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Noida News: दहेज हत्या के मामले में आरोपी पति की जमानत खारिज
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। दहेज हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी पति दीपक की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामला थाना बादलपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार मृतका सुमन की शादी मई 2025 में दीपक के साथ हुई थी। विवाह में लड़की पक्ष ने करीब 10 लाख रुपये खर्च किए थे। लेकिन ससुराल पक्ष शादी में मिले दहेज से संतुष्ट नहीं था और अतिरिक्त दहेज के रूप में दो लाख रुपये तथा मोटरसाइकिल की मांग कर रहा था। वादी रामकुमार ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही सुमन को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। घटना से ठीक पहले 16 सितंबर 2025 को सुमन ने अपनी मां को फोन कर बताया था कि उसके पति दीपक, ससुर ओमप्रकाश, सास मुनेश और अन्य परिजन उसे मारने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद जब मायके वाले सुमन की ससुराल पहुंचे तो वह मृत अवस्था में मिली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका की मौत फंदा लगने से दम घुटने के कारण होना दर्ज है। अदालत ने माना कि यह एक अप्राकृतिक मृत्यु है, जो विवाह के चार माह के भीतर हुई। ऐसे में दहेज मृत्यु के आरोपों को प्रथम दृष्टया नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दहेज प्रताड़ना के आरोपों को देखते हुए आरोपी को राहत देने का आधार नहीं बनता।
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ग्रेटर नोएडा। दहेज हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी पति दीपक की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामला थाना बादलपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार मृतका सुमन की शादी मई 2025 में दीपक के साथ हुई थी। विवाह में लड़की पक्ष ने करीब 10 लाख रुपये खर्च किए थे। लेकिन ससुराल पक्ष शादी में मिले दहेज से संतुष्ट नहीं था और अतिरिक्त दहेज के रूप में दो लाख रुपये तथा मोटरसाइकिल की मांग कर रहा था। वादी रामकुमार ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही सुमन को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। घटना से ठीक पहले 16 सितंबर 2025 को सुमन ने अपनी मां को फोन कर बताया था कि उसके पति दीपक, ससुर ओमप्रकाश, सास मुनेश और अन्य परिजन उसे मारने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद जब मायके वाले सुमन की ससुराल पहुंचे तो वह मृत अवस्था में मिली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका की मौत फंदा लगने से दम घुटने के कारण होना दर्ज है। अदालत ने माना कि यह एक अप्राकृतिक मृत्यु है, जो विवाह के चार माह के भीतर हुई। ऐसे में दहेज मृत्यु के आरोपों को प्रथम दृष्टया नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दहेज प्रताड़ना के आरोपों को देखते हुए आरोपी को राहत देने का आधार नहीं बनता।