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spying: देश की जासूसी में कई राज्य के सैन्य ठिकानों की रेकी, चार देशों से जुड़े तार; आतंकी साजिश का अंदेशा

अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 21 Mar 2026 07:19 AM IST
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सार

जांच एजेंसियों ने गंभीर आतंकी साजिश को अंजाम देने से पहले की तैयारी का अंदेशा जताया है। आरोपियों ने दिल्ली, मुंबई, हरियाणा और राजस्थान के कई प्रमुख सैन्य ठिकानों व सुरक्षाबलों के स्टेशनों की भी रेकी की थी।

National espionage involved the reconnaissance of military bases in several states
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विस्तार

जासूसी मामले में अभी तक चार राज्यों के प्रमुख सैन्य व सुरक्षाबलों के ठिकानों की जानकारी पाकिस्तान, मलेशिया, यूके और दुबई के नंबरों पर भेजने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियों ने गंभीर आतंकी साजिश को अंजाम देने से पहले की तैयारी का अंदेशा जताया है। आरोपियों ने दिल्ली, मुंबई, हरियाणा और राजस्थान के कई प्रमुख सैन्य ठिकानों व सुरक्षाबलों के स्टेशनों की भी रेकी की थी।

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जासूसी का मामला सामने आने के बाद देशभर में कई जगह से पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पूछताछ में यह बात सामने आई है। कौशांबी पुलिस और एसआईटी ने गिरफ्तार किए आरोपियों ने बताया कि दो व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए विदेशी व्यक्ति सरदार से जुड़े हुए थे।
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सरदार ने सबसे पहले बनाए व्हाट्सएप ग्रुप में सुहेल, महक, राज, शिवा, रितिक और प्रवीण को जोड़ा। इसके बाद चेन शुरू हुई और अन्य आरोपी ग्रुप में जुड़ते चले गए। सुहेल ने एक अन्य व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। दोनों ग्रुप में 27-28 लोग जुड़े हुए थे। इन्हीं ग्रुप में आरोपी फोटो-वीडियो और जीपीएस लोकेशन पोस्ट करते थे। इसके बाद ग्रुप के एडमिन की ओर से तस्दीक होने के बाद उन्हें पाकिस्तान भेजा जा रहा था।

ग्रुप में पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी को लेकर भी संवाद के साक्ष्य जांच टीम को मिले हैं। सुहेल ने सरदार से शहजाद भट्टी की जान-पहचान होने के बारे में पूछा था। हालांकि ग्रुप से पाकिस्तानी गैंगस्टर के जुड़े होने के साक्ष्य नहीं मिले हैं। वहीं हापुड़ से गिरफ्तार हुए अजीम राणा भी शहजाद भट्टी के सीधे संपर्क में था।

कैमरा लगाने नाबालिग भी गए थे साथ : सूत्रों के अनुसार दिल्ली कैंट और सोनीपत रेलवे स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरा लगाने रितिक व प्रवीण के साथ दो नाबालिग आरोपी भी गए थे। आरोपी गगन और दुर्गेश के बैंक खातों में रुपये आते थे। आरोपी गणेश पुणे में सुहेल और राज के साथ रहा था। वहीं, आरोपी व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए पाकिस्तानी सरदार से सीधे संपर्क में थे और उसी के इशारे पर जासूसी कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपी विवेक गिरोह के बाकी लोगों को सिमकार्ड उपलब्ध कराने का काम करता था। जबकि दुर्गेश मुंबई पोर्ट पर ट्रक चलाने का काम करता था। उसने ट्रक चलाने के दौरान ही पोर्ट की रेकी कर फोटो-वीडियो व अन्य जानकारी पाकिस्तान भेजी थी।

रील के बहाने की रेकी : प्रतिबंधित व संवेदनशील क्षेत्रों की जीपीएस लोकेशन लेना इतना आसान नहीं है। नाबालिग रील बनाने के बहाने से संवेदनशील क्षेत्र में जाते और इसी दौरान फोटो-वीडियो बना लेते थे। इस दौरान अलग-अलग एप्लीकेशन का इस्तेमाल कर जीपीएस लोकेशन पाकिस्तान भेजते थे।

