{"_id":"6982759ca698b986a306f257","slug":"nhai-to-use-drones-to-monitor-deficiencies-on-delhi-mumbai-expressway-2026-02-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Solution: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की खामियों पर NHAI ड्रोन से रखेगा नजर, ब्लैक स्पॉट्स की भी होगी पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Solution: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की खामियों पर NHAI ड्रोन से रखेगा नजर, ब्लैक स्पॉट्स की भी होगी पहचान
धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 04 Feb 2026 03:54 AM IST
विज्ञापन
सार
डीएनडी फ्लाईओवर से शुरू हो रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के एक्सेस-कंट्रोल लिंक पर स्वतंत्र इंजीनियर की तैनाती की जा रही है।
demo
- फोटो : संवाद
विज्ञापन
विस्तार
एक्सप्रेसवे की निगरानी सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आसमान से भी की जाएगी। डीएनडी फ्लाईओवर से शुरू हो रहे दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे के एक्सेस-कंट्रोल लिंक पर स्वतंत्र इंजीनियर की तैनाती की जा रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने करीब 50 किलोमीटर हिस्से के संचालन और रखरखाव के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके तहत साल में कम से कम दो बार ड्रोन सर्वे अनिवार्य होगा, ताकि सड़क, पुल-फ्लाईओवर और यातायात व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर नजर रखी जा सके।
Trending Videos
दरअसल, राजधानी को दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए करीब 59 किलोमीटर लंबा एक्सेस-कंट्रोल लिंक विकसित किया गया है। यह डीएनडी फ्लाईओवर से शुरू होकर कालिंदी कुंज और फरीदाबाद होते हुए सोहना के पास केएमपी एक्सप्रेसवे और दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। मौजूद समय में इसके करीब 50 किलोमीटर का हिस्सा ट्रैफिक के लिए शुरू हो चुका है, जबकि दिल्ली क्षेत्र में स्थित एलिवेटेड हिस्से का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, जिसे इस वर्ष पूरा किया जाना प्रस्तावित है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एनएचएआई के दस्तावेजों के अनुसार, ड्रोन सर्वे के जरिये पूरे मार्ग की ऊपर से तस्वीरें और वीडियो जुटाए जाएंगे। इससे सड़क की सतह पर उभर रही दरारें, धंसाव, जलभराव, सर्विस रोड की स्थिति और पुल-फ्लाईओवर की हालत समय रहते सामने आ सकेगी। स्वतंत्र इंजीनियर की जिम्मेदारी केवल ड्रोन सर्वे तक सीमित नहीं होगी। उसे पूरे मार्ग पर सड़क की स्थिति, यातायात व्यवस्था, संरचनाओं की जांच और सड़क सुरक्षा से जुड़े बिंदुओं की भी निगरानी करनी होगी। हर माह प्रगति रिपोर्ट तैयार कर एनएचएआई को सौंपी जाएगी, ताकि परियोजना से जुड़ी जानकारियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियमित रूप से अपडेट की जा सकें।
ब्लैक स्पॉट की भी होगी पहचान
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, ड्रोन सर्वे से जुटाए गए डेटा का उपयोग हादसों की आशंका वाले ब्लैक स्पॉट की पहचान के लिए भी किया जाएगा। कई बार छोटे-छोटे तकनीकी दोष समय के साथ बड़े हादसों का कारण बन जाते हैं। एरियल सर्वे के जरिये ऐसे स्थानों को पहले ही चिन्हित कर वहां चेतावनी संकेत, बैरियर या डिजाइन में सुधार जैसे कदम उठाए जा सकेंगे। इससे सड़क सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी। एनएचएआई ने इस परियोजना के लिए 36 महीनों की अवधि तय की है। इस दौरान स्वतंत्र इंजीनियर न सिर्फ संचालन और देखरेख के कार्यों की निगरानी करेगा, बल्कि गुणवत्ता या अन्य विवादों की स्थिति में मध्यस्थ की भूमिका भी निभाएगा।
तीन हिस्सों बांटकर हुआ है निर्माण कार्य...
छह लेन का यह एक्सेस कंट्रोल लिंक की अनुमानित लागत करीब पांच हजार करोड़ है। पूरा लिंक तीन खंडों में तैयार किया जा रहा है। जिसमें दो खंडों का काम पूरा हो चुका है। 26 किमी के फरीदाबाद से सेक्टर-65 तक केएमपी पर वाहन चल रहे हैं। वहीं, जैतपुर से फरीदाबाद के सेक्टर-65 तक के 24 किमी हिस्से का काम पूरा भी हो गया है। डीएनडी से जैतपुर के बीच 12 किमी के हिस्से में से नौ किमी के एलिवेटेड हिस्से पर काम चल रहा है।
