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Noida News: प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत लोन का झांसा देकर ठगी करने वाले छह गिरफ्तार

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2026 09:11 PM IST
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6 arrested for allegedly duping people with loans
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फोटो

छह माह में 100 से अधिक लोगों से छह करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का आरोप
बिसरख कोतवाली पुलिस व साइबर सेल ने कृष्णा काउंटी से कर्नाटक के छह आरोपी को दबोचा
सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर लोगों को शिकार बनाते थे आरोपी


माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। बिसरख पुलिस व साइबर सेल ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना (पीएमईजीपी) के तहत लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय काॅल सेंटर गिरोह का खुलासा किया है। मामले में छह बदमाशों कर्नाटक के बीजापुर के धर्मराज राठौर (38), रवि कुमार (26), किशन राठौर (32), अक्षय (28) व किरण नायर (21) और विजयपुर के किरण बाबू राठौर को गिरफ्तार किया गया है। कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद ये सोशल मीडिया एल्गोरिदम का इस्तेमाल कर जरूरतमंद लोगों तक पहुंच बनाते थे। इनके कब्जे से 18 की-पैड मोबाइल फोन, छह स्मार्ट फोन और 15 रजिस्टर कॉलिंग डाटा बरामद हुए हैं। सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन देकर वह लोगों को फंसाते थे। छह माह में इन्होंने 100 से अधिक लोगों से छह करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है।
डीसीपी सेंट्रल नोएडा शैलेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपियों को कृष्णा काउंटी टॉवर-ए सेक्टर-1 की छत से गिरफ्तार किया गया है। इनके खिलाफ थाना बिसरख में प्राथमिकी दर्ज की गई है। सोशल मीडिया पर उनके दिए विज्ञापन पर जब भी कोई जरूरतमंद क्लिक करता तो उनके सामने आरोपियों ने मोबाइल नंबर आते। पीड़ितों के फोन करने पर आरोपी खुद को सरकारी योजना के अधिकृत लोन अधिकारी बताते थे और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत उन्हें सब्सिडी आधारित होम लोन या व्यावसायिक लोन बेहद कम ब्याज दर पर दिलाने का झांसा देते। इसके बाद रजिस्ट्रेशन के नाम पर तीन हजार, इश्योरेंस प्रोसेसिंग फाइल के नाम पर 18 हजार समेत कई तरह के शुल्क लेते थे।
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गिरफ्तार आरोपियों में धर्मराज राठौर 12वीं पास है, जबकि रवि कुमार व अक्षय 10वीं , किशन राठौर छठी, किरन बाबू 9वीं व किरन नायर बीएससी पास है। ट्रैकिंग से बचने के लिए ये लगातार सिम कार्ड बदलते रहते थे और की-पैड मोेबाइल फोन का इस्तेमाल करते थे।
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मोबाइल व खातों की जांच शुरू
पुलिस बरामद मोबाइल फोन, बैंक खातों, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल डाटा की फोरेंसिक जांच करा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपी प्रति व्यक्ति दो से चार लाख तक की वसूली करते थे। पूछताछ में सामने आया कि पूरे गिरोह का संचालन एक ''''बॉस'''' के निर्देश पर किया जा रहा था। पुलिस अब मास्टरमाइंड और अन्य सहयोगियों की तलाश में है। आरोपियों के अनुसार, मास्टरमाइंड विदेश में बैठा है, जिसका पता उन्हें भी नहीं है। सोशल मीडिया के माध्यम से आरोपी उसके संपर्क में आए थे। आरोपियों को प्रतिमाह 25 हजार रुपये और प्रत्येक ठगी पर 30 प्रतिशत कमीशन मिलता था। जांच में सामने आया कि गिरोह के ग्रेटर नोएडा ब्रांच का सरगना धर्मराज है। उसी ने ने कर्नाटक के अन्य युवकों को काम का लालच दिया था।

चार बैंकों के खाते में मिला संदिग्ध लेनदेन
आरोपी ठगी का पैसा उज्जीवन, कैनरा, भारतीय स्टेट बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खाते में ट्रांसफर करते थे। बैंक खातों व मोबाइल नंबरों की जांच कर पुलिस पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितने लोग गिरोह का शिकार बने हैं। साइबर अपराध से बचने के लिए गिरोह बेहद शातिर तरीके अपनाता था। आरोपी अधिकतर की-पैड मोबाइल फोन का उपयोग करते थे ताकि उनकी डिजिटल ट्रैकिंग कम हो सके। इसके अलावा वह लगातार सिम कार्ड बदलते रहते थे। जिससे पुलिस के लिए उनकी लोकेशन ट्रेस करना कठिन हो जाता था।
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