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Noida News: सीएचसी भवन जर्जर, मरीज-तिमारदारों को जान की चिंता
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सीएचसी भवन की दीवारों से टूटकर गिर रहे प्लास्टर, जहां-तहां फैला है कचरा
पुनीत कुमार
यमुना सिटी। जेवर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की इमारत बदहाल हो गई है। जगह-जगह से पेंट उखड़ चुका है। कहीं-कहीं दीवारों से प्लास्टर टूटकर गिर चुके हैं। सीएचसी की पूरी बिल्डिंग ही जर्जर दिख रही है।
मरीजों का कहना है कि अस्पताल की इमारत जर्जर हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का इस ओर ध्यान नहीं जाता है। मरीज इकरामन ने बताया कि इमारत जर्जर होने के साथ अस्पताल में जगह-जगह कचरा भी फैला रहता है। जगह-जगह धूल-मिट्टी जमा रहती है। मुख्य इमारत में वर्षों से रंग-रोगन भी नहीं हुआ है। प्लास्टर झड़ने से मरीजों और तिमारदारों को सुरक्षा की चिंता भी रहती है।
जान जोखिम में डालकर रह रहे कर्मी
अस्पताल से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के आवास जर्जर हैं। कर्मियों का कहना है कि इमारत की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि रहने में डर लगता है। कई दीवारों से प्लास्टर गिर गया है और कई जगहों पर दरारें साफ-साफ नजर आती हैं। कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
कोट
सीएचसी भवन के मेंटेनेंस के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। आवासीय परिसर में रहने वाले लोगों को खुद ही मेंटेनेंस कराना पड़ता है। सरकार की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है। -डॉ. सर्फे जेया, अधीक्षक, सीएचसी जेवर
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सीएचसी भवन की दीवारों से टूटकर गिर रहे प्लास्टर, जहां-तहां फैला है कचरा
पुनीत कुमार
यमुना सिटी। जेवर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की इमारत बदहाल हो गई है। जगह-जगह से पेंट उखड़ चुका है। कहीं-कहीं दीवारों से प्लास्टर टूटकर गिर चुके हैं। सीएचसी की पूरी बिल्डिंग ही जर्जर दिख रही है।
मरीजों का कहना है कि अस्पताल की इमारत जर्जर हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का इस ओर ध्यान नहीं जाता है। मरीज इकरामन ने बताया कि इमारत जर्जर होने के साथ अस्पताल में जगह-जगह कचरा भी फैला रहता है। जगह-जगह धूल-मिट्टी जमा रहती है। मुख्य इमारत में वर्षों से रंग-रोगन भी नहीं हुआ है। प्लास्टर झड़ने से मरीजों और तिमारदारों को सुरक्षा की चिंता भी रहती है।
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जान जोखिम में डालकर रह रहे कर्मी
अस्पताल से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के आवास जर्जर हैं। कर्मियों का कहना है कि इमारत की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि रहने में डर लगता है। कई दीवारों से प्लास्टर गिर गया है और कई जगहों पर दरारें साफ-साफ नजर आती हैं। कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
कोट
सीएचसी भवन के मेंटेनेंस के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। आवासीय परिसर में रहने वाले लोगों को खुद ही मेंटेनेंस कराना पड़ता है। सरकार की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है। -डॉ. सर्फे जेया, अधीक्षक, सीएचसी जेवर

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