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आईआईटी दिल्ली: अमीनो एसिड तैयार करने की नई तकनीक विकसित, दवा और बायोटेक्नोलॉजी में उपयोग की उम्मीद
Fri, 14 Aug 2026 09:31 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Fri, 14 Aug 2026 09:31 PM IST
सार
आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं ने अप्राकृतिक अमीनो एसिड तैयार करने की नई रासायनिक तकनीक विकसित की है। दृश्य-प्रकाश और चिरल कॉपर कैटेलिस्ट-लिगैंड सिस्टम पर आधारित इस तकनीक से 43 प्रकार के अमीनो एसिड तैयार किए गए। इसका उपयोग दवा निर्माण, प्रोटीन इंजीनियरिंग और जैविक प्रक्रियाओं के अध्ययन में हो सकता है।
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IIT Delhi
- फोटो : ANI
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विस्तार
आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं ने अप्राकृतिक अमीनो एसिड तैयार करने की एक नई रासायनिक तकनीक विकसित की है। इस तकनीक में दृश्य-प्रकाश की ऊर्जा और चिरल कॉपर कैटेलिस्ट-लिगैंड सिस्टम का इस्तेमाल कर अणुओं की त्रि-आयामी संरचना पर सटीक नियंत्रण हासिल किया गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक यह तकनीक भविष्य में नई पीढ़ी के बायोमॉलिक्यूल्स तैयार करने में उपयोगी साबित हो सकती है।
यह शोध आईआईटी दिल्ली के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. रवि पी. सिंह के नेतृत्व में किया गया। इसका प्रमुख उद्देश्य ऐसे अप्राकृतिक अमीनो एसिड तैयार करना है, जिनका इस्तेमाल प्रोटीन की स्थिरता, मजबूती और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए किया जा सके। अमीनो एसिड के अणुओं की हैंडेडनेस यानी चिरैलिटी जैविक प्रणालियों में बेहद महत्वपूर्ण होती है। इससे शरीर सामान्यत किसी अणु के एक विशेष त्रि-आयामी स्वरूप को ही पहचानता है।
दवा निर्माण से लेकर जैविक प्रक्रियाओं में इस्तेमाल
शोधकर्ताओं ने प्राकृतिक अमीनो एसिड के बिल्डिंग ब्लॉक्स का इस्तेमाल करते हुए अलग-अलग रासायनिक समूह जोड़ने की क्षमता विकसित की है। इससे विभिन्न प्रकार के अप्राकृतिक अमीनो एसिड तैयार किए जा सकते हैं। टीम ने इस रणनीति से 43 प्रकार के अप्राकृतिक अमीनो एसिड तैयार किए हैं। अप्राकृतिक अमीनो एसिड का उपयोग दवा निर्माण, प्रोटीन इंजीनियरिंग, जैविक प्रक्रियाओं के अध्ययन में किया जाता है। कुछ स्वीकृत दवाओं में भी संशोधित अमीनो एसिड का इस्तेमाल होता है।
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यह शोध आईआईटी दिल्ली के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. रवि पी. सिंह के नेतृत्व में किया गया। इसका प्रमुख उद्देश्य ऐसे अप्राकृतिक अमीनो एसिड तैयार करना है, जिनका इस्तेमाल प्रोटीन की स्थिरता, मजबूती और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए किया जा सके। अमीनो एसिड के अणुओं की हैंडेडनेस यानी चिरैलिटी जैविक प्रणालियों में बेहद महत्वपूर्ण होती है। इससे शरीर सामान्यत किसी अणु के एक विशेष त्रि-आयामी स्वरूप को ही पहचानता है।
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दवा निर्माण से लेकर जैविक प्रक्रियाओं में इस्तेमाल
शोधकर्ताओं ने प्राकृतिक अमीनो एसिड के बिल्डिंग ब्लॉक्स का इस्तेमाल करते हुए अलग-अलग रासायनिक समूह जोड़ने की क्षमता विकसित की है। इससे विभिन्न प्रकार के अप्राकृतिक अमीनो एसिड तैयार किए जा सकते हैं। टीम ने इस रणनीति से 43 प्रकार के अप्राकृतिक अमीनो एसिड तैयार किए हैं। अप्राकृतिक अमीनो एसिड का उपयोग दवा निर्माण, प्रोटीन इंजीनियरिंग, जैविक प्रक्रियाओं के अध्ययन में किया जाता है। कुछ स्वीकृत दवाओं में भी संशोधित अमीनो एसिड का इस्तेमाल होता है।
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