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Noida News: घर संभालने के साथ बसों की कमान भी संभाल रहीं महिलाएं
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महिलाओं ने कहा- पहले कुछ क्षेत्र सिर्फ पुरुषों के माने जाते थे, आज इनमें नारी भी अपना लोहा मनवा रहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। आज की नारी किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। वे घर के कामकाज तो बखूबी संभालतीं ही हैं, घर के बाहर किसी भी पेशे की जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभातीं हैं। जो क्षेत्र पहले सिर्फ पुरुषों के लिए समझे जाते थे, वहां भी महिलाओं ने अपनी मेहनत, जिद्द और लगन का लोहा मनवाया है। इसी का परिणाम है कि वे आज आर्थिक रूप से सशक्त हैं। आत्मनिर्भर हैं। बीते कई वर्षों से रोडवेज में भी महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है। ग्रेनो डिपो में परिचालक आज ऐसी ही तीन महिलाओं की कहानी, जो काम के साथ घर की जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभा रहीं हैं।
- लंबे वक्त से परिचालक के रूप में काम कर रही हूं। घर की जिम्मेदारियां भी संभाल रही हूं। इससे दूसरों पर आर्थिक निर्भरता कम हुई है।
- योगेश्वरी
-पहले यह क्षेत्र पुरुषों के माने जाते थे, आज महिलाएं भी इनमें अच्छा कर रहीं हैं। मैं 7-8 वर्षों से परिचालक हूं। हर महीने करीब 20 हजार तक कमा लेती हूं।
-रुचि शर्मा
- पिछले 6 वर्षों से परिचालक हूं। कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। इस पद को परीक्षा पास कर लिया है। उसमें सफल होने के बाद ही नौकरी मिली है।
-आकांक्षा
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। आज की नारी किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। वे घर के कामकाज तो बखूबी संभालतीं ही हैं, घर के बाहर किसी भी पेशे की जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभातीं हैं। जो क्षेत्र पहले सिर्फ पुरुषों के लिए समझे जाते थे, वहां भी महिलाओं ने अपनी मेहनत, जिद्द और लगन का लोहा मनवाया है। इसी का परिणाम है कि वे आज आर्थिक रूप से सशक्त हैं। आत्मनिर्भर हैं। बीते कई वर्षों से रोडवेज में भी महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है। ग्रेनो डिपो में परिचालक आज ऐसी ही तीन महिलाओं की कहानी, जो काम के साथ घर की जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभा रहीं हैं।
- लंबे वक्त से परिचालक के रूप में काम कर रही हूं। घर की जिम्मेदारियां भी संभाल रही हूं। इससे दूसरों पर आर्थिक निर्भरता कम हुई है।
- योगेश्वरी
-पहले यह क्षेत्र पुरुषों के माने जाते थे, आज महिलाएं भी इनमें अच्छा कर रहीं हैं। मैं 7-8 वर्षों से परिचालक हूं। हर महीने करीब 20 हजार तक कमा लेती हूं।
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-रुचि शर्मा
- पिछले 6 वर्षों से परिचालक हूं। कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। इस पद को परीक्षा पास कर लिया है। उसमें सफल होने के बाद ही नौकरी मिली है।
-आकांक्षा