनों किनारों पर बनेगी सुरक्षा दीवार और इंस्पेक्शन पाथ, कटाव व हादसों पर लगेगी रोक
स्वतंत्र तकनीकी जांच, जियो-टैगिंग और एक साल की डिफेक्ट लाइबिलिटी से होगी गुणवत्ता की निगरानी
आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली।
मुंगेशपुर ड्रेन के किनारे रहने वाले लोगों को जल्द ही बेहतर सुरक्षा और सुविधाएं मिलेंगी। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने ड्रेन के दोनों किनारों को मजबूत करने, सुरक्षा दीवार बनाने और इंस्पेक्शन पाथ विकसित करने की 11.25 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना को मंजूरी दे दी है। परियोजना पूरी होने के बाद ड्रेन की नियमित निगरानी आसान होगी, कटाव पर प्रभावी रोक लगेगी और मानसून के दौरान जल निकासी व्यवस्था भी अधिक सुरक्षित व सुचारु हो सकेगी।
परियोजना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में काउंट नंबर 4600 मीटर से 9000 मीटर तक ड्रेन के दोनों किनारों पर सुरक्षा दीवार और इंस्पेक्शन पाथ का निर्माण होगा। इस पर करीब 9.08 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे चार महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। दूसरे चरण में काउंट नंबर 3350 मीटर से 4600 मीटर तक करीब 2.17 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य होगा, जिसे तीन महीने में पूरा करने की योजना है।
निर्माण के दौरान ड्रेन के किनारों पर मजबूत सुरक्षा दीवार के साथ जर्सी बैरियर लगाए जाएंगे, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी। इससे बच्चों व पशुओं के ड्रेन में गिरने का खतरा घटेगा और मलबा फेंकने पर भी रोक लगेगी। इंस्पेक्शन पाथ को बिटुमिनस कंक्रीट और मैकेडम से तैयार किया जाएगा, ताकि विभागीय टीमें आसानी से निरीक्षण और रखरखाव कर सकें। ड्रेन के आसपास उगी झाड़ियों और वनस्पति की सफाई भी कराई जाएगी, जिससे जल निकासी क्षमता बनी रहे और अगले मानसून में ड्रेन पूरी क्षमता से काम कर सके।
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गुणवत्ता पर रहेगी तीसरी नजर
परियोजना की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने स्वतंत्र तकनीकी जांच की व्यवस्था की है। निर्माण कार्य का निरीक्षण आईआईटी दिल्ली, डीटीयू, जामिया मिल्लिया इस्लामिया या आईआईटी रुड़की जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से कराया जाएगा। साथ ही, काम के हर चरण की जियो-टैग्ड फोटो और वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी, ताकि निर्माण की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा सके। इस प्रक्रिया से भ्रष्टाचार होने की आशंका कम रहेगी।
एक साल तक ठेकेदार ही करेगा रखरखाव
परियोजना पूरी होने के बाद एक वर्ष की डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि लागू रहेगी। इस दौरान निर्माण में किसी भी प्रकार की खामी मिलने पर संबंधित ठेकेदार को अपने खर्च पर उसे दुरुस्त करना होगा। विभाग ने निर्माण स्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा के साथ ईएसआई, ईपीएफ और अन्य वैधानिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की शर्त भी अनुबंध में शामिल की है।
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स्वतंत्र तकनीकी जांच, जियो-टैगिंग और एक साल की डिफेक्ट लाइबिलिटी से होगी गुणवत्ता की निगरानी
आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली।
मुंगेशपुर ड्रेन के किनारे रहने वाले लोगों को जल्द ही बेहतर सुरक्षा और सुविधाएं मिलेंगी। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने ड्रेन के दोनों किनारों को मजबूत करने, सुरक्षा दीवार बनाने और इंस्पेक्शन पाथ विकसित करने की 11.25 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना को मंजूरी दे दी है। परियोजना पूरी होने के बाद ड्रेन की नियमित निगरानी आसान होगी, कटाव पर प्रभावी रोक लगेगी और मानसून के दौरान जल निकासी व्यवस्था भी अधिक सुरक्षित व सुचारु हो सकेगी।
परियोजना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में काउंट नंबर 4600 मीटर से 9000 मीटर तक ड्रेन के दोनों किनारों पर सुरक्षा दीवार और इंस्पेक्शन पाथ का निर्माण होगा। इस पर करीब 9.08 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे चार महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। दूसरे चरण में काउंट नंबर 3350 मीटर से 4600 मीटर तक करीब 2.17 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य होगा, जिसे तीन महीने में पूरा करने की योजना है।
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निर्माण के दौरान ड्रेन के किनारों पर मजबूत सुरक्षा दीवार के साथ जर्सी बैरियर लगाए जाएंगे, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी। इससे बच्चों व पशुओं के ड्रेन में गिरने का खतरा घटेगा और मलबा फेंकने पर भी रोक लगेगी। इंस्पेक्शन पाथ को बिटुमिनस कंक्रीट और मैकेडम से तैयार किया जाएगा, ताकि विभागीय टीमें आसानी से निरीक्षण और रखरखाव कर सकें। ड्रेन के आसपास उगी झाड़ियों और वनस्पति की सफाई भी कराई जाएगी, जिससे जल निकासी क्षमता बनी रहे और अगले मानसून में ड्रेन पूरी क्षमता से काम कर सके।
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गुणवत्ता पर रहेगी तीसरी नजर
परियोजना की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने स्वतंत्र तकनीकी जांच की व्यवस्था की है। निर्माण कार्य का निरीक्षण आईआईटी दिल्ली, डीटीयू, जामिया मिल्लिया इस्लामिया या आईआईटी रुड़की जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से कराया जाएगा। साथ ही, काम के हर चरण की जियो-टैग्ड फोटो और वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी, ताकि निर्माण की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा सके। इस प्रक्रिया से भ्रष्टाचार होने की आशंका कम रहेगी।
एक साल तक ठेकेदार ही करेगा रखरखाव
परियोजना पूरी होने के बाद एक वर्ष की डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि लागू रहेगी। इस दौरान निर्माण में किसी भी प्रकार की खामी मिलने पर संबंधित ठेकेदार को अपने खर्च पर उसे दुरुस्त करना होगा। विभाग ने निर्माण स्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा के साथ ईएसआई, ईपीएफ और अन्य वैधानिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की शर्त भी अनुबंध में शामिल की है।