5वीं से 12वीं पास तक के लोगों को बनाया मोहरा
विदेशी व्यक्ति सरदार ने भारत की जासूसी के लिए शिक्षित के बजाय दिहाड़ी-मजदूरी करने वाले अशिक्षित युवाओं को चुना। गिरफ्तार आरोपी सुहेल, महक, राज, शिवा, प्रवीण और रितिक नौवीं से 12वीं पास थे। वहीं, शुक्रवार को गिरफ्तार हुआ आरोपी गणेश 5वीं, विवेक अशिक्षित, गगन 12वीं और दुर्गेश 9वीं पास हैं। यह सभी मोबाइल फोन मैकेनिक, दिहाड़ी मजदूरी, फास्ट फूड व फल का ठेला लगाने का काम कर रहे थे। कम उम्र में महंगे शौक और खर्च की आदत ने सरदार का रास्ता आसान किया।

सरदार ने सभी का ब्रेनवॉश कर रुपयों का लालच दिया और देश की जासूसी के लिए इस्तेमाल किया। सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि बालिग और नाबालिग सभी आरोपी इस बात से पूरी तरह परिचित थे कि वह देश के खिलाफ जासूसी कर रहे हैं। इसके बावजूद वह इसमें जुड़े रहे।

पंजाब के रास्ते आते थे रुपये
आरोपियों को भुगतान करने के लिए हवाला का सहारा लिया जा रहा था। पंजाब के रास्ते हवाले की रकम गाजियाबाद पहुंचती थी। इसके बाद आरोपी जनसेवा केंद्रों व दुकानों पर छोटी-छोटी संख्या में रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराने के बाद वहां से नकदी लेते थे। हालांकि इस काम के लिए सरदार अधिकतर उन्हीं लोगों को चुनता था, जिन्हें रुपयों की ज्यादा जरूरत होती थी।

गुजरात के भुज के वीडियो, फोटो के लिए लालायित रहता था पाकिस्तानी सरदार
पाकिस्तान इंटेलीजेंस ऑपरेटर(पीआईओ) के रूप में काम करने वाला सरफराज ढोगर उर्फ सरदार उर्फ जोरा सिंह पकड़े गए नाबालिगों से सीधे संपर्क में था। मैसेंजर और बोटिम एप से उनसे गुजरात के भुज का वीडियो और फोटो भेजने पर अधिक पैसा मिलने का झांसा देता था। मजदूरी करने वाले दो नाबालिग भुज में 14 दिनों तक रहे। जहां उन्होंने रुद्र माता एयरफोर्स बेस, भुजियो हिल, आयना महल और प्राग महल के वीडियो और फोटो भेजे हैं। उनके मोबाइल फोन में कुछ अन्य सार्वजनिक स्थानों का भी वीडियो बरामद किया गया है।

सुरक्षा एजेंसियों की पूछताछ में गजरौला और भोवापुर के रहने वाले दो नाबालिग जासूसों ने कुबूल किया है कि उन्होंने राजस्थान के जोधपुर एयरबेस, बीकानेर, जैसलमेर, सूरतगढ़, फलौदी, बाड़मेर आदि का वीडियो और फोटो भी पाकिस्तान के गैंगस्टर सरफराज को बोटिम एप के माध्यम से भेजे हैं।

 ये दोनों नाबालिग एयरबेस के नजदीक पहुंच जाते थे और रील बनाने के बहाने वीडियो मोबाइल फोन में स्टोर कर लेते थे। उक्त एयरबेस से मिग-21, सुखोई-30 एमकेआई और अन्य लड़ाकू विमान उड़ान भरते हैं और पाकिस्तान की सीमा से सटे हैं। नए एयरबेस पर जाने को कहा : राजस्थान में नए फॉरवर्ड कंपोजिट एयरबेस का निर्माण जारी है। पकड़े गए बिहार के विवेक और मेरठ के गगन कुमार ने बताया कि उन्हें मैसेंजर के जरिए संदेश दिया गया कि वह राजस्थान के नए एयरबेस की फोटो और वीडियो भेजें। हालांकि वह निर्माणाधीन एयरबेस तक नहीं पहुंच पाए। 

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