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Noida News: पॉक्सो व दुष्कर्म के आरोप से युवक बरी
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(अदालत से)
-पीड़िता ने कोर्ट में कहा- अपनी मर्जी से गई थी और शादी की थी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। विशेष पॉक्सो अदालत ने अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो के मामले में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। मामला वर्ष 2016 का है। फेज-3 थाने में दर्ज मुकदमे में आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसकी बेटी लापता हो गई थी और उसका अपहरण कर लिया गया था। बाद में न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना की गई और आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया।
सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि वह अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी और दोनों ने विवाह कर लिया था। वह करीब साढ़े नौ महीने तक आरोपी के साथ पति-पत्नी की तरह रही और किसी प्रकार का दबाव या जबरदस्ती नहीं थी। वह आगे भी आरोपी के साथ रहना चाहती है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष पीड़िता के नाबालिग होने का आरोप भी ठोस रूप से सिद्ध नहीं कर सका। उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं हुआ कि आरोपी ने पीड़िता को उसकी इच्छा के खिलाफ अपने साथ ले गया या उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाना न्यायोचित है।
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-पीड़िता ने कोर्ट में कहा- अपनी मर्जी से गई थी और शादी की थी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। विशेष पॉक्सो अदालत ने अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो के मामले में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। मामला वर्ष 2016 का है। फेज-3 थाने में दर्ज मुकदमे में आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसकी बेटी लापता हो गई थी और उसका अपहरण कर लिया गया था। बाद में न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना की गई और आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया।
सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि वह अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी और दोनों ने विवाह कर लिया था। वह करीब साढ़े नौ महीने तक आरोपी के साथ पति-पत्नी की तरह रही और किसी प्रकार का दबाव या जबरदस्ती नहीं थी। वह आगे भी आरोपी के साथ रहना चाहती है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष पीड़िता के नाबालिग होने का आरोप भी ठोस रूप से सिद्ध नहीं कर सका। उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं हुआ कि आरोपी ने पीड़िता को उसकी इच्छा के खिलाफ अपने साथ ले गया या उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाना न्यायोचित है।
